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पंजाब संकट पर पीके के साथ राहुल और प्रियंका का मंथन, कांग्रेस सूत्रों का दावा- अगले 3-4 दिन में सिद्धू पर फैसला!

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ नवजोज सिंह सिद्धू. (पीटीआई फाइल फोटो)

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ नवजोज सिंह सिद्धू. (पीटीआई फाइल फोटो)

Punjab Congress Crisis: पंजाब में 2015 में धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी और उसके बाद हुई पुलिस फायरिंग के मामले में सिद्धू सरेआम मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के खिलाफ हमला कर मामले की जांच में देरी करने का आरोप लगाते रहे हैं.

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नई दिल्ली. पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आंतरिक गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस जल्द ही अपनी पार्टी की परेशानियों को सुलझाने में लगी है. इसी के मद्देनजर मंगलवार को दिल्ली में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी से मुलाकात की. समझा जाता है कि पंजाब विवाद सुलझाने और नवजोत सिंह सिद्धू की भूमिका को लेकर इस बैठक में चर्चा हुई है. बताया जा रहा है कि सिद्धू की भूमिका को लेकर अगले दो दिन में फैसला होने की उम्मीद है. प्रशांत किशोर, अमरिंदर सिंह के सलाहकार हैं. इस बैठक में प्रशांत के साथ प्रियंका गांधी, हरीश रावत और पार्टी के संगठन महासचिव वेणुगोपाल भी मौजूद थे.


पंजाब का संकट सुलझाने और सिद्धू की भूमिका तय करने के लिए कांग्रेस में आख़िरी दौर की बात चल रही है और कांग्रेस का दावा है कि अगले 4 दिन में सिद्धू की भूमिका तय हो जाएगी. पंजाब फॉर्मूला तय करने के लिए प्रशांत किशोर की उपस्थिति में राहुल और प्रियंका दोनों ने चर्चा की. सूत्रों के मुताबिक अमरिंदर सिंह की सिद्धू को अध्यक्ष न बनाए जाने की मंशा को प्रशांत किशोर ने आलाकमान को बता दिया है. सिद्धू को उप-मुख्यमंत्री और कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाए जाने पर अमरिंदर सिंह को कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन उनके साथ 2 और उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की बात है जिसमें से एक दलित होगा.


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प्रशांत किशोर ने कैप्टन खेमे के किसी हिंदू को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की मांग के फायदे भी कांग्रेस नेतृत्व को समझाए. सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना राहुल गांधी और प्रियंका तलाश रहे थे और ये विकल्प अब भी मौजूद है, बस अमरिंदर सिंह का इस पर राजी होना बाकी है. यही वजह है कि दर्जनों बैठकों के बाद भी अब तक सिद्धू की भूमिका का फैसला नही हो सका है. कैप्टन खेमे से विजय इंदर सिंगला और मनीष तिवारी का नाम प्रदेश अध्यक्ष के रूप में आगे बढ़ाया गया है. हालांकि इन विकल्पों पर अब भी फैसला होना बाकी है. यही वजह है कि हर वक़्त मीडिया से बात करने वाले पंजाब प्रभारी हरीश रावत बैठक खत्म होने के बाद मीडिया से बिना बोले ही निकल गए.


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उधर कोई भी फैसले से पहले कांग्रेस आलाकमान पर खुद को बड़ी भूमिका देने का दबाव बनाते हुए सिद्धू ने आम आदमी पार्टी की तारीफ कर दी. ट्वीट के ज़रिए सिद्धू ने आप से सहानुभूति दिखाई जिसके बाद इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि सिद्धू आप में जाने के विकल्प का संकेत देकर कांग्रेस में अध्यक्ष जैसे बड़े पद को पाना चाहते हैं. हालांकि उनके आप की तारीफ को पार्टी ज़्यादा तवज्जो नहीं दे रही और कह रही है कि अभी कुछ दिन पहले ही सिद्धू ने केजरीवाल के पंजाब को दिल्ली मॉडल देने की बात का ट्वीट कर विरोध किया था और कहा था कि पंजाब को पंजाब मॉडल चाहिए न कि दिल्ली मॉडल. पार्टी इस मुद्दे पर कुछ भी खुलकर नहीं बोल रही है.




सिद्धू का सवाल कांग्रेस नेतृत्व के लिए सियासी बवाल बन गया है और पार्टी लगातार मंथन करने रही है एवं प्रशांत किशोर के साथ आखिरी दौर की बैठक भी हो गई है, लेकिन सवाल ये है कि इस मंथन से सिद्धू के लिए अमृत निकलेगा या विष? दरअसल, पंजाब में 2015 में धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी और उसके बाद हुई पुलिस फायरिंग के मामले में सिद्धू सरेआम मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के खिलाफ हमला कर मामले की जांच में देरी करने का आरोप लगाते रहे हैं. पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2015 की पुलिस गोलीबारी के मामले में एक जांच को रद्द कर दिया था, इसके बाद से सिद्धू, कैप्टन के खिलाफ लगातार हमलावर रहे हैं.

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