बम धमाके में पति की हुई मौत, गोद में 5 माह के बच्चे को लेकर पत्नी ने वीडियो कॉल पर देखा दाह संस्कार

काबुल में धमाके के बाद का मंजर (फोटो-AP)

काबुल में धमाके के बाद का मंजर (फोटो-AP)

Kabul Blast: सनी पिछले साल ही अक्टूबर में पिता बने थे, लेकिन काबुल में रहने के चलते वो एक बार भी अपने बेटे को नहीं देख सके थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 8, 2021, 10:07 AM IST
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लुधियाना.  अफगानिस्तान (Afghanistan) की राजधानी काबुल में शनिवार को हुए बम धमाके (Bomb Blast) में लुधियाना के सनी सिंह की मौत हो गई. इसके अलावा इस हादसे में सिख समुदाय के दो और लोग भी घायल हो गए थे. सनी का अंतिम संस्कार काबुल में ही किया गया. उनकी पत्नी वहां नहीं पहुंच सकी. ऐसे में उन्होंने मोबाइल पर ही वीडियो कॉल के जरिए अपने पति के दाह संस्कार को देखा. सनी अफगानिस्तान में मसाले और दवाइयों का कारोबार करते थे.

सनी पिछले साल ही अक्टूबर में पिता बने थे, लेकिन काबुल में रहने के चलते वो एक बार भी अपने बेटे को नहीं देख सके थे. रविवार को उनका बेटा मां की गोद में ही था जब वो वीडियो कॉल के जरिए अपने पति का दाह संस्कार देख रहीं थी. सन्नी बच्चे का हाल चाल जानने के लिए हर दिन अपनी पत्नी को फोन करते थे. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पति पिछले साल काबुल गए थे. उन्होंने कहा, 'शुक्रवार की रात उसने फोन कर बच्चे का हाल जाना था. लेकिन अगले दिन ही उनकी मौत की खबर आ गई.'

मां और भाई काबुल में
एक और अफगान सिख हरिंदर सिंह खालसा, जिसका परिवार लुधियाना के मीना बाजार में रहता है, उन्होंने काबुल से कहा, 'विस्फोट होने पर सनी, चूचा सिंह और शेर सिंह शोर बाजार में अपनी दुकानों में थे. दुकानें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गईं. चूचा सिंह और शेर सिंह के परिवार भी लुधियाना में हैं. सनी का जन्म काबुल में हुआ था और शनिवार को ही उनका अंतिम संस्कार किया गया था. उनकी मां और भाई काबुल में हैं लेकिन पत्नी और बेटा लुधियाना में हैं. वो लुधियाना जाने की योजना बना रहा था, लेकिन तकदीर ने उसके साथ कुछ और कर दिया.
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सिख समुदाय में डर
सिख समुदाय के कुछ सदस्य अभी भी काबुल, जलालाबाद और अफगानिस्तान के अन्य शहरों में बचे हैं. खालसा ने कहा, ' वे मजबूरी से यहां हैं. वे वास्तव में गरीब हैं और देश को छोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकते क्योंकि उनके बिजनेस चौपट हो जाएगा. सनी उन गरीब सिखों में से एक था जो अपने परिवार के लिए कमाने के लिए काबुल में रहता था. वह पैसा लुधियाना में अपने परिवार को देता था. हम भारत सरकार से अफगानिस्तान से सिखों को भी छुड़ाने की अपील करते हैं.'
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