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    किसानों के प्रदर्शन के चलते रेलवे ने रद्द की 41 ट्रेनें, NHAI को हो चुका है 150 करोड़ रुपए का नुकसान

    किसानों की मांग पहले मालगाड़ियां चलाई जाएं. (सांकेतिक फोटो)
    किसानों की मांग पहले मालगाड़ियां चलाई जाएं. (सांकेतिक फोटो)

    Punjab Farmer's Agitation: एनएचएआई (NHAI) के एक अधिकारी के अनुसार, पंजाब के सभी टोल प्लाजा पर हर रोज करीब 3 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है. प्रदर्शनों की वजह से 30 ट्रेनों के अलावा कम दूरी की 11 ट्रेनों के पहिए भी थम गए हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 20, 2020, 12:38 PM IST
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    चंडीगढ़. केंद्र सरकार के कृषि कानूनों (Agriculture Laws) का विरोध कर रहे किसानों ने प्रदर्शन तेज कर दिए हैं. किसानों की नाराजगी के चलते रेलवे और नेशन हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है. गुरुवार को रेलवे (Railway) की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक, इन प्रदर्शनों की वजह से 30 ट्रेनों को रद्द किया गया है. वहीं, कम दूरी की 11 ट्रेनों के पहिए भी थम गए हैं.

    सड़क मार्ग भी खासा प्रभावित 
    किसानों का टोल प्लाजा पर बीते अक्टूबर से ही धरना जारी है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनएचएआई को पंजाब स्थित टोल प्लाजा पर अब तक 150 करोड़ रुपए के रेवेन्यू का नुकसान हो चुका है. मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि प्रदर्शन कर रहे किसान सड़क से गुजरने वाले यात्रियों को टोल नहीं चुकाने दे रहे हैं. वे टोल बूथ पर मौजूद अधिकारियों को भी शुल्क वसूलने नहीं दे रहे हैं.

    एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी (चंडीगढ़) आरपी सिंह के अनुसार, पंजाब के सभी टोल प्लाजा पर हर रोज करीब 3 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है. सिंह ने बताया कि किसानों के इस आंदोलन से राजस्व का नुकसान हो रहा है, जिसका असर सड़क परियोजनाओं पर पड़ सकता है.



    पहले मालगाड़ी चलाओ फिर पैसेंजर चलने देंगे
    बुधवार को हुई 30 किसान यूनियन की बैठक में यह फैसला लिया गया है कि केंद्र सरकार पहले पंजाब में मालगाड़ियों का संचालन शुरू करें. इसके बाद ही हम राज्य में सवारी गाड़ियों को शुरू करने के बारे में विचार करेंगे. हालांकि, रेलवे ने यह साफ कर दिया है कि या तो दोनों तरह की रेल सेवाएं शुरू की जाएंगी. नहीं तो कोई ट्रेनें नहीं चलेंगी. खास बात है कि किसानों के प्रदर्शनों के चलते राज्य में मालगाड़ियों के बंद हुए बीते एक महीने से ज्यादा वक्त गुजर चुका है. इसकी वजह से आर्थिक मोर्चे के अलावा जरूरत की चीजों की सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है.
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