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'कत्ल' के 14 साल बाद जिंदा मिला शख्स, मर्डर केस में फंसे थे 3 पुलिसकर्मी, जानें- क्या थी साजिश

News18Hindi
Updated: September 1, 2019, 5:40 PM IST
'कत्ल' के 14 साल बाद जिंदा मिला शख्स, मर्डर केस में फंसे थे 3 पुलिसकर्मी, जानें- क्या थी साजिश
शख्स के घरवालों को सरकार से आर्थिक सहायता भी मिली थी (File Photo)

पंजाब (Punjab) के लुधियाना (Ludhiana) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां जिस युवक (Youth) की हत्‍या (Murder) के मामले में तीन पुलिसकर्मी (Policemen) वर्षों से मुकदमे के कोर्ट (Court) के चक्कर लगा रहे थे, वह युवक 14 साल बाद जी‍वित मिला है.

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  • Last Updated: September 1, 2019, 5:40 PM IST
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पंजाब (Punjab) के लुधियाना (Ludhiana) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां जिस युवक (Youth) की हत्‍या (Murder) के मामले में तीन पुलिसकर्मी (Policemen) वर्षों से मुकदमे के कोर्ट (Court) के चक्कर लगा रहे थे, वह युवक 14 साल बाद जी‍वित मिला है. इससे मामले में नया मोड़ा आ गया है. जिसके बाद हत्‍या के मामले में कोर्ट के चक्कर काट रहे तीनों पुलिसकर्मियों को राहत मिल गई है. परिवार ने युवक की हत्‍या के आरोप में काफी जिद्दोजहद के बाद तीन पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज कराया था.

ये था मामला
इस मामले की जानकारी देते रिटायर्ड डीएसपी अमरजीत सिंह ने बताया कि जब वह 2005 में थाना डेहलों के प्रभारी के तौर पर तैनात थे. तब 25 अगस्त को उन्होंने एएसआई जसवंत सिंह, हवलदार काबल सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ गांव रंगीयां के हरदीप सिंह पुत्र नगिंदर सिंह को 70 किलो भुक्की के साथ गिरफ्तार किया था. उसके खिलाफ थाना डेहलों में मुकद्दमा दर्ज किया गया. पुलिस जब उसे पूछताछ के लिए ला रही थी तो वह किला रायपुर सूए के पास वह चकमा देकर फरार हो गया. इसके बाद नगिंदर सिंह ने बेटे हरदीप सिंह को पुलिस हिरासत में अवैध तौर पर रखे जाने के शक में 28 अगस्त 2005 को वारंट अफसर से रेड करवाई. पर वहां हरदीप नहीं मिला. उस समय वारंट अफसर को बताया गया कि हरदीप के खिलाफ भुक्की बरामदगी और पुलिस को चकमा देकर भगाने के आरोप में मुकद्दमे दर्ज हैं.

बेटे के रूप में अज्ञात शव की पिता ने की थी पहचान

17 सितंबर 2005 को गांव दाया कलां के छप्पड़ से एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ. हरदीप सिंह के पिता नगिंदर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी कि जो शव छप्पड़ से बरामद हुआ वह उसके बेटे हरदीप का था. पुलिस ने उसकी हत्‍या कर शव को फेंक दिया है. हाईकोर्ट ने एडीजीपी क्राइम को जांच सौंपी. जांच रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि जो शव छप्पड़ से मिला था वह हरदीप सिंह का नहीं बल्कि किसी अन्‍य व्‍यक्ति का था. हरदीप सिंह की मौत नहीं हुई. उन्होंने अपने पत्र में हरदीप सिंह, नगिंदर सिंह और अन्य के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज करने की सिफारिश की, जिस पर एएसआई सुखबीर सिंह ने मामला दर्ज किया. सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन हरदीप सिंह को इस मामले में भगौड़ा करार दिया गया.

डीएसपी सहित तीन पर हत्या का केस दर्ज
इसके बाद नगिंदर सिंह ने एक बार फिर से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए इस मामले की जांच की मांग की. हाईकोर्ट के आदेश पर लुधियाना के सैशन जज ने जांच कर रिपोर्ट में कहा कि जो शव गांव दाया कलां के छप्पड़ से मिला वह हरदीप सिंह का ही था. सैशन जज ने तत्कालीन डीएसपी अमरजीत सिंह खैहरा, एएसआई जसवंत सिंह और हवलदार काबल सिंह के खिलाफ हत्‍या के आरोप में मामला दर्ज करने के निर्देश दिए. 21 अगस्त 2010 को हत्या का केस दर्ज किया गया.
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सरकार से मिली थी सहायता राशि
इतना ही नहीं हरदीप सिंह के परिवार को सरकार की तरफ से सहायता राशि भी मिली थी. कत्ल के इस मामले में 14 वर्ष से रिटायर्ड डीएसपी अमरजीत सिंह खैहरा, एएसआई जसवंत सिंह और (तत्कालीन हवलदार) एएसआई काबल सिंह मुकदमे का सामना कर रहे हैं. पुलिस के सीआईए स्टाफ ने जिंदा मिले इस युवक को गिरफ्तार कर लिया है.

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First published: September 1, 2019, 5:40 PM IST
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