पंजाब: कोटकपूरा गोलीकांड के मामले में 26 को SIT के सामने पेश होंगे सुखबीर बादल

कोटकपूरा गोलीकांड के मामले में 26 को SIT के समक्ष पेश होंगे सुखबीर बादल. (फाइल फोटो)

एसआईटी (SIT) ने बादल को 26 जून को चंडीगढ़ (Chandigarh) सेक्टर 32 के मिनी पुलिस हेडक्वार्टर में पेश होने के लिए कहा है. इस मामले में बीते मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश बादल (Former Chief Minister Prakash Badal) से पूछताछ कर चुकी है.

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    चंडीगढ़. पंजाब के कोटकपूरा गोलीकांड (Kotkapura Firing case) की जांच कर रही नई एसआईटी (SIT) ने पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री व शिरोमणि अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल (Deputy Chief Minister of Punjab chief Sukhbir Badal) को पूछताछ के लिए तलब किया है. एसआईटी ने बादल को 26 जून को चंडीगढ़ सेक्टर 32 के मिनी पुलिस हेडक्वार्टर में पेश होने के लिए कहा है. इस मामले में बीते मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश बादल (Former Chief Minister Prakash Badal) से पूछताछ कर चुकी है.

    प्रकाश बादल ने एसआइटी के अधिकांश सवालों के जवाब दिए कुछ सवालों के जवाब में कहा था कि मुझे अब याद नहीं है. SIT अभी तक पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी, डीजीपी इकबालप्रीत सहोता और स्पेशल डीजीपी होमगार्ड रोहित चौधरी सिंह से पूछताछ कर चुकी है.

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    गौरतलब है कि 14 अक्टूबर को बेअदबी के मामलों को लेकर प्रदर्शनकारियों पर कोटकपूरा और बहिबल कलां में फायरिंग कर दी थी जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि पुलिस सहित कई लोग घायल हो गए थे. तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पंजाब पुलिस के डीजीपी सुमेध सैनी का तबादला कर दिया था और मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए 16 अक्टूबर 2015 को रिटायर्ड जज जस्टिस जोरा सिंह के नेतृत्व में आयोग का गठन किया था. इस आयोग पर जब सिख संगठनों ने सवाल उठाए तो 27 दिसंबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस मार्कंडेय काटजू के नेतृत्व में एक अन्य जांच आयोग का गठन किया गया.

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    एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस काटजू की रिपोर्ट को फरवरी 2016 में अकाली-भाजपा सरकार ने मानने से इनकार दिया. यही नहीं जस्टिस जोरा सिंह की रिपोर्ट को भी 30 जून 2016 में सरकार ने नकार दिया. कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद 2017 को जस्टिस रणजीत सिंह के नेतृत्व में एक जांच आयोग का गठन कर जांच शुरू की. जस्टिस रणजीत सिंह आयोग ने 30 जून 2018 को अपनी रिपोर्ट सरकार को दी, जिसमें बेअदबी के मामलों में डेरा की भूमिका पर संदेह जताया गया था. इसके बाद यह जांच अब कई पड़ावों से गुजर रही है और अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए हैं.

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