पंजाब: कांग्रेस ही नहीं भाजपा में भी कलह? पूर्व मंत्री जोशी ने खोल रखा है पार्टी के खिलाफ मोर्चा  

पंजाब के बीजेपी नेता अनिल जोशी को कारण बताओ नोटिस मिली थी (फाइल फोटो)

Punjab Election 2022: किसान आंदोलन के बाद BJP पर आए संकट ने नेतृत्व में नेताओं के बीच की दरार को और गहरा कर दिया है. ताजा उदाहरण पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी और मास्टर मोहन लाल का है, जिन्होंने राज्य नेतृत्व के खिलाफ खुलकर बात की है.

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    चंडीगढ़. पंजाब (Punjab) कांग्रेस (Congress) की फूट पर खुश होने वाली भाजपा की राज्य इकाई (BJP) को भी अब यही घुन लग गया है. आगामी विधानसभा चुनाव (Punjab assembly election 2022) में सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा करने वाली भाजपा पंजाब में गुटों में बंट गई है. बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर कम से कम 5 अलग-अलग गुट हैं जो कभी-कभी समान मुद्दों पर विपरीत रुख अपनाते हैं. किसान आंदोलन (Kisan Andolan) के चलते कई नेता तो भाजपा का छोड़ अन्य दलों में शामिल हो चुके हैं. यही नहीं अब  भाजपा के वरिष्ठ नेता एंव पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी (Anil Joshi) और मास्टर मोहन लाल ने प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला है.

    जोशी को पार्टी हाईकमान ने कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. कारण बताओ नोटिस पर अनिल जोशी ने कहा कि उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए आवाज उठाकर कुछ भी गलत नहीं किया है. उन्होंने कहा कि जब कार्यकर्ताओं को पीटा जा रहा था और सड़कों पर अपमानित किया जा रहा था तो उन्होंने केवल 'अनुशासनहीनता' पर सवाल उठाया था. उन्होंने कहा कि उनकी जगह राज्य नेतृत्व को जवाब देना है कि किसानों और छोटे व्यापारियों के समर्थन में आवाज उठाना पार्टी विरोधी गतिविधि कैसे थी?

    'जोशी से कोई जवाब नहीं मिला है'
    उन्होंने कहा कि ना तो कानूनों के खिलाफ बात की और न ही प्रधानमंत्री के खिलाफ. जोशी ने कहा कि मैंने केवल पंजाब भाजपा नेतृत्व से किसानों के साथ खड़े होने और राज्य में लोगों की भावनाओं से केंद्र को अवगत कराने के लिए कहा था कि वे कानून नहीं चाहते हैं. उन्होंने कहा कि कारण बताओ नोटिस पर हस्ताक्षर करने वाले पार्टी के राज्य सचिव सुभाष शर्मा ने कहा कि उन्हें अभी तक जोशी से कोई जवाब नहीं मिला है. पार्टी ने जोशी को अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए नोटिस दिया था.

    उधर पार्टी का नेतृत्व अश्विनी शर्मा कर रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ का भी पार्टी में अपना ही दबदबा है. बताया जाता है कि चुघ के बयान कभी-कभी राज्य इकाई की स्थिति के अनुरूप नहीं होते हैं. हाल के ही दिनों में कई जमीनी और स्थानीय स्तर के नेताओं को पार्टी छोड़ते हुए देखा गया है. गौ सेवा आयोग का भी नेतृत्व करने वाली दलित नेता कीमती भगत पिछले साल शिअद में शामिल हुई थीं. इसी तरह भाजपा महासचिव मलविंदर सिंह कंग जिन्होंने पिछले साल किसानों के आंदोलन के बाद पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल हो गए हैं. इसी तरह बरनाला में कई स्थानीय स्तर के नेता शिअद में शामिल हुए हैं.

    किसान आंदोलन के बाद पार्टी पर आए संकट ने नेतृत्व में नेताओं के बीच की दरार को और गहरा कर दिया है. ताजा उदाहरण पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी और मास्टर मोहन लाल का है, जिन्होंने राज्य नेतृत्व के खिलाफ खुलकर बात की है. इसके अलावा पार्टी के एक बड़े धड़े का नेतृत्व पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना और विजय सांपला कर रहे हैं. उन्हें हरजीत ग्रेवाल का भी समर्थन प्राप्त है. भाजपा के सूत्रों का कहना है कि समूह को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का समर्थन मिल रहा था.

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