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कैप्टन का घट रहा सियासी कद! चन्नी पर कांग्रेस का बड़ा दांव; कुछ ऐसी नजर आ रही पंजाब की चुनावी तस्वीर

पंजाब में 20 फरवरी को होगा एक चरण का मतदान. (फाइल फोटो: AFP)

पंजाब में 20 फरवरी को होगा एक चरण का मतदान. (फाइल फोटो: AFP)

Punjab Election 2022: कांग्रेस के लिए भी 2022 का चुनावी अभियान आसान नहीं रहा है. कई जगहों पर कांग्रेस को पूर्व सीएम के ...अधिक पढ़ें

चंडीगढ़. पंजाब (Punjab) में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान केवल एक ही दिन का वक्त बाकी है. हाल ही में सियासी उथल-पुथल से उबरे पंजाब में इस बार अलग ही सियासी तस्वीर नजर आई है. एक ओर जहां प्रदेश में राजनीतिक जमीन तलाश रही भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कोशिशे नाकाफी साबित होती दिख रही हैं. वहीं, कभी पंजाब की कमान संभाल चुके कैप्टन अमरिंदर सिंह चुनावी माहौल से गायब हैं. हालांकि, पंजाब की सत्ता तक का सफर तक करना कांग्रेस के लिए भी आसान नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की लुधियाना रैली में एक शांति देखी गई. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि और भाषण भी खास असर करते नहीं दिखे. हालांकि, इस दौरान एक बात यह भी गौर करने वाली थी कि कैप्टन का जिक्र शायद ही कहीं आया हो. चुनाव से महज चार महीने पहले ही पद से हटाए गए पूर्व सीएम ने कांग्रेस से अलग होकर पंजाब लोक कांग्रेस लॉन्च की, जो इस चुनाव में भाजपा के साथ है.

2017 में सिंह का नाम नारों सुनाई देता था, ‘चौंदा है पंजाब, कैप्टन दी सरकार’. कभी पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने वाले सिंह का 2022 में सियासी ग्राफ गिरना जारी है. एक ओर जहां उनकी पूर्व पार्टी ने अस्वीकार कर दिया. वहीं, उनके नए साथी भी बमुश्किल उनका जिक्र कर रहे हैं. यहां तक कि पीएलसी के भी कई नेताओं ने ‘हॉकी और गेंद’ के बजाए ‘कमल’ पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है.

कांग्रेस के क्या हैं हाल
कांग्रेस के लिए भी 2022 का चुनावी अभियान आसान नहीं रहा है. कई जगहों पर कांग्रेस को पूर्व सीएम के नेतृत्व वाली अपनी ही सरकार के विरोध में विपक्ष के साथ सुर मिलाने पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. कैप्टन के खिलाफ चुनावी मैदान में आए कांग्रेस उम्मीदवार विष्णु शर्मा कहते हैं, ‘मैं लोगों के लिए 24 घंटे उपलब्ध हूं. महल के दरवाजे (अमरिंदर सिंह) बंद रहे. जब मैं मेयर था तब भी सरकार के मंत्री मेरे घर पर आते थे, क्योंकि वे उनसे मुलाकात नहीं करते थे.’ शर्मा के मुताबिक, पंजाब में सबसे बड़ा मुद्दा है, ‘4.5 सालों में सीएम के शहर में कोई भी काम नहीं हुआ, किसी को भी उनकी सरकार से कुछ नहीं मिला.’

इधर, कांग्रेस चन्नी फैक्टर पर भी भरोसा कर रही है. पार्टी के पोस्टर पर नजर आ रहा है, ‘साड्डा चन्नी, साड्डा सीएम.’ दलित आबादी की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी के साथ चन्नी राज्य के पहले दलित सीएम हैं. हालांकि, सिंह के 4.5 साल को छोड़ते हुए चन्नी के 111 दिनों की उसी कांग्रेस सरकार के प्रचार ने पार्टी को अजीब स्थिति में ला दिया है. इसके अलावा चन्नी के बिजली-पानी के बकाया को माफ करने की घोषणा के चलते भी पार्टी की इस रणनीति को भी सीमित सफलता ही मिलती नजर आ रही है.

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पटियाला जिले के नंदगढ़ गांव के करम सिंह धीमान बकाया माफी पर कहते हैं, ‘पानी, बिजली सस्ती होती है… कैप्टन बादलों के साथ शामिल थे, चन्नी साब वदिया ने.’ भदौड़ जिले के धौला गांव के बीकर सिंह रविदासी हैं. वे कहते हैं, ‘यह मौका 70 सालों के बाद आया है चन्नी साब हम में से एक हैं.’ संगरूर में बलाद कलां गांव के एससी मोहल्ला के जरनैल सिंह ने कहा, ‘साडी तो मासा बारी आई है.’

हालांकि, भदौड़ में एससी और जाट दोनों क्षेत्रों के मतदाताओं के बीच उम्मीद के साथ संदेह भी नजर आ रहा है. चन्नी के भतीजे से 10 करोड़ रुपये मिलने की खबर हाथ में रखे गुरमैल सिंह कहते हैं, ‘वो एससी हैं, लेकिन क्या वे गरीब हैं?’ वहीं, रामदासिया सिंक लाडी सिंह ने कहा, ‘चन्नी ने ऐलान पूरे नहीं किए. हम अपना वोट उन्हें देंगे, जो हमें फायदा देगा, इसलिए नहीं कि क्योंकि वे हमारे भाईचारा या बिरादरी से जुड़े हैं.’

पंजाब में दलित आबादी बड़ी संख्या में है, लेकिन दलित चेतना हमेशा हिंदू-सिख, उपजातियों, अलग-अलग डेरा के साथ जुड़ाव और तीन क्षेत्रों में होने के कारण विभाजित नजर आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में दलित चेतना को एकजुट होने के लिए एक चिन्ह की तलाश है, लेकिन कम से कम अभी के लिए चन्नी में यह नजर नहीं आ रहा.

Tags: Assembly elections, Captain Amarinder Singh, Charanjit Singh Channi, Punjab elections

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