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'पसंद और अभिव्यक्ति की आजादी के बिना लोकतंत्र भी नहीं'...विश्वास और बग्गा को HC से क्लीन चिट

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पुजाब पुलिस की ओर से कुमार विश्वास और तजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पुजाब पुलिस की ओर से कुमार विश्वास और तजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कुमार विश्वास और तजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ पंजाब पुलिस की ओर से दर्ज FIRs को खा ...अधिक पढ़ें

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने बुधवार को भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा और हिंदी कवि कुमार विश्वास के खिलाफ पंजाब पुलिस की ओर से आम आमदी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ उनके बयानों को लेकर दर्ज की गई 2 अलग-अलग प्राथमिकियों को खारिज कर दिया. न्यायमूर्ति अनूप चितकारा की पीठ ने याचिकाओं पर अलग से सुनवाई की और दो अलग-अलग आदेश पारित किए. फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर टिप्पणी के लिए AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल के दिल्ली आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ था. इस मामले में तजिंदर पाल सिंह बग्गा पर भड़काऊ बयान देने, दुश्मनी को बढ़ावा देने और आपराधिक धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था. बग्गा ने 6 अप्रैल, 2022 को AAP पंजाब के प्रवक्ता और लोकसभा प्रभारी सनी सिंह अहलूवालिया की शिकायत पर उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था.

पंजाब पुलिस ने बग्गा के खिलाफ धर्म, नस्ल, जन्म स्थान आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कार्य करने और दुश्मनी, घृणा या दुर्भावना पैदा करने या बढ़ावा देने वाले बयान देने सहित कई आरोपों के तहत भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया था. एफआईआर को रद्द करने की मांग करते हुए, बग्गा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस राय और चेतन मित्तल, अधिवक्ता अनिल मेहता और गौतम दत्त ने तर्क दिया कि एफआईआर पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण था. उन्होंने कहा कि सनी सिंह अहलूवालिया ने जानबूझकर वास्तविक बयान छिपाया और प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए इसके कुछ हिस्सों का हवाला दिया. पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पुनीत बाली ने तजिंदर बग्गा के विभिन्न ट्वीट्स का हवाला देते हुए उनकी याचिका का विरोध करते किया और दलील दी कि आरोपी का इरादा गलत सूचना देना, सांप्रदायिक विद्वेष फैलाना और उनके माध्यम से शत्रुतापूर्ण और शातिर माहौल बनाना था.

कुमार विश्वास पर पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले एक साक्षात्कार में कुछ नापाक और असामाजिक तत्वों के साथ अरविंद केजरीवाल की संलिप्तता का आरोप लगाने के मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी. एक अलग याचिका में, विश्वास ने 26 अप्रैल, 2022 को उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसमें उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कथित रूप से भड़काऊ बयान देने के लिए पंजाब पुलिस द्वारा अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की थी. नरिंदर सिंह की शिकायत पर 12 अप्रैल, 2022 को रूपनगर पुलिस ने कुमार विश्वास के खिलाफ समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, आपराधिक साजिश, धर्म या नस्ल के आधार पर दुश्मनी पैदा करने के इरादे से समाचार प्रकाशित करने या प्रसारित करने जैसे आरोपों में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था. प्राथमिकी को रद्द करने की मांग करते हुए, विश्वास के वकीलों- वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन मित्तल और आरएस राय के साथ-साथ अधिवक्ता मयंक अग्रवाल और रुबीना विरमानी- ने कहा कि वह एक हिंदी कवि हैं, और आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य और इसकी राष्ट्रीय कार्यकारी निकाय के पूर्व सदस्य रह चुके हैं. प्राथमिकी में उनका नाम गलत तरीके से शामिल किया गया था. यह कानून की प्रक्रिया का सरासर दुरुपयोग और राजनीति से प्रेरित कदम था.

पंजाब सरकार के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता बाली ने विश्वास के मामले में तर्क दिया कि जांच प्रारंभिक चरण में थी जब इस अदालत ने मामले में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी. मामले के महत्वपूर्ण पहलुओं पर जांच की जानी बाकी है, और इसलिए, यदि यह अदालत प्राथमिकी को रद्द करने के लिए आगे बढ़ती है, तो यह पुलिस को गंभीर प्रभाव वाले अपराध की जांच करने के लिए अपने वैधानिक दायित्व को पूरा नहीं करने देना होगा. तजिंदर पाल सिंह बग्गा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति चितकारा ने कहा, ‘याचिकाकर्ता का कथित बयान दिल्ली और पंजाब में सत्तासीन आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा दिए गए बयान का विरोध है, जहां भाजपा विपक्ष में है. एक राजनीतिक कार्यकर्ता और एक राजनीतिक दल के आधिकारिक प्रवक्ता होने के नाते, लोगों को एक विपरीत राजनीतिक नेता की प्रतिक्रिया से अवगत कराना उनके अधिकारों के भीतर था…याचिकाकर्ता के अनुसार, फिल्म, ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने कश्मीर में अल्पसंख्यक यानी हिंदुओं के नरसंहार का पर्दाफाश किया था. याचिकाकर्ता ने अपनी नाराजगी इसलिए जाहिर की क्योंकि सत्ताधारी पार्टी ने फिल्म को कर मुक्त करने की उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया. इस तरह का विरोध प्रदर्शन करना उनके अधिकार में था.’

कुमार विश्वास के मामले में न्यायमूर्ति चितकारा ने कहा, ’12 अप्रैल, 2022 की घटना को याचिकाकर्ता के साक्षात्कार से जोड़ने वाली कोई प्रथम दृष्टया सामग्री नहीं है, और दोनों घटनाओं में संबंध भी स्थापित नहीं होता. इस प्रकार, शिकायत के दायरे का विस्तार करने के लिए सबूतों को तोड़ने-मरोड़ने, शिकायतकर्ता की धारणाओं और संदेहों पर बाद की किसी घटना से इसे जोड़ने की अनुमति नहीं होगी.’ पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने दोनों नेताओं को क्लीन चिट देते हुए कहा कि पसंद की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बिना कोई लोकतंत्र नहीं हो सकता. न्यायाधीश ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 को लागू किया, जो किसी भी अदालती प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने या न्याय सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों को संरक्षित करता है, और बग्गा व विश्वास के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों और बाद की सभी कार्रवाई को रद्द करने के लिए दो अलग-अलग आदेश जारी किए.

Tags: AAP, Kumar vishwas, Punjab and Haryana High Court

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