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Punjab Election: आजादी के बाद से अब तक जानिए पंजाब की राजनीति के बारे में A to Z

2017 के चुनावों में आम आदमी पार्टी ने 23.72 प्रतिशत वोट  हासिल किया था.

2017 के चुनावों में आम आदमी पार्टी ने 23.72 प्रतिशत वोट  हासिल किया था.

Punjab Assembly Elections: 1952 में जब विधानसभा चुनाव हुए तो इसके बाद भीम सेन सच्चर ही राज्य के पहले मुख्यमंत्री चुने ग ...अधिक पढ़ें

चंडीगढ़. 15 अगस्त 1947 को कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के नेता गोपीचंद भार्गव (Gopichand Bhargava) को पंजाब का पहला मुख्यमंत्री बनाया गया था. बाद में भार्गव को हटाकर भीम सेन सच्चर को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन वह सिर्फ 188 दिन तक ही इस पद पर रहे. एक बार फिर गोपीचंद भार्गव को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई. जून 1950 में उनके हटने के बाद राज्य में 302 दिन तक राष्ट्रपति शासन लगा रहा. 1952 में जब विधानसभा चुनाव हुए तो इसके बाद भीम सेन सच्चर ही राज्य के पहले मुख्यमंत्री चुने गए. साल 1956 में पटियाला और पूर्वी पंजाब स्टेट्स यूनियन का भी पंजाब में विलय कर दिया गया और अब तक 105 सदस्यों की विधानसभा में अब 121 सदस्य हो गए. राज्य में 2 मेंबर और सिंगल मेंबर कॉन्स्टीट्वेंसी नियम था. जिसके तहत 1952 से 1957 तक 105 सदस्यों की विधानसभा में 126 सीटें थीं, क्योंकि उस समय 2 मेंबर कॉन्स्टीट्वेंसी थीं.

1957 में 121 सदस्यों की विधानसभा में 154 सीटें हो गई. इस 2 मेंबर कॉन्स्टीट्वेंसी की संख्या बढ़कर 33 हो चुकी थी. 1956 में भीम सेन सच्चर ने इस्तीफा दे दिया और प्रताप सिंह कैरों राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री बने. प्रताप सिंह कैरों इसके बाद 8 साल ज्यादा समय तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे, क्योंकि कांग्रेस ने 1957 के चुनाव में भी जीत दर्ज की थी. 1962 के चुनाव में भी कांग्रेस सत्ता में लौटी और प्रताप सिंह कैरों मुख्यमंत्री बने. हालांकि, 21 जून 1964 को उन्हें भी अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और फिर गोपीचंद भार्गव को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई.

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1969 की जीत के बाद पहली बार सीएम बने प्रकाश सिंह बादल
इसके बाद 20 मार्च 1967 को चुनी गई चौथी विधानसभा में राज्य की सत्ता अकाली दल के पास चली गई. इसी विधानसभा के दौरान ‘पंजाब जनता पार्टी’ को भी सत्ता का स्वाद चखने का मौका मिला. 13 मार्च 1969 को गठित हुई पांचवीं विधानसभा में एक बार फिर अकाली दल सत्ता पर काबिज हुई. पांचवीं विधानसभा में दो मुख्यमंत्री रहे, जिसमें गुरनाम सिंह और प्रकाश सिंह बादल. यही वो वक्त था जब प्रकाश सिंह बाद पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने. छठवीं विधानसभा में फिर कांग्रेस ने बाजी मारी और सत्ता में पहुंची. 21 मार्च 1972 को चुनी गई सरकार में कांग्रेस ने जैल सिंह को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी. 30 जून 1977 के चुनावों में फिर अकाली दल की वापसी सत्ता में हुई और सातवीं विधानसभा में प्रकाश सिंह बादल को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला. हालांकि सरकार ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया.

23 जून 1980 को फिर विधानसभा चुनाव हुए और कांग्रेस को 8वीं विधानसभा में सत्ता हासिल हुई. कांग्रेस ने दरबारा सिंह को सीएम बनाया. नौंवीं विधानसभा, जो 14 अक्टूबर 1985 को गठित हुई, इसमें शिरोमणि दल सत्ता के शीर्ष पर पहुंची. अकाली दल ने अब सुरजीत सिंह बरनाला को राज्य का मुख्यमंत्री घोषित किया. 10 वीं विधानसभा में राज्य ने तीन मुख्यमंत्री देखे. 16 मार्च 1992 को गठित हुई विधानसभा में बेअंत सिंह, हरचरण सिंह बराड़, राजेंद्र कौर भट्टल को सीएम की कुर्सी पर बैठने का मौका मिला. कांग्रेस इस दौरान राज्य की सत्ता में रही.

3 मार्च 1997 के चुनावों में गठित विधानसभा में एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल को सत्ता मिली. प्रकाश सिंह बादल एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री बने. 21 मार्च 2002 को गठित 12वीं विधानसभा में कांग्रेस को सत्ता हासिल हुई और पहली बार अमरिंदर सिंह सीएम बने. अमरिंदर सिंह ने पूरे पांच साल सरकार चलाई. 13वीं विधानसभा 1 मार्च 2007 को बनीं और प्रकाश सिंह बादल को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला. साल 2012 में लगातार दूसरी बार शिरोमणि अकाली दल सत्ता में आई और प्रकाश सिंह बादल ही राज्य के मुख्यमंत्री बने. 15वीं विधानसभा ने राज्य में दो मुख्यमंत्रियों को कांग्रेस की सरकार में देखा. 24 मार्च 2017 को अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया और फिर चरणजीत सिंह चन्नी को हाल ही में अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद सत्ता की कुर्सी पर बैठने का मौका मिला.

Tags: Captain Amarinder Singh, Prakash singh badal, Punjab elections, Shiromani Akali Dal

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