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लुधियाना लोकसभा सीट: तीसरे नंबर पर पहुंचे शिअद के सामने होगी चुनौती

News18Hindi
Updated: May 9, 2019, 12:11 PM IST
लुधियाना लोकसभा सीट: तीसरे नंबर पर पहुंचे शिअद के सामने होगी चुनौती
2019 में अकाली दल के सामने बड़ी चुनौती है.

2019 लोकसभा चुनावों की बात करें तो यहां से अकाली दल ने महेशिंदर सिंह को उतारा है. जबकि कांग्रेस ने मौजूदा सांसद रवनीत सिंह बिट्टू पर दांव लगाया है. आम आदमी पार्टी ने प्रो.तेजपाल सिंह गिल को टिकट दी है. लिहाजा

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पंजाब का लुधियाना शहर उत्‍तरी भारत का औद्यौगिक केंद्र है. वहीं वर्ल्‍ड बैंक ग्रुप के अनुसार बिजनेस करने के लिए यह भारत का सबसे बेहतर शहर है. इसे भारत का मेनचेस्‍टर भी कहा जाता है. लुधियाना लोकसभा सीट काफी महत्‍व रखती है. यहां शुरू से ही कांग्रेस और शिरो‍मणि अकाली दल (शिअद) के बीच टक्‍कर रही है. दोनों ही पार्टियां बारी-बारी से यहां जीत दर्ज कर चुकी हैं. हालांकि 2014 में पहली बार हुआ कि आम आदमी पार्टी के आने के बाद न केवल अकाली दल ने यह सीट गंवाई बल्कि वोट प्रतिशत में भी अकाली दल खिसककर तीसरे नंबर पर आ गया.

पिछले चुनावों में मोदी लहर के बावजूद बीजेपी-शिअद का वोट प्रतिशत नीचे गिर गया. इस सीट का इतिहास देखें तो 1952 में भारतीय कांग्रेस से कांग्रेस के बहादुर सिंह जीते. 1957 में हुए उपचुनाव तक यह सीट कांग्रेस के ही पास रही. हालांकि 1962 में स्‍वतंत्र पार्टी ने यह सीट कांग्रेस से हथिया ली. लेकिन कांग्रेस उस वक्‍त की सबसे बड़ी पार्टी थी और 1967 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस ने सीट छीन ली.

पिछले दो बार से लुधियाना में कांग्रेस जीतती आ रही है.
पिछले दो बार से लुधियाना में कांग्रेस जीतती आ रही है.


1977 में यहां शिरोमणि अकाली दल का खाता खुला और जगदेव सिंह तलवंडी चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. उसके बाद 1984 से 1998 तक यह सीट अकाली दल के पास रही. फिर 2004 और 2014 में भी इस सीट पर अकाली दल का कब्‍जा रहा. एक खास बात जो इस सीट पर देखने को मिलती है वह यह है कि यह सीट देश में चलने वाली लहरों के विपरीत परिणाम देती है. 1984 में जब देश में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निधन के बाद कांग्रेस की लहर थी तो यहां अकाली दल ने चुनाव जीता वहीं 2014 में मोदी लहर के बावजूद यह सीट कांग्रेस के खाते में गई.

2019 लोकसभा चुनावों की बात करें तो यहां से अकाली दल ने महेशिंदर सिंह को उतारा है. जबकि कांग्रेस ने मौजूदा सांसद रवनीत सिंह बिट्टू पर दांव लगाया है. आम आदमी पार्टी ने प्रो.तेजपाल सिंह गिल को टिकट दी है. लिहाजा यहां पर तीनों ही पार्टियों में कड़ा मुकाबला है. पिछली बार बेहतर प्रदर्शन करने के बाद जहां आम आदमी पार्टी यहां से सीट जीतने की कोशिश कर रही है वहीं कांग्रेस फिर जीतने और अकाली दल वापसी की उम्‍मीद में है.

पंजाब की सभी 13 लोकसभा सीटों पर आखिरी चरण में 19 मई को मतदान होगा. उसके बाद 23 मई को चुनाव परिणाम आऐंगे. गौरतलब है कि पंजाब में कुल 13 लोकसभा सीटें हैं, 2014 के चुनाव में बीजेपी-अकाली गठबंधन को यहां 6 सीटों में जीत मिली.

लुधियाना लोकसभा सीट पर आम आदमी पार्टी का भी अच्‍छा जनाधार है.
लुधियाना लोकसभा सीट पर आम आदमी पार्टी का भी अच्‍छा जनाधार है.
लोकसभा चुनाव 2014 में जनादेश
पिछले लोकसभा चुनाव में देशभर में मोदी लहर के बावजूद पंजाब में बीजेपी-अकाली को खास कामयाबी नहीं मिली. लुधियाना लोकसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार रवनीत सिंह बिट्टू ने आम आदमी पार्टी के उम्‍मीदवार हरविंदर सिंह फुल्का को 39,709 वोटों से हराया. रवनीत सिंह को 3,00,459 वोट मिले थे जबकि फुल्का को 2,60,750 वोट हासिल हुए. वहीं अकाली-बीजेपी उम्मीदवार मनप्रीत सिंह अयाली को कुल 2,56,590 वोट मिले. इस दौरान निर्दलीय उम्मीदवार सिमरजीत सिंह वैंस को 2,10,457 वोट मिले. लिहाजा संसदीय सीट पर बीजेपी-अकाली उम्मीदवार पिछड़कर तीसरे नंबर पर पहुंच गए. 2009 में भी यह सीट कांग्रेस के खाते में गई थी. तब कांग्रेस के मनीष तिवारी ने जीत दर्ज की थी.

सामाजिक ताना-बाना
लुधियाना संसदीय क्षेत्र में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं. जिनमें लुधियाना पूर्वी, लुधियाना दक्षिण, अतम नगर, लुधियाना सेंट्रल, लुधियाना पश्चिम, लुधियाना उत्तर, गिल्ल (सुरक्षित), ठखा और जगरोन (सुरक्षित) शामिल है. लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान यहां कुल 15,61,201 मतदाता थे, पुरुष मतदाताओं की संख्या 8,35,632 और महिला मतदाताओं की संख्या 7,25,569 थीं.

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First published: May 9, 2019, 10:41 AM IST
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