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पंजाब में खालिस्तानी आंदोलन के समर्थक नेताओं के भाजपा के साथ आने के क्या मायने हैं?

पंजाब में खालिस्तानी आंदोलन के समर्थक नेताओं के भाजपा के साथ आने के क्या मायने हैं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

BJP in Punjab Assembly Election : दमदमी टकसाल (Damdami Taksal) के प्रमुख वर्तमान में हरनाम सिंह धुम्मा (Harnam Singh Dhumma) हैं, जिनके प्रवक्ता सरचंद सिंह ने भाजपा (BJP) की सदस्यता ली है. इसमें भी खास बात ये है कि सरचंद सिंह खुद भी 1980 के दौर में भिंडरांवाले की लड़ाका छात्र इकाई (Sikh’s Student Federation) के प्रमुख रहे हैं. सरचंद सिंह के भाजपा (BJP) में शामिल होने के तुरंत बाद ही गुरचरण सिंह तोहड़ा ने भी पार्टी की सदस्यता ली, जिन्हें ‘सिखों का पोप’ (Pope of Sikhs) तक कहा जाता है. क्योंकि वे 27 साल तक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंध समिति (SGPC) के प्रमुख रहे हैं.

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चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election) की तारीख (20 फरवरी) नजदीक आते-आते वहां की राजनीति दिलचस्प होती जा रही है. मिसाल के तौर पर, जब किसान आंदोलन (Farmer’s Agitation) रहा था तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) को यहां समर्थक ढूंढे नहीं मिल रहे थे. बल्कि उसका पूरे पंजाब (Punjab) में तीखा विरोध हो रहा था. भाजपा (BJP) के नेता भी किसान आंदोलन (Farmer’s Agitation) को हवा देने के लिए खालिस्तान समर्थकों (Khalistan Supporter) पर दोष मढ़ रहे थे. लेकिन किसान आंदोलन खत्म होते और विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) कार्यक्रम की घोषणा होते ही पहले कांग्रेस (Congress) के दिग्गज रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) अपनी नई पार्टी बनाकर भाजपा (BJP) के साथ आए.

फिर ऐसे ही सुखदेव सिंह ढींढ़सा (Sukhadev Singh Dhindhsa) साथ आए, शिरोमणि अकाली दल (SAD) से अलग होकर, अपना नया दल बनाकर. और अब कुछ खालिस्तान समर्थक (Khalistan Supporter) कहे जाने वाले नेता सीधे भाजपा (BJP) में शामिल हुए हैं. इस ताजा घटनाक्रम ने राजनीति के जानकारों को यह सोचने के लिए मजबूर किया है कि आखिर खालिस्तान समर्थक (Khalistan Supporter) नेताओं के भाजपा (BJP) के साथ आने के मायने क्या हैं? क्या भाजपा (BJP) के लिए पंजाब (Punjab) में समर्थन बढ़ रहा है?

कौन शामिल हुआ भाजपा में, जिसने चौंकाया है

पंजाब (Punjab) में सिखों का एक बड़ा शिक्षा केंद्र है, दमदमी टकसाल (Damdami Taksal). एक जमाने में जरनैल सिंह भिंडरांवाले (Jarnail Singh Bhindaranwale) इसके प्रमुख हुआ करते थे. वही, भिंडरांवाले जो खालिस्तानी आंदोलन (Khalistani Movement) के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं. और जिन्हें प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Prime Minister Indira Gandhi) के कार्यकाल में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर (Swarn Mandir, Amritsar) में हुई सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ (Operation Bluestar) के दौरान मार दिया गया था. इसी दमदमी टकसाल (Damdami Taksal) के प्रमुख वर्तमान में हरनाम सिंह धुम्मा (Harnam Singh Dhumma) हैं, जिनके प्रवक्ता सरचंद सिंह ने भाजपा (BJP) की सदस्यता ली है. इसमें भी खास बात ये है कि सरचंद सिंह खुद भी 1980 के दौर में भिंडरांवाले की लड़ाका छात्र इकाई (Sikh’s Student Federation) के प्रमुख रहे हैं. सरचंद सिंह के भाजपा (BJP) में शामिल होने के तुरंत बाद ही गुरचरण सिंह तोहड़ा ने भी पार्टी की सदस्यता ली, जिन्हें ‘सिखों का पोप’ (Pope of Sikhs) तक कहा जाता है. क्योंकि वे 27 साल तक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंध समिति (SGPC) के प्रमुख रहे हैं.

कैसे बनी इस घटनाक्रम की भूमिका

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कुछ समय पहले ही घोषणा की थी कि 26 दिसंबर की तारीख को अब हर साल ‘वीर बाल दिवस’ (Veer Bal Diwas) के रूप में मनाया जाएगा. मुगल शासन के दौर में शहीद कर दिए गए गुरु गोबिंद सिंह (Guru Gobind Singh) के दो नौनिहालों की याद और सम्मान में यह सिलसिला शुरू करने का फैसला किया गया है. इस घोषणा के तुरंत बाद ही एसजीपीसी (SGPC) के कुछ सदस्यों ने इस फैसले की आलोचना की लेकिन दमदमी टकसाल (Damdami Taksal) के प्रमुख धुम्मा ने इसका स्वागत किया. उन्होंने कहा, ‘कम लोग होते हैं जो अपने फर्ज पूरे करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी ने यह कर के दिखाया है. हमें उनको धन्यवाद देना चाहिए. उन्होंने पूरी दुनिया के सामने गुरु गोबिंद सिंह, उनकी मां और उनके नौनिहालों को मान दिया है. उनकी शहादत के बारे में बताया है.’

अब कौन क्या कह रहा है और आगे क्या हो सकता है

इस नए घटनाक्रम के बाताल्लुक भाजपा और उसके विरोधियों की प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक सी हैं. समर्थन और विरोध वालीं. लेकिन नए-नए भाजपाई हुए सरचंद सिंह क्या कहते हैं, वह मार्के की बात है. उनके मुताबिक, ‘कांग्रेस ने हमारे धर्म, हमारे मंदिर (Swarn Mandir) पर हमला किया. तब भाजपा हमारे साथ खड़ी थी. प्रधानमंत्री बड़ी शान से गुरुपर्व मनाते हैं. हमें उनका समर्थन क्यों नहीं करना चाहिए?’ इसी तरह तोहड़ा कहते हैं, ‘किसी कांग्रेसी प्रधानमंत्री ने आज तक ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star) के लिए माफी मांगी क्या? लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) को वापस लेते हुए उसके लिए पूरे देश के सामने माफी मांगी है.’ इस घटनाक्रम पर अमृतसर की गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के गुरु ग्रंथ साहिब स्टडीज के डायरेक्टर प्रोफेसर अमरजीत सिंह ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में कहते हैं, ‘अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी. आने वाला वक्त ही बताएगा कि इसके असर क्या होंगे. पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election) और उसके बाद भी.’

Tags: BJP, Punjab Assembly Elections 2022

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