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पंजाब में बदलाव: मंत्रियों पर राहुल गांधी की मुहर, क्षेत्रीय संतुलन- चन्नी मंत्रिमंडल दे रहा 5 अहम संदेश

पंजाब सरकार के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में राज्यपाल, सीएम चन्नी (फाइल फोटो)

पंजाब सरकार के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में राज्यपाल, सीएम चन्नी (फाइल फोटो)

राहुल गांधी ने सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की टीम में नए लोग के साथ ही क्षेत्रीय और जातीय भावनाओं का भी ख्याल रखा. इतना ही नहीं वह पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को कोई वार करने का मौका नहीं दे रहे हैं.

  • News18Hindi
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    चंडीगढ़. पंजाब (Punjab) के मुख्यमंत्री के तौर पर चरणजीत सिंह चन्नी  (CharanJit Singh Channi) के शपथ लेने के 6 दिन बाद सरकार में 7 नए चेहरे शामिल किए गए. इससे पहले ओपी सोनी और सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी चन्नी के साथ शपथ ली थी. इन मंत्रियों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुहर है. टीम में नए लोग के साथ ही वह क्षेत्रीय और जातीय भावनाओं का भी ख्याल रख रहे हैं. इतना ही नहीं वह पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को कोई वार करने का मौका नहीं दे रहे हैं.

    आइए हम आपको बताते हैं कि पंजाब में हुए बदलाव से कांग्रेस को कौन सी 5 चीजें हासिल हुईं.

    राहुल गांधी का कंट्रोल
    नए मंत्रिमंडल में राहुल गांधी की मुहर है. मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को दो बार दिल्ली बुलाया गया था. सूची को अंतिम रूप देने के लिए शनिवार देर रात एक अंतिम वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई. कांग्रेस ने सात नए मंत्रियों में से छह को शनिवार सुबह बताया. यह सब पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा औपचारिक रूप से सूची को मंजूरी देने से पहले हुआ. राहुल ने कुलजीत सिंह नागरा को हटाकर चार बार के विधायक 54 वर्षीय रणदीप एस नाभा को मंत्रिमंडल में लाए. राहुल के करीबी माने जाने वाले नागरा, पीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष,  मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम के पार्टी प्रभारी थे.

    जब नाभा ने सीनियर होने के बावजूद मंत्रालय ना मिलने की शिकायत करना शुरू किया, तो राहुल ने बिना किसी विरोध के नागरा की जगह उनको लाए. विरोध के बावजूद 2014 से 2018 तक युवा कांग्रेस के प्रमुख राजा अमरिंदर वारिंग  के साथ राहुल खड़े रहे. वारिंग ने मनप्रीत बादल के खिलाफ चुनाव लड़ा था और उन्हें हराया था.

    पार्टी के प्रति ईमानदारी का मिला लाभ
    राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सरकारिया और सुखजिंदर रंधावा, को न केवल बरकरार रखा गया, बल्कि उन सभी में सबसे मुखर रंधावा को उपमुख्यमंत्री के पद पर दिया गया. सुखी दूसरी पीढ़ी के कांग्रेसी हैं और उनके पिता 1984 में ऑपरेशन ब्लूस्टार के बाद तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के साथ खड़े होने वाले कुछ विधायकों में से एक थे. इसी तरह बेअंत सिंह के पोते गुरकीरत कोटली को भी ईनाम मिला है. हालांकि कैप्टन अमरिंदर के करीबी और गांधी परिवार के साथ उनके लंबे समय से संबंधों और एक लंबे हिंदू नेता के तौर पर ब्रह्म मोहिंद्रा मंत्रालय में शामिल किए गए.

    पीढ़ीगत बदलाव के संकेत
    भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह, वारिंग और नाभा को प्रमोट करके और पीपीसीसी प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू को मंत्रिमंडल में रास्ता देकर पार्टी ने पीढ़ीगत बदलाव का भी संकेत दिया है. कार्यकारी अध्यक्ष  नागरा  को छोड़कर सिद्धू के सभी करीबियों को जगह मिली.  मंत्रियों की अधिकतम उम्र 70 साल करने की बात चल रही थी, लेकिन यह नहीं हो सका क्योंकि ऐसा करने से  त्रिपत बाजवा और ब्रह्म मोहिंद्रा जैसे अनुभवी नेताओं को बाहर हो जाते. 43 साल के राजा वारिंग मंत्रालय में सबसे कम उम्र के हैं, जबकि त्रिपत बाजवा 78 साल के सबसे उम्रदराज हैं. दोनों ने अमरिंदर के खिलाफ हाथ मिलाया था.

    क्षेत्रीय संतुलन
    रेत खनन की आंधी में फंसने के बाद कैप्टन अमरिन्दर सिंह की कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले मंत्री राणा गुरजीत सिंह को मंत्रालय में फिर से शामिल होने का संबंध दोआबा क्षेत्र में उनके कद से  हो सकता है.  मौजूदा फेरबदल के साथ पार्टी के पास अब मालवा से नौ मंत्री हैं जहां 117 सदस्यीय विधानसभा में 69 सीटें हैं. सात माझा (25 सीटें) के सीमावर्ती क्षेत्र से और तीन दोआबा (23 सीटें) से मंत्री हैं. इसके साथ ही पार्टी ने माझा के राजनेताओं की उस शिकायत को दूर कर दिया है कि 2017 में इस क्षेत्र की 25 में से 22 सीटें जीतने के बावजूद पार्टी ने अपने विधायकों को ईनाम नहीं दिया गया था.

    जातीय कार्ड
    दलितों को साधने के लिए कांग्रेस सिर्फ सीएम के भरोसे नहीं है बल्कि नई काबीना में वाल्मिकी राज कुमार वेका, लुबाना समुदाय के संगत सिंह और अरुणा चौधरी को भी शामिल किया गया ताकि जातीय संतुलन बना रहे.  पिछली सरकार में तीन के मुकाबले मंत्रालय में अब एससी और बीसी समुदायों के चार सदस्य हैं.

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