पंजाब के किसानों ने केंद्र के सामने रखी 5 मांगें, कहा- पराली जलाने पर न की जाए कार्रवाई

कृषि कानून के विरोध में पंजाब में किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

किसानों ने बिजली बिल को भी वापस लिए जाने की मांग की है. किसानों ने मांग की है कि पराली जलाने (Stubble Burning) पर होने वाली सजा और जुर्माने के प्रावधान को वापस लिया जाए. मामले में जितने भी लोगों को सजा हुई है, उन्हें रिहा किया जाए.

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    नई दिल्ली. केंद्र सरकार (Central Government) के कृषि कानूनों (Agriculture Laws) का विरोध कर रहे किसानों ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) और नरेंद्र तोमर (Narendra Tomar) से मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान किसानों ने कृषि कानून वापस लिए जाने के अलावा 4 अन्य मांगें भी रखी हैं. इन मांगों में पराली जलाने की समस्या से लेकर राज्य में रेल सेवा दोबारा शुरू करने तक की बात कही गई है.

    पराली जलाने पर न मिले सजा
    इन मांगों में सबसे ज्यादा खास पराली जलाने से जुड़ी मांग रही. किसानों ने मांग की है कि पराली जलाने पर होने वाली सजा और जुर्माने के प्रावधान को वापस लिया जाए. इतना ही नहीं इस मामले में जितने भी लोगों को सजा हुई है, उन्हें रिहा किया जाए. गौरतलब है कि सजा के तौर पर 5 साल की जेल और 1 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान है. वहीं, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के मामले बढ़ने के कारण राजधानी दिल्ली में हवा की क्वालिटी खराब हो रही है.

    पराली के अलावा किसानों ने बिजली बिल को भी वापस लिए जाने की मांग की है. इस बिल के तहत सेक्टर का निजीकरण बढ़ रहा था और किसानों को मुफ्त सप्लाई बंद की जा रही थी. हालांकि, इन मांगों में मुख्य कृषि कानून का वापस लिया जाना ही रहा.

    एनडीटीवी से बातचीत में पंजाब किसान यूनियन के नेता सुखदर्शन सिंह ने कहा, 'हमने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के सामने तीन मांगें रखी हैं. इन मांगों में तीन कृषि कानूनों को खत्म किए जाने के लिए कहा है. इन कानूनों के जरिए कॉर्पोरेट पकड़ ज्यादा मजबूत हो जाती.'

    फिर शुरू की जाएं मालगाड़ियां
    किसानों की लिस्ट में पूरे राज्य में मालगाड़ियों के फिर से शुरू करने की मांग भी शामिल रही. गौरतलब है कि किसान आंदोलन के चलते रेलवे ने पंजाब में सभी यात्री और मालगाड़ियों पर रोक लगा दी थी. विरोध जताने के लिए किसानों ने पटरियों और हाईवे पर जाम लगाया था. आज किसानों के प्रतिनिधि ने साफ किया है कि सभी रास्ते खाली कर दिए गए हैं.

    जारी रहेगा विरोध
    किसानों का कहना है कि अगर केंद्र उनकी मांगों को नहीं मानता है, तो उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. आगे की रणनीतियां बनाने के लिए यूनियन लीडर्स आगामी 18 नवंबर को चंडीगढ़ में मुलाकात करेंगे. नेताओं ने बताया कि 26 नवंबर को दिल्ली में होने वाली हड़ताल का कार्यक्रम तय है.

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