दिल्ली का फिर फूलेगा दम! पंजाब के किसानों ने जलानी शुरू की पराली, NASA की तस्वीरों से मिले संकेत

खेतों में पराली जलाने के कारण को दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारणों में से एक माना गया.  (फाइल फोटो)
खेतों में पराली जलाने के कारण को दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारणों में से एक माना गया. (फाइल फोटो)

NASA के सेटलाइट से मिले डेटा के अनुसार 13 से 16 सितम्बर के बीच पंजाब में 5 से 7 जगहों पर खेतों में आग लगी देखी गई. खेत में पराली जलाने को दिल्ली में प्रदूषण के कारणों में से एक माना गया

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 12:33 PM IST
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पंजाब में किसानों ने फसलों के बचे हुए भागों यानी पराली को जलाना शुरू कर दिया है. नेशनल एरोनोटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) की ओर से जारी ताज़ा तस्वीरों से इस बात के संकेत मिले हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पराली जलाने के शुरुआती संकेतों का पता चला है. पराली  जलाना भारतीय दंड संहिता और 1981 के वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत अपराध माना गया है. इसके बावजूद ये किसान धान के बचे हुए भागों को जलाना जारी रखते हैं. यह अभ्यास विकल्पों और श्रमिकों की कमी के चलते शुरू हुआ था.

नासा के संसाधन प्रबंधन प्रणाली से आग का डाटा देने वाले सूचना तंत्र खेतों में आग लगाने में लगातार वृद्धि दिखाता है. गोडार्ड अर्थ साइंसेज टेक्नोलोजी एंड रिसर्च के वैज्ञानिक पवन गुप्ता के हवाले से अखबार ने कहा कि मानचित्र में लाल धब्बे के रूप में दिखाई देने वाली आग ज्यादातर पंजाब के अमृतसर से है. अमृतसर के अलावा पंजाब में तरन तारन, फिरोजपुर, कपूरथला, मनसा और जालंधर में भी पराली जलाई जाती है. 13 से 16 सितम्बर के बीच सेटलाइट से मिले डेटा के अनुसार 5 से 7 जगहों पर खेतों में आग लगी देखी गई.

गुप्ता ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटना शुरू हो गई है. इस साल हम सेटेलाइट एयर क्वालिटी डेटा का विश्लेषण कर अनुमान लगाने का प्रयास करेंगे कि इसका स्थानीय जलवायु और मौसम पर क्या प्रभाव पड़ता है. वहीं एक अधिकारी ने कहा है कि इस साल परली जलाने के कम मामलों की उम्मीद कर रहे हैं.



केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि पिछले साल दिल्ली में वायु प्रदूषण खेतों में फसलों के बचे हुए हिस्से में आग लगाने के कारण बढ़ा था. खेतों में जलाई जाने वाली पराली दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की सरकारों के बीच विवाद का कारण बनती रही है. पिछले साल दिल्ली सरकार ने पराली जलाने के बढ़ते मामलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए केंद्र, पंजाब और हरियाणा सरकार को निशाने पर लिया था.
खेत में पराली जलाने को दिल्ली में प्रदूषण के कारणों में से एक माना गया. पंजाब और हरियाणा की पराली से दिल्ली के प्रदूषण में पिछले साल 46 फीसदी तक प्रभाव था. प्रदूषण का स्तर गंभीर स्तर में आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 5 नवंबर तक सार्वजानिक स्वास्थ्य आपातकाल प्रतिबन्ध निर्माण गतिविधि की घोषणा की.

इससे पहले पंजाब और हरियाणा को किराए के आधार पर कृषि मशीनरी देने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया. फसलों के अवशेष प्रबंधन के लिए ज्यादा उच्च स्तर के मशीनी उपकरण खरीदने में असमर्थ किसानों के लिए यह प्रस्ताव था.
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