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पंजाब चुनाव: 93 सीटों पर गेमचेंजर साबित होंगे डेरे! आंकड़ों में समझें किसका कितना है सियासी प्रभाव

पंजाब चुनाव: 93 सीटों पर गेमचेंजर साबित होंगे डेरे! आंकड़ों में समझें किसका कितना है सियासी प्रभाव

पंजाब में बठिंडा को डेरा सच्चा सौदा का गढ़ माना जाता है.

पंजाब में बठिंडा को डेरा सच्चा सौदा का गढ़ माना जाता है.

Punjab Assembly Elections: सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदे के पंजाब में डेरों की संख्या करीब 10 हजार है. पूरे भारत 6 करोड़ अनुयायियों वाले इस डेरा का प्रभाव राज्य के मालवा क्षेत्र में 35-40 सीटों पर है. इसके बाद 1891 में शुरू हुए डेरा राधा स्वामी की का प्रभाव 10-12 सीटों पर है. नामधारी समुदाय का प्रभाव माझा की 2-3 और मालवा की 7-8 सीटों पर है. माझा की 4-5 और दोआबा की 3-4 सीटों पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की काफी मजबूत पकड़ मानी जाती है. इसके अलावा 27 देशों में फैले निरंकारी समुदाय का असर मालवा की 3-4 और माझा की 2-3 सीटों पर है.

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चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Elections) में एक महीनों का ही वक्त बाकी है. ऐसे में राज्य की सियासी हलचल के बीच डेरों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. पंजाब चुनाव में डेरे किस हद तक प्रभावी हो सकती हैं, इस बात का अंदाजा इनकी संख्या से ही लगाया जा सकता है. आंकड़े बताते हैं कि राज्य में 10 हजार से ज्यादा डेरे हैं. साथ ही इनसे जुड़े लोगों की संख्या लाखों में है. पूर्व में हुए चुनाव में भी कई बड़े राजनेताओं को डेरे के द्वार पर देखा गया है.

खबर है कि राज्य में 300 बड़े डेरे ऐसे भी हैं, जो चुनाव पर सीधा असर डालते हैं. कुल 117 सीटों वाली पंजाब विधानसभा में 93 सीटों पर डेरों का प्रभाव बताया जाता है. वहीं, 47 सीटें ऐस हैं, जहां डेरो की क्षमता चुनाव के हालात बदल सकती है. साथ ही करीब 46 सीटों पर डेरे वोट के आंकड़ों में बड़ा अंतर तैयार करने की ताकत रखते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव के नजदीक आते ही डेरों के सियासी मोर्चे एक्टिव हो जाते हैं. हालांकि इन डेरों के प्रमुख सीधे तौर पर अपने अनुयायियों को किसी राजनीतिक दल को समर्थन देने के लिए नहीं कहते हैं, लेकिन मतदान से एक दिन पहले किया गया इशारा सियासी फेरबदल में अपनी भूमिका निभा जाता है.

मतदाताओं और डेरा प्रेमियों का गणित
पंजाब में वोटरों की संख्या 2.12 करोड़ हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अनुमान लगाया गया है कि 53 लाख लोग यानि लगभग 25 प्रतिशत डेरों से जुड़े हुए हैं. राज्य में डेरों की 1.13 लाख शाखाएं 12 हजार 581 गांवों में हैं. दरअसल, लोगों के डेरों में शामिल होने के कई बड़े कारण हैं. इनमें जाति-धर्म, नशा औऱ गरीबी को बड़ी वजह माना जाता है.

यह भी पढ़ें: Punjab Assembly Election 2022: चुनाव में डेरा सच्चा सौदा की एंट्री! क्या बदल जाएगी राज्य की सियासत?

सबसे प्रभावी है डेरा सच्चा सौदा!
सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदे के पंजाब में डेरों की संख्या करीब 10 हजार है. पूरे भारत 6 करोड़ अनुयायियों वाले इस डेरा का प्रभाव राज्य के मालवा क्षेत्र में 35-40 सीटों पर है. इसके बाद 1891 में शुरू हुए डेरा राधा स्वामी की का प्रभाव 10-12 सीटों पर है. नामधारी समुदाय का प्रभाव माझा की 2-3 और मालवा की 7-8 सीटों पर है. माझा की 4-5 और दोआबा की 3-4 सीटों पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की काफी मजबूत पकड़ मानी जाती है. इसके अलावा 27 देशों में फैले निरंकारी समुदाय का असर मालवा की 3-4 और माझा की 2-3 सीटों पर है.

डेरों का जिलों में कितना प्रभाव
पटियाला – राधा स्वामी सत्संग ब्यास और निरंकारी समुदाय
मुक्तसर – दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, डेरा सच्चा सौदा राधा स्वामी सत्संग ब्यास
नवांशहर – दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, गरीब दासी संप्रदाय से संबंधित डेरे
कपूरथला – दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, राधा स्वामी सत्संग ब्यास और निरंकारी समुदाय
अमृतसर – राधा स्वामी सत्संग ब्यास और निरंकारी समुदाय
जालंधर – दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, डेरा सचखंड रायपुर बल्लां और निरंकारी समुदाय
पठानकोट – डेरा जगत गिरी आश्रम
रोपड़ – बाबा हरनाम सिंह खालसा (धुम्मा) का डेरा, बाबा प्यारा सिंह भनियारां वाले के डेरों का प्रभाव
तरनतारन – दिव्य ज्योति जागृति संस्थान

2017 विधानसभा चुनाव के दौरान शायद ही कोई नेता हो जो अपनी पार्टी के लिए समर्थन जुटाने के लिए इन डेरों में न पहुंचा हो. 2016 में राहुल गांधी डेरा ब्यास पहुंचे थे और उन्होंने वहां करीब 19 घंटे बिताए थे. 2016 में ही पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने डेरा ब्यास में सोलर प्लांट का उद्घाटन किया था. मई 2016 में ही पंजाब के डिप्टी सीएम सुखबीर बादल, पंजाब कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल संत ढढरियांवाले पर हुए अटैक के बाद उनसे मिलने के लिए पटियाला में उनके डेरे पर पहुंच गए थे क्योंकि 2017 में विधानसभा चुनाव थे.

Tags: Assembly elections, Punjab Assembly Election 2022

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