Home /News /punjab /

चुनावी साल के अंत तक 2.82 लाख करोड़ रुपए के कर्ज में डूबी होगी पंजाब सरकार

चुनावी साल के अंत तक 2.82 लाख करोड़ रुपए के कर्ज में डूबी होगी पंजाब सरकार

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी   (फाइल फोटो)

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (फाइल फोटो)

साल 2022 के चुनावों (Punjab election 2022) के लिए लोकलुभावन घोषणाएं और नकद वितरण राज्य के कर्ज के बोझ को अनुमानित 2.82 लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ा देगा.

    चंडीगढ़. कांग्रेस (Congress) के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार (Punjab government) अगले साल मार्च में अपने पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने तक कम से कम 2.82 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित कर्ज  के बोझ के साथ राज्य छोड़ देगी। मार्च 2017 में जब कांग्रेस सरकार ने राज्य की बागडोर संभाली, तो उसे पिछली शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार (SAD-BJP government) से 1.82 लाख करोड़ रुपये बकाया कर्ज विरासत में मिला था. राज्य सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ का अनुमान लगाया है, जिससे विरासत में मिले 1.82 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ बढ़कर 2.82 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा.

    अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 के राज्य विधानसभा चुनावों (Punjab election 2022) के लिए लोकलुभावन घोषणाएं और नकद वितरण निश्चित रूप से राज्य के कर्ज के बोझ को अनुमानित 2.82 लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ा देगा. पंजाब सरकार की कमाई और उधारी का बड़ा हिस्सा अपने कर्ज की अदायगी के लिए इस्तेमाल किया जाता है. मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) ने हाल ही में कहा था कि राज्य सरकार के पास इन लोकलुभावन घोषणाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन है.

    वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल (Manpreet Singh Badal) ने इस वित्त वर्ष के बजट में कुल राजस्व प्राप्ति 95,257 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया है, लेकिन कांग्रेस सरकार के पिछले चार साल के रिकॉर्ड से पता चलता है कि उसने अपने राजस्व लक्ष्य का 81 प्रतिशत से अधिक कभी हासिल नहीं किया है. हालांकि वित्त मंत्री ने राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का दावा किया है, लेकिन सरकार के वित्तीय विवरण कुछ और ही बोलते हैं क्योंकि चालू वित्त वर्ष के लिए राज्य की कुल अनुमानित राजस्व प्राप्तियों का लगभग 40 फीसदी यानी 95,257 करोड़ रुपये कुल ऋण सेवा में जाएगा.

    सरकार के पास नई कमाई के रास्ते नहीं
    लोक लुभावन वादों की राजनीति ने राज्य को इस तरह के मंच पर ला दिया है कि उसकी कमाई और बाजार उधार का एक बड़ा हिस्सा पूंजीगत व्यय की तुलना में कर्ज चुकाने में चला जाता है. शेष राजस्व अनुत्पादक व्यय में चला जाता है जैसे वेतन, पेंशन, बिजली सब्सिडी और ऋण माफी का वितरण आदि. पिछली शिअद-भाजपा सरकार ने 2016-17 में अपने 10 साल के शासन के अंतिम वर्ष में वास्तव में पूंजीगत व्यय पर 54,280 करोड़ रुपये खर्च किए थे, लेकिन इसके विपरीत मौजूदा कांग्रेस सरकार ने अपने अंतिम वर्ष (2021-22) में केवल बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बजट में 34,135 करोड़ रुपये रखे है. वहीं, कोविड महामारी ने भी अन्य राज्यों की तरह पंजाब सरकार के खजाने में बड़ी सेंध लगाई है.

    अधिक चिंताजनक बात यह है कि राज्य सरकार अपने स्वयं के राजस्व उत्पन्न करने के लिए नए रास्ते तलाशने में विफल रही है और मुख्य रूप से अवैध खनन, अवैध शराब व्यापार, और प्रभावशाली राजनेताओं के स्वामित्व वाली निजी परिवहन कंपनियों को दिए गए समर्थन के कारण राजकोष को होने वाले राजस्व नुकसान को रोकने में ढिलाई बरत रही है.  वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था 1 जुलाई, 2017 से लागू की गई थी, जिसके तहत केंद्र सरकार ने किसी भी कमी के लिए मुआवजे का वादा करके राज्यों को 2015-16 के वित्तीय आधार पर सालाना आधार पर 14% की वृद्धि की गारंटी दी थी. चूंकि जीएसटी मुआवजा संवितरण, अगर आगे नहीं बढ़ाया गया, तो अगले साल जून में समाप्त हो जाएगा और पंजाब सरकार को निश्चित रूप से इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

    राज्य सरकार के लिए एकमात्र बचत अनुग्रह अतीत में पेट्रोलियम की कीमतों में निरंतर उछाल के कारण मूल्य वर्धित कर (वैट) संग्रह में वृद्धि है. राज्य ने इस साल अप्रैल-सितंबर के दौरान 4,024 करोड़ रुपये  का वैट संग्रह दर्ज किया, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह 2,426 रुपये था. साथ ही इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में उत्पाद कर के रूप में 2,907 करोड़ रुपये जमा करके, पंजाब ने पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 18 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है.

    Tags: BJP, Charanjit Singh Channi, Congress, Punjab, Punjab Assembly Election 2022

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर