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Punjab Election 2022: नवंबर में हो जाएगा फैसला, किसके साथ जाएगा पंजाब!

Punjab Election 2022: नवंबर में हो जाएगा फैसला, किसके साथ जाएगा पंजाब!

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले सभी पार्टियां मतदाताओं को रिझाने में लगी हुई हैं.

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले सभी पार्टियां मतदाताओं को रिझाने में लगी हुई हैं.

Punjab Assembly Election 2022: सबसे ज्यादा अप्रत्याशित चुनाव में इस बार भी भीतरी सियासत से जूझ रही कांग्रेस, उभरता हुआ दल आम आदमी पार्टी, पुराना खिलाड़ी शिरोमणि अकाली दल और लगभग खत्म पर खेल के मैदान में डटी हुई भाजपा आमने सामने हैं.

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चंडीगढ़. पंजाब राज्य का चुनावी (Punjab Election 2022) मैदान, भारत का वो कठिन मैदान है, जहां कोई भी राजनीतिक खिलाड़ी जीत का दावा नहीं पेश कर सकता है. यहां कब हवा का रुख बदल जाए और सीधी सादी गेंद गुगली में बदल जाए नहीं कहा जा सकता है. सबसे ज्यादा अप्रत्याशित चुनाव में इस बार भी भीतरी सियासत से जूझ रही कांग्रेस, उभरता हुआ दल आम आदमी पार्टी, पुराना खिलाड़ी शिरोमणि अकाली दल और लगभग खत्म पर खेल के मैदान में डटी हुई भाजपा आमने सामने हैं. नवंबर में होने वाली तीन घटनाएं या कार्यक्रम या फैसले जो भी कहें पंजाब के भविष्य का फैसला कर सकते हैं.

इन तीन घटनाक्रमों में सबसे ऊपर है, विशेष जांच दल (एसआईटी) की 2015 में फरीदकोट में पवित्रवस्तु के साथ बेअदबी और पुलिस फायरिंग की जांच है, जो नवंबर में पूरी होने जा रही है. इस जांच के लिए उच्च न्यायालय ने जो छह महीने की अवधि तय की थी वो नवबंर में पूरी हो जाएगी. इसी दौरान उच्च न्यायालय दो साल पहले शुरू हुए ड्रग्स जांच पर से भी पर्दा हटा सकता है. इसमें कोई हैरानी नहीं है कि नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में इन दो बातों को शीर्ष पर रखा है.

क्या इसका परिणाम बादल परिवार के खिलाफ जाएगा और वो गिरफ्तार हो जाएंगे ? कांग्रेस परिवार लंबे वक्त से इस बाता का वादा कर रहा है वहीं बादल परिवार इसे राजनीतिक प्रतिशोध का नाम दे रही है.

पंजाब में इस बात को लेकर राजनीतिक राय विभाजित हैं. अगर मुख्यमंत्री के तौर पर अकाली दल का चेहरा बने सुखबीर सिंह बादल के विरोध में मामला जाता है तो उन्हें वोटरों की सहानुभूति मिल सकती है. और उनकी पार्टी लंबे वक्त से ऐसे किसी मौके की तलाश में हैं क्योंकि किसान आंदोलन की वजह से बार बार उनके चुनाव अभियान में अड़ंगा लग रहा है. वहीं कांग्रेस और उसके समर्थकों को लगता है कि इससे देश की सबसे पुराने दल को राज्य में लोगों के बीच खुद को खड़ा करने के लिए संजीवनी मिल जाएगी.

वहीं पवित्र वस्तु के साथ बेअदबी और पुलिस फायरिंग का मामला पंजाब की भावनाओं से जुड़ा हुआ बड़ा मामला है. इसी की वजह से 2017 में प्रकाश सिंह बादल को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. पंजाब में कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि अगर इस मामले में भी बादल के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो निश्चित तौर पर जनता कांग्रेस के साथ खड़ी नज़र आएगी. इसी तरह ड्रग्स वाले मामले में भी कांग्रेस को लाभ मिलेगा.

आप भी है
दूसरा बड़ी बात है, पंजाब चुनाव के लिए अरविंद केजरीवाल राज्य में इसी महीने मुख्यमंत्री के उम्मीदवार की घोषणा करेंगे. उन्होंनें वादा किया है कि उम्मीदवार पंजाब का सिख होगा. वह दीपावली के बाद इसकी घोषणा कर सकते हैं. यह घोषणा आप के पक्ष में भी जा सकती है और चुनावी माहौल को बदल सकती है. इससे पहले भी पार्टी ने किसानों का समर्थन करके पंजाब में अपनी पकड़ को थोड़ा मजबूत किया है. फिलहाल आधा दर्जन से ज्यादा लोगों के नाम को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं. लेकिन अगर किसी किसान नेता को मुख्यमंत्री के तौर पर उतारा जाता है तो ये फैसला आप के पक्ष में वोटरों को जोड़ने में और मदद कर सकता है.

कैप्टन क्या करेंगे
तीसरा बड़ा घटनाक्रम अमरिंदर सिंह का अगला कदम हो सकता है. वो किस करवट बैठने वाले हैं इसका पता भी नवंबर में चल सकता है. इस पुराने राजनीतिक खिलाड़ी और 79 साल के योद्धा ने अपनी कमर कस ली है और इस चुनाव में उनका एकमात्र एजेंडा हो सकता है- कांग्रेस का नुकसान.

खुद के मुख्यमंत्री पद से इस तरह हटाए जाने को लेकर वह बहुत अपमानित महसूस कर रहे हैं, ऐसे में वो अपने कट्टर विरोधी नवजोत सिंह सिद्धू और उनके सिपाहसलारों को जड़ से उखाड़ना चाहते हैं, इसलिए वो भाजपा के मौन समर्थन के साथ अपना क्षेत्रीय दल खड़ा कर सकते हैं. हालांकि भाजपा के मौन समर्थन और बीएसएफ के विस्तारीकरण जैसे मुद्दों के साथ रहने की वजह से किसानों के बीच भी उनकी छवि को धक्का पहुंचा है.

कांग्रेस की चाल बदल सकती है मामला
कांग्रेस को पहले अपने भीतर की मसलों को सुलझाना है, ताकि आगे झगड़े का खतरा नहीं हो. इसका बेहतर तरीका तो यही हो सकता है कि सोनिया गांधी घोषणा कर दें कि चुनाव के दौरान कमान उनके हाथों में होगी. कैप्टन अमरिंदर सिंह के जाने के बाद सोनिया गांधी पंजाब में चुनावी अभियान की बागडोर सीधे अपने हाथों में रख सकती है. वह पंजाब के सबसे बड़े मुद्दे को लेकर भी साफ कर चुकी हैं कि तीन कृषि कानूनों को खत्म कर दिया जाना चाहिए. उधर अप्रत्याशित और मनमौजी बर्ताव वाले नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस के दमदार खिलाड़ी हैं जिसे पार्टी किसी हालत में खो नहीं सकती है.

2017 के चुनाव अभियान के दौरान अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू ऐसे दो चेहरे थे जिनकी बदौलत कांग्रेस सत्ता में आई थी. अमरिंदर के जाने के बाद स्वाभाविक है कि सिद्धू ही चुनावी अभियान का चेहरा होंगे और वो बादल, ड्रग्स और पवित्र वस्तु की बेअदबी के मामले में अपने तेज तर्रार रवैये से भीड़ को आकर्षित करने का माद्दा रखते हैं. लेकिन सिद्धू की डीजीपी और एजी को हटाए जाने की मांग को अभी स्वीकृत होना बाकी है.

इन सब के बीच में, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी शांति से पंजाब में कांग्रेस के एजेंडे पर काम कर रहे हैं. राहुल गांधी ने भी हाल में उनकी तारीफ करते हुए कांग्रेस वर्किंग कमेटी में कहा था कि इस तरह के व्यक्तित्व को आगे लाया जाना चाहिए. चन्नी असली किंग भी साबित हो सकते हैं

Tags: Aam aadmi party, Akali dal, BJP, Congress, Punjab Assembly Election 2022

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