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पंजाब: बुर्ज जवाहर सिंह वाला गुरुद्वारा पहुंचे सिद्धू, 2015 में हुई थी बेअदबी की घटना

पंजाब: बुर्ज जवाहर सिंह वाला गुरुद्वारा पहुंचे सिद्धू, 2015 में हुई थी बेअदबी की घटना

गुरुद्वारा पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू. (Pic- Twitter)

गुरुद्वारा पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू. (Pic- Twitter)

Punjab: फरीदकोट के बुर्ज जवाहर सिंह वाला गुरुद्वारे से 2015 में गुरु ग्रंथ साहिब की एक प्रति चोरी हो गई थी. इसके बाद 12 अक्टूबर 2015 को बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब के बाहर पावन स्वरूप की बेअदबी की गई थी. नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि पंजाब के लोगों को इंसाफ मिलेगा. हमें गुरु से प्रार्थना करनी चाहिए गुरु महाराज उन्हें खुद सजा देंगे. ​नवजोत सिंह सिद्धू की बेअदबी और ड्रग्स के मामले में अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.

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    चंडीगढ़. आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पंजाब (Punjab) में सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो चुके हैं. इसी कड़ी में शुक्रवार को अपना इस्तीफा वापिस लेने के बाद पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ने शनिवार को फरीदकोट के बुर्ज जवाहर सिंह वाला गुरुद्वारा (Burj Jawahar Singh Wala Gurdwara) में अरदास की कि 2015 में गुरु ग्रंथ साहिब की अपवित्रता में शामिल लोगों को ऐसी सजा दी जाए जिसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उदाहरण बने. फरीदकोट के बुर्ज जवाहर सिंह वाला गुरुद्वारे से 2015 में गुरु ग्रंथ साहिब की एक प्रति चोरी हो गई थी. इसके बाद 12 अक्टूबर 2015 को बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब के बाहर पावन स्वरूप की बेअदबी की गई थी.

    उन्होंने इस मुद्दे पर गुरुद्वारे में स्थानीय लोगों से भी बातचीत की. स्थानीय लोगों से बातचीत करते हुए सिद्धू ने कहा कि पंजाब के लोगों को इंसाफ मिलेगा. हमें गुरु से प्रार्थना करनी चाहिए गुरु महाराज उन्हें खुद सजा देंगे. ​नवजोत सिंह सिद्धू की बेअदबी और ड्रग्स के मामले में अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.

    बीते शुक्रवार को उन्होंने प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से बेअदबी के मामलों को लेकर सवाल उठाए थे कि अब तक उनकी सरकार ने इस दिशा में क्या कदम उठाए हैं. इसके बाद वह अपने समर्थकों के साथ सुबह ही बुर्ज जवाहर सिंह वाला गुरुद्वारा पहुंच गए. जहां से बेअदबी के मामलों ने तूल पकड़ा था और पंजाब में न्याय के लिए आंदोलन शुरू हुआ था. इस दौरान 2015 में 14 अक्टूबर को बेअदबी के मामलों को लेकर प्रदर्शनकारियों पर कोटकपूरा और बहिबल कलां में पुलिस ने फायरिंग कर दी थी जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी.

    बताते हैं कि सिद्धू पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनने से पहले भी उक्त गुरुद्वारा में पहुंचे थे और माथा टेक कर बेअदबी के दोषियों को सजा दिलाने का संकल्प लिया था. यह उल्लेखनीय यह है कि 2015 में अकाली भाजपा सरकार थी और और उच्चस्तरीय जांच के लिए 16 अक्टूबर 2015 को रिटायर्ड जज जस्टिस जोरा सिंह के नेतृत्व में आयोग का गठन किया था. इस आयोग पर जब सिख संगठनों ने सवाल उठाए तो 27 दिसंबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस मार्कंडेय काटजू के नेतृत्व में एक अन्य जांच आयोग का गठन किया गया.

    एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस काटजू की रिपोर्ट को फरवरी 2016 में अकाली-भाजपा सरकार ने मानने से इनकार दिया. यही नहीं जस्टिस जोरा सिंह की रिपोर्ट को भी 30 जून 2016 में सरकार ने नकार दिया. कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद 2017 को जस्टिस रणजीत सिंह के नेतृत्व में एक जांच आयोग का गठन कर जांच शुरू की थी. इसके बाद बनी एसआईटी को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है और मामले में हाईकोर्ट के आदेशों पर बनी ही एसआईटी दोबारा जांच कर रही है.

    Tags: Charanjit Singh Channi, Navjot singh sidhu, Punjab

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