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कोटकपूरा फायरिंग और बेअदबी के मामलों में SIT की सिख धर्म गुरु ढंढरियावाला से पूछताछ

मई 2016 में लुधियाना में सिख धर्म गुरु संत रंजीत सिंह ढंडरियावाला पर जानलेवा हमला हुआ था जिसमें वह में बाल-बाल बच गए थे.

मई 2016 में लुधियाना में सिख धर्म गुरु संत रंजीत सिंह ढंडरियावाला पर जानलेवा हमला हुआ था जिसमें वह में बाल-बाल बच गए थे.

Kotkapura Firing and Sacrilege Case: 14 अक्टूबर, 2015 को बेअदबी के मामलों को लेकर प्रदर्शनकारियों पर कोटकपूरा और बहिबल कलां में पुलिस ने फायरिंग कर दी थी जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी.

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    चंडीगढ़. कोटकपूरा पुलिस फायरिंग और बेअदबी (Kotkapura police firing and sacrilege) की घटनाओं की जांच कर रहे विशेष जांच दल (The Special Investigation Team SIT) ने सोमवार को पटियाला में सिख धर्म गुरु संत बाबा रंजीत सिंह ढंढरियावला से पूछताछ की. ढंढरियावाला Sikh (Religious leader Sant Baba Ranjit Singh Dhandriyawala) ने बेअदबी की घटनाओं के खिलाफ काफी तीखे भाषण दिए थे. अक्तूबर 2015 में बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी (Sri Guru Granth Sahib sacrilege case in Bargadi) मामले में सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वालों में संत रणजीत सिंह ढडरियां वाले सबसे आगे रहे थे.


    इस मामले में कोटकपूरा पुलिस ने बाबा ढडरियां वाले को गिरफ्तार भी किया था. उन पर आरोप थे कि बेअदबी मामले के आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर जब धरना दिया जा रहा था, तो बाबा समेत बाकी आरोपियों ने पुलिस वालों से मारपीट की, उनके वाहन तोड़े, ट्रैफिक जाम करके लोगों को परेशान किया था. मई 2016 में लुधियाना में रंजीत सिंह ढंडरियावाला पर जानलेवा हमला हुआ था जिसमें वह में बाल-बाल बच गए थे, लेकिन उनके एक शिष्य की गोली लगने से मौत हो गई थी.


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    गौरतलब है कि साल 2015 में 14 अक्टूबर को बेअदबी के मामलों को लेकर प्रदर्शनकारियों पर कोटकपूरा और बहिबल कलां में पुलिस ने फायरिंग कर दी थी जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि पुलिस सहित कई लोग घायल हो गए थे. तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए 16 अक्टूबर 2015 को रिटायर्ड जज जस्टिस जोरा सिंह के नेतृत्व में आयोग का गठन किया था. इस आयोग पर जब सिख संगठनों ने सवाल उठाए तो 27 दिसंबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस मार्कंडेय काटजू के नेतृत्व में एक अन्य जांच आयोग का गठन किया गया.





    एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस काटजू की रिपोर्ट को फरवरी 2016 में अकाली-भाजपा सरकार ने मानने से इनकार दिया. यही नहीं जस्टिस जोरा सिंह की रिपोर्ट को भी 30 जून 2016 में सरकार ने नकार दिया. कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद 2017 को जस्टिस रणजीत सिंह के नेतृत्व में एक जांच आयोग का गठन कर जांच शुरू की थी. इसके बाद बनी एसआईटी को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है और मामले में हाईकार्ट के आदेशों पर बनी ही एसआईटी दोबारा जांच कर रही है.

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