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पंजाब में माझा बनेगा किंगमेकर! जानें कांग्रेस ने पंथिक बेल्ट से क्यों बनाए 2 डिप्टी सीएम

मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी के साथ उनके 2 डिप्टी रंधावा और सोनी. (Charanjit Singh Channi  (Photo by NARINDER NANU / AFP)

मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी के साथ उनके 2 डिप्टी रंधावा और सोनी. (Charanjit Singh Channi (Photo by NARINDER NANU / AFP)

Punjab Assembly Election 2022: माझा इलाके के हिंदू वोटर इतने प्रभावी हैं कि पंजाब के अन्य इलाकों में समुदाय का रुझान भी उनके ही नैरेटिव पर तय होता है.

  • News18Hindi
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    चंडीगढ़. कांग्रेस ने पंजाब (Punjab) में चरनजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को मुख्यमंत्री और सुखजिंदर सिंह रंधावा (Sukhjinder Singh Randhawa) के साथ ओमप्रकाश सोनी (Omprakash Soni) को उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया है. क्षेत्रवार देखें तो पार्टी ने माझा क्षेत्र से दो उपमुख्यमंत्री बनाए हैं और इसे समझने के लिए राजनीतिक विश्लेषकों की मदद की जरूरत नहीं है. मुख्यमंत्री चन्नी मालवा क्षेत्र से चमकौर साहिब विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं सोनी और रंधावा माझा क्षेत्र में अमृतसर सेंट्रल और डेरा बाबा नानक विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं.

    कांग्रेस पार्टी का फैसला देखें तो 3 शीर्ष नेताओं में 2 माझा क्षेत्र से हैं. इस इलाके में अमृतसर, गुरदासपुर, पठानकोट और तरनतारन जिले पड़ते हैं. विधानसभा चुनाव 2022 के नजरिए से पार्टी का ये कदम बहुत ही सोचा समझा है, क्योंकि इसी इलाके के ज्यादा नेताओं ने कैप्टन अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) के खिलाफ बगावत की और बाद में उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा. 117 सदस्यों वाली विधानसभा के माझा क्षेत्र में 25 सीटें हैं, दोआब में 23 सीटें और मालवा क्षेत्र में बची 69 सीटें आती हैं.

    सियासत में मालवा प्रभावी, लेकिन…’
    मालवा को पंजाब की राजनीति में प्रभावी माना जाता है, लेकिन माझा का पंथिक बेल्ट राज्य की सियासत में किंगमेकर की भूमिका रखता है. कहा जाता है कि 2007 में अकाली दल की सरकार बनाने में माझा क्षेत्र का बड़ा योगदान रहा. 2007 के चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह को मालवा में काफी पॉपुलैरिटी हासिल थी, और उनके पास डेरा सच्चा सौदा का समर्थन भी था. मालवा में उस समय 65 सीटें थीं और कांग्रेस ने 37 सीटों पर जीत हासिल की.

    हालांकि माझा क्षेत्र में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा और उस समय माझा की 27 सीटों में सिर्फ 3 पर कांग्रेस को जीत मिली. अकाली दल ने 17 पर जीत का पताका फहराया तो बीजेपी को 7 सीटें मिलीं.

    ‘मालवा का कोर वोटर AAP के साथ’
    अकाली दल ने पंथिक बेल्ट के सिख वोटरों का समर्थन हासिल किया तो बीजेपी ने शहरी इलाकों में हिंदू वोटरों का समर्थन हासिल किया. हालांकि 2017 में ये ट्रेंड बदल गया. कांग्रेस ने माझा क्षेत्र में स्वीप किया और 25 में से 22 सीटों पर जीत हासिल की. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सरकार बनाई लेकिन मालवा में आम आदमी पार्टी को जबरदस्त समर्थन मिला. साफ था कि मालवा क्षेत्र का कोर वोटर आम आदमी पार्टी के साथ गया है.

    पंजाब में ‘माझा’ किंगमेकर
    पंथिक बेल्ट में सिख वोटर अक्सर एक पार्टी के पक्ष में वोट करते हैं. ये क्षेत्र हिंदू वोटरों के लिए भी नैरेटिव सेट करता है. दूसरी ओर माझा क्षेत्र में हिंदू और सिख वोटर अपने फायदे के लिए एकमुश्त एक पार्टी या एक गठबंधन के पक्ष में वोट करते हैं. 2017 में अमरिंदर सिंह ने राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर अपना चुनावी अभियान आगे बढ़ाया. ऐसे में हिंदुओं और सिखों ने कांग्रेस को वैसे ही वोट किया, जैसा उन्होंने 2007 के चुनाव में अकाली दल और बीजेपी के लिए किया था.

    सत्ता विरोधी लहर से अकाली को आस
    माझा इलाके के हिंदू वोटर इतने प्रभावी हैं कि पंजाब के अन्य इलाकों में समुदाय का रुझान भी उनके ही नैरेटिव पर तय होता है. पंजाब में विधानसभा चुनाव अब दूर नहीं है, अकाली दल माझा में कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर के सहारे है.

    वहीं ये भी आरोप लगाया जा रहा है कि क्षेत्र की 25 में से 22 सीटें हासिल करने के बाद भी कांग्रेस के विधायक माझा के लिए कुछ खास नहीं कर पाए हैं.

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