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पंजाब के सरकारी अस्पतालों में बनेगी प्राइवेट लैब, गरीबों की जेब पर पड़ेगा डाका

पंजाब के सरकारी अस्पतालों में बनेगी प्राइवेट लैब.(File Photo)

प्रदेश स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के प्रमुख सचिव हुसैन लाल ने कहा कि सरकारी प्रयोगशालाएं (Government Lab) दोपहर में बंद रहती हैं, जबकि निजी प्रयोगशालाएं (Private laboratories) चौबीसों घंटे काम करती हैं. निजी लैब्स ने टेस्ट की कीमतों में छूट देने का हवाला दिया है.

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    चंडीगढ़. पंजाब सरकार (Punjab Govt) ने सरकारी जिला अस्पतालों (Government district hospitals) के परिसरों में निजी लैब (Private laboratories) की एक चेन को संचालित करने की अनुमति दी है. इन लैब को इन अस्पतालों में सरकारी लैब से ज्यादा चार्ज करने की इजाजत होगी. मुंबई स्थित प्रयोगशालाओं की एक श्रृंखला ने रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, नर्स, लैब तकनीशियन और मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव की भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं.

    सूत्रों ने दावा किया कि सरकार जिला अस्पतालों में डायग्नोस्टिक हब बनाने वाली थी, लेकिन उसने निजी क्षेत्र के लोगों को लाभ पहुंचाने की अपनी योजना को टाल दिया है. पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. गगनदीप शेरगिल ने कहा है कि यह स्वास्थ्य सेवाओं से गरीबों को वंचित करने की एक भयावह योजना है. सरकार अंततः सभी सरकारी प्रयोगशालाओं को बंद कर देगी.

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    मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के प्रमुख सचिव हुसैन लाल ने कहा कि सरकारी प्रयोगशालाएं दोपहर में बंद रहती हैं, जबकि निजी प्रयोगशालाएं चौबीसों घंटे काम करती हैं. निजी लैब्स ने टेस्ट की कीमतों में छूट देने का हवाला दिया है. अंग्रेजी अखबार "द ट्रिब्यून" के मुताबिक जिस कंपनी को अनुबंध दिया गया है, वह सीजीएचएस के तहत आने वालों को 48% की छूट देगी. सरकारी डॉक्टर इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को खत्म करने के एक और कदम के रूप में देख रहे हैं.

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    गौरतलब है कि कैप्टन सरकार कोरोनाकाल के दौरान निजी स्वास्थ्य सेवाओं को ज्यादा तरजीह देने को लेकर विवादों में रही है. पहले सरकार ने केंद्र से आ रही वैक्सीन को निजी अस्पतालों को महंगे दामों पर बेच दिया था. विपक्ष के विरोध के बाद सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा था. इसके बाद कोरोना की फतेह किट को लेकर बवाल मचा था. विपक्ष का आरोप था कि इस किट की कीमत 837 तय की गई थी, लेकिन दूसरे टेंडर में इसकी कीमत बढ़कर 1,226 रुपये कर दी गई और फिर तीसरे टेंडर में किट की कीमत 1,338 रुपये हो गई. इसे लेकर अकाली, भाजपा और आम आदमी पार्टी ने विरोध प्रदर्शन भी किया था. अब देखना यह है कि सरकार के निजी लैब्स को ठेका देने पर विपक्ष की भूमिका क्या रहती है.

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