सांसदों के साथ बैठक के बाद बोले बाजवा- आलाकमान के फैसले का करेंगे पालन

प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि पार्टी आलाकमान के फैसले का हम पालन करेंगे (Photo-ANI)

Punjab Congress Crisis: यह अनुमान लगाया जा रहा था कि बाजवा के घर बुलाई गई बैठक में पंजाब में पार्टी के बीच चल रही गुटबाजी पर कोई अहम फैसला लिया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

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    चंडीगढ़. कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य और पंजाब के पूर्व पार्टी अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा के घर रविवार को पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई गई. बैठक के बाद बाजवा ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर पार्टी आलाकमान के फैसला माना जाएगा, साथ ही उन्होंने बताया कि इस बैठक में कृषि से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा की गई. इस बैठक के बाद बाजवा ने कहा कि "पार्टी हाईकमान जो भी फैसला करेगा हम उसका पालन करेंगे. कोई चुनौती नहीं है. नवजोत सिंह सिद्धू सोनिया गांधी से मिलने के बाद शिष्टाचार मुलाकात के लिए आए थे, मैंने उन्हें कोई निर्देश नहीं दिया. सांसदों की बैठक में, हमने कृषि मुद्दों और मूल्य वृद्धि पर चर्चा की."


    नवजोत सिंह सिद्धू को "पीसीसी अध्यक्ष के रूप में स्वीकार करने पर कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि हमने किसी भी जाति या धर्म के लोगों को स्वीकार किया है, चाहे वह जवान हो या बूढ़ा, लंबा या छोटा. हमने इसे पहले भी स्वीकार किया था, अब भी करेंगे." बाजवा ने कहा कि "कैप्टन के साथ मेरे मतभेद व्यक्तिगत नहीं हैं, बल्कि नीतियों पर, राज्य सरकार द्वारा पूरे नहीं किए गए वादों पर हैं. हमने उन पर विस्तृत चर्चा की. उन्होंने उन्हें पूरा करने के लिए लगभग 12-14 सप्ताह का समय मांगा है क्योंकि चुनाव में 7 महीने हैं."

    वहीं कांग्रेस सांसद जसबीर गिल ने बैठक खत्म होने के बाद कहा, 'नवजोत सिंह सिद्धू की कोई बात नहीं हुई. हमने इस बारे में चर्चा की कि संसद में किसानों के मुद्दे को कैसे उठाया जा सकता है. हमने उच्च मुद्रास्फीति और पंजाब के करों के बारे में भी बात की जो केंद्र द्वारा जारी नहीं किए गए हैं.'


    कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी कहा कि बैठक में किसानों के विरोध को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. उन्होंने कहा, 'हमने पंजाब में चल रहे किसानों के विरोध और टीकों के आवंटन पर विस्तृत चर्चा की. हम सदन में 'काम रोको प्रस्ताव' पेश करेंगे. हमने पंजाब के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए आगामी संसद सत्र की रणनीति पर भी चर्चा की है.' दरअसल यह अनुमान लगाया जा रहा था कि बाजवा के घर बुलाई गई बैठक में पंजाब में पार्टी के बीच चल रही गुटबाजी पर कोई अहम फैसला लिया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.


    पंजाब के नेताओं को साधने में जुटे सिद्धू, रावत से मिलकर बोले कैप्टन- आलाकमान का हर फैसला मंजूर


    उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ महीनों से पंजाब कांग्रेस में खुलकर कलह देखने को मिल रही है. पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और कुछ अन्य नेताओं ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. पंजाब में 2015 में धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी और उसके बाद हुई पुलिस फायरिंग के मामले में सिद्धू सरेआम मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के खिलाफ हमला कर मामले की जांच में देरी करने का आरोप लगाते रहे हैं. पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2015 की पुलिस गोलीबारी के मामले में एक जांच को रद्द कर दिया था, इसके बाद से सिद्धू, कैप्टन के खिलाफ लगातार हमलावर रहे हैं.




    पार्टी में कलह को दूर करने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था. इस समिति ने मुख्यमंत्री समेत पंजाब कांग्रेस के 100 से अधिक नेताओं की राय ली और फिर अपनी रिपोर्ट आलाकमान को सौंपी. पिछले दिनों अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी. सिद्धू भी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मिले थे.

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