पंजाब : 'साझा दुश्मन' के खिलाफ एकजुट हुए कैप्टन अमरिंदर और बाजवा, सिद्धू की राह कर सकते हैं मुश्किल

बाजवा और अमरिंदर सिंह के बीच हुई मुलाकात. (Pic Twitter)

Punjab Congress: कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रताप सिंह बाजवा का यह साथ नवजोत सिंह सिद्धू के लिए अच्छा नहीं माना जा सकता है. सिद्धू जहां खुलेतौर पर सीएम अमरिंदर से अदावत दिखा रहे हैं. वहीं बाजवा ने पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर सिद्धू की नियुक्ति के विचार का विरोध किया है.

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    चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस (Punjab Congress) में अंतर्कलह अब भी थमता नहीं दिख रहा. अगले साल राज्‍य में चुनाव होने हैं. ऐसे में यह पार्टी के लिए हानिकारक भी साबित हो सकती है. उधर, मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) के पूर्व प्रमुख प्रताप सिंह बाजवा (Pratap Singh Bajwa) से मुलाकात की. दोनों की मुलाकात का कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सराहा है. बाजवा अमरिंदर सिंह सरकार के आलोचक रहे हैं. उनकी जगह सुनील जाखड़ को पीपीसीसी का प्रमुख नियुक्‍त किया गया था. शनिवार को दोनों ने एक ही रंग की पगड़ी पहनकर चेहरों पर मुस्‍कान के साथ फोटो भी खिंचवाई हैं.

    हालांकि, अमरिंदर सिंह और बाजवा का यह साथ नवजोत सिंह सिद्धू के लिए अच्छा नहीं माना जा सकता है. दरअसल सिद्धू पंजाब कांग्रेस के प्रमुख के रूप में नियुक्त किए जाने के प्रयास में जुटे हैं. सिद्धू खुलेतौर पर सीएम अमरिंदर से दुश्‍मनी चला रहे हैं. उन्‍होंने दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात भी की है. वहीं बाजवा ने पीपीसीसी के अध्यक्ष के रूप में सिद्धू की नियुक्ति के विचार का विरोध किया है.

    बाजवा लंबे समय से राज्य के अन्य असंतुष्ट नेताओं के साथ मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को हटाने की मांग कर रहे हैं. उनके बारे में यह भी जानकारी सामने आई है कि उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के साथ राजनीतिक समझौता किया है. बाजवा ने सुखजिंदर रंधावा के साथ अपने मतभेद भी सुधार लिए थे और सिद्धू से हाथ भी मिला लिया था.

    सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने सोनिया गांधी को सिद्धू के प्रमोशन को लेकर पार्टी के कुछ सदस्यों के विरोध की जानकारी दी है. कथित तौर पर यह कहा गया है कि सिद्धू को चंडीगढ़ में पीपीसीसी ऑफिस का रास्ता भी नहीं पता है.

    मनीष तिवारी राज्‍य में किसी हिंदू चेहरे को पीपीसीसी का प्रमुख बनाए जाने के पक्ष में हैं. उन्‍होंने अमरिंदर सिंह और बाजवा के बीच करीबी को सराहा है. शनिवार को पंजाब के विधानसभा के स्‍पीकर राणा केपी सिंह, राज्‍यसभा सांसद व पूर्वी पीपीसीसी प्रमुख प्रताप सिंह बाजवा और कैबिनेट मंत्री राणा गुरमीत सोढ़ी ने मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की.

    इससे पहले नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस के प्रमुख सुनील जाखड़ से मुलाकात की. दिल्ली के बाद चंडीगढ़ में मुलाकातों का यह सिलसिला उस वक्त शुरू हुआ जब शुक्रवार को अमरिंदर सिंह ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया कि सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने से अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की संभावनाओं को झटका लग सकता है. सूत्रों का कहना है कि पूर्व क्रिकेटर सिद्धू को पंजाब कांग्रेस की इकाई का प्रमुख बनाया जा सकता है और उनके साथ दो या चार नेताओं को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है.

    सिद्धू और जाखड़ के बीच मुलाकात आधे घंटे से ज्यादा समय तक चली और इसके बाद सिद्धू ने जाखड़ को बड़ा भाई और मार्गदर्शक बताया. वहीं, जाखड़ ने सिद्धू को सक्षम व्यक्ति करार दिया.

    हालांकि अमरिंदर सिंह ने शनिवार को यह भी कहा कि कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी का जो भी फैसला होगा, वो उन्‍हें स्‍वीकार होगा. अमरिंदर सिंह का यह बयान तब आया जब कांग्रेस महासचिव और पंजाब के इंचार्ज हरीश रावत ने चंडीगढ़ जाकर उनके मुलाकात की थी. मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि हरीश रावत से मुलाकात के दौरान उन्‍होंने कई मुद्दे उठाए हैं.

    सूत्रों के मुताबिक अमरिंदर सिंह ने हरीश रावत से कहा था कि वह सिद्धू से तब तक नहीं मिलेंगे जब तक कि वह सार्वजनिक रूप से उनके खिलाफ किए गए ट्वीट के लिए माफी नहीं मांगते. सूत्रों ने बताया कि समझा जाता है कि मुख्यमंत्री ने रावत से कहा था कि जिस तरह से इस मुद्दे को संभाला गया वह स्वीकार्य नहीं था और उन्हें अभी भी सिद्धू की नियुक्ति पर आपत्ति है, लेकिन नेतृत्व जो भी निर्णय लेता है, वह उसे स्वीकार करेंगे. (यह खबर अंग्रेजी से अनुवादित है. इसे पूरा पढ़ने के लिए यहां CLICK करें.)

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