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पंजाब: राज्यपाल ने मांगा था विधानसभा सत्र का हिसाब, भगवंत मान सरकार ने दिया ये जवाब

मुख्यमंत्री भगवंत मान राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित (दाएं) की चिट्ठी पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि यह हद पार करने जैसा है. (फाइल-news18)

मुख्यमंत्री भगवंत मान राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित (दाएं) की चिट्ठी पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि यह हद पार करने जैसा है. (फाइल-news18)

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजभवन से आई चिट्ठी पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि यह हद पार करने जैसा है. ...अधिक पढ़ें

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चंडीगढ़. पंजाब में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री भवगंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार और राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के बीच का ताज़ा विवाद इन दिनों सुर्खियों में है. राज्यपाल कार्यालय ने 27 सितंबर के विधानसभा सत्र में होने वाले विधायी कार्य का ब्योरा मांगा था, जिस पर राज्य सरकार ने अपना जवाब भेज दिया है.

पंजाब सरकार की ओर से भेजे गए गवर्नर की चिट्ठी के जवाब में 27 सितंबर को होने वाले विधानसभा सत्र की मंजूरी मांगते हुए बताया गया कि इस सत्र में जीएसटी, पराली और बिजली जैसे कई मुद्दों पर चर्चा होगी.

भगवंत मान ने दी थी तीखी प्रतिक्रिया
इससे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजभवन से आई चिट्ठी पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि यह हद पार करने जैसा है. उन्होंने कहा कि ‘विधायिका के किसी भी सत्र से पहले राज्यपाल या राष्ट्रपति की सहमति एक ‘औपचारिकता’ है. 75 वर्षों में, किसी भी राष्ट्रपति या राज्यपाल ने सत्र बुलाने से पहले विधायी कार्यों की सूची नहीं मांगी.’

राज्यपाल ने सीएम को याद दिलाई जिम्मेदारी
इसके बाद राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने शनिवार को मुख्यमंत्री को उनके दायित्वों की ‘याद’ दिलाने की कोशिश करते हुए कहा था कि उनके कानूनी सलाहकार इस विषय पर उन्हें समुचित ढंग से सही जानकारी नहीं दे रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा, ‘आज के अखबारों में आपका बयान पढ़कर मुझे ऐसा लगा कि शायद आप मुझसे काफी हद तक नाराज हैं. मुझे लगता है कि आपके कानूनी सलाहकर आपको समुचित ढंग से जानकारी नहीं दे रहे हैं. शायद मेरे बारे में आपकी राय संविधान के अनुच्छेदों 167 और 168 के प्रावधानों को पढ़ने के बाद बदल जाएगी, जिन्हें मैं आपके संदर्भ के लिए उद्धृत कर रहा हूं.’

बता दें कि अनुच्छेद 167, राज्यपाल के प्रति मुख्यमंत्री के दायित्वों को परिभाषित करता है जबकि अनुच्छेद 168 में राज्य विधानमंडल की संरचना का विवरण है.

इससे पहले पंजाब सरकार ने विश्वास मत साबित करने के लिए 22 सितंबर को विधानसभा की विशेष बैठक बुलाई थी, लेकिन राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने इसकी अनुमति नहीं दी थी. आप सरकार ने राज्यपाल के इस कदम पर सख्त आपत्ति जताई थी और कहा था कि वह राजभवन के कदम को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी. (भाषा इनपुट के साथ)

Tags: AAP Government, Bhagwant Mann, Punjab news

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