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पंजाबः रेप केस में भगोड़ा घोषित पूर्व विधायक की हाईकोर्ट में जमानत याचिका रद्द

पंजाब के पूर्व विधायक की जमानत याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पंजाब के पूर्व विधायक की जमानत याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पंजाब के पूर्व विधायक और लोक इंसाफ पार्टी के प्रमुख सिमरजीत सिंह बैंस की ...अधिक पढ़ें

(एस.सिंह)

चंडीगढ़. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पंजाब के पूर्व विधायक और लोक इंसाफ पार्टी के प्रमुख सिमरजीत सिंह बैंस की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कथित बलात्कार के एक मामले में उन्हें भगोड़ा घोषित करने के आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी. इसके साथ ही जस्टिस लिसा गिल की बेंच ने बैंस की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी है.मामले में पूर्व विधायक और अन्य याचिकाकर्ताओं ने वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद घई, कनिका आहूजा और सुनीत पाल सिंह औलख के माध्यम से लुधियाना के एक इल्लाका मजिस्ट्रेट के 12 अप्रैल के आदेश को रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें उन्हें जुलाई 2021 में लुधियाना में दर्ज मामले में एक भगोड़ा घोषित किया गया था.

उच्च न्यायालय ने सह-आरोपी परमजीत सिंह बैंस और करमजीत सिंह की याचिकाओं को भी खारिज कर दिया, जिसमें लुधियाना के मजिस्ट्रेट के भगोड़ा घाषित करने के आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी. एक रिपोर्ट के मुताबिक बैंस के वकील ने तर्क दिया था कि उन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के इशारे पर प्राथमिकी में झूठा फंसाया जा रहा है, उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए उनके विरोधी बहुत नीचे गिर गए और याचिकाकर्ता के खिलाफ झूठे मुकदमे की शुरुआत की. याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया था कि जांच के दौरान उसे कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और उसने पूरा सहयोग किया. वह भी कानून की प्रक्रिया से कभी नहीं भागा और अन्य कानूनी उपायों की तलाश कर रहा था.

30 दिनों के भीतर अदालत में होना था पेश
पंजाब पुलिस ने हालांकि उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत अपने जवाब में कहा कि सिमरजीत बैंस पिछले साल लुधियाना में उसके खिलाफ दर्ज बलात्कार के मामले में जांच में शामिल नहीं हुए. इससे पहले 24 फरवरी को अदालत ने लुधियाना के डिवीजन नंबर 5 पुलिस स्टेशन एसएचओ को आईपीसी की धारा 229-ए  के तहत बैंस को गिरफ्तार करने के लिए लिखा था. अदालत ने बैंस के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 82 के तहत 7 अप्रैल के लिए उद्घोषणा नोटिस जारी करने का भी आदेश दिया था और उन्हें 30 दिनों के भीतर अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था.

Tags: Punjab, Punjab and Haryana High Court

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