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सतनाम संधू: चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के मालिक, Video कांड ने हिला दिया जिनका 'शैक्षिक साम्राज्य'

सतनाम संधू: चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के मालिक, Video कांड ने हिला दिया जिनका 'शैक्षिक साम्राज्य'

सतनाम सिंह संधू लिंक्डइन पर खुद को 'एडुप्रेनेउर' (शिक्षाविद) बताते हैं.  (फोटो- Linkedin/Satnam Singh Sandhu)

सतनाम सिंह संधू लिंक्डइन पर खुद को 'एडुप्रेनेउर' (शिक्षाविद) बताते हैं. (फोटो- Linkedin/Satnam Singh Sandhu)

पंजाब के सबसे बड़े निजी विश्वविद्यालयों में शुमार यह संस्थान कई छात्राओं के आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड किए जाने के आरोपों को लेकर इन दिनों विवादों में घिरा हुआ है. इस विश्वविद्यालय की स्थापना सतनाम सिंह संधू ने की है, जो खुद को लिंक्डइन पर 'एक एडुप्रेन्योर (शिक्षाविद्) बताते हैं. हालांकि एक दशक से अधिक समय में इस अकादमिक साम्राज्य को खड़ा करने के दौरान उनका नाम विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़ता रहा. अकालियों से लेकर कांग्रेस तक के सियासी गलियारों में उनका दबदबा बताया जाता है.

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  • News18Hindi
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हाइलाइट्स

सतनाम सिंह संधू ने वर्ष 2012 में मोहाली के पास चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की स्थापना की.
यह प्राइवेट संस्थान बीते 10 वर्षों में राज्य के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में शुमार होता है.
सतनाम संधू का कांग्रेस और अकाली दल के सियासी गलियारों में दबदबा बताया जाता है.

स्वाती भान
चंडीगढ़.
पंजाब के मोहाली में चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने जब सप्ताह भर के लिए शैक्षणिक अवकाश की घोषणा की तभी यह साफ हो गया था कि इसके संस्थापक सतनाम सिंह संधू एक दशक से भी लंबे समय में खड़े किए गए अपने ‘शैक्षिक साम्राज्य’ के संचालन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक से जूझ रहे हैं.

पंजाब के सबसे बड़े निजी विश्वविद्यालयों में शुमार यह संस्थान कई छात्राओं के आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड किए जाने के आरोपों को लेकर इन दिनों विवादों में घिरा हुआ है. संस्था का कहना है कि छात्रों का विरोध ‘अफवाहों’ से शुरू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद 100 एकड़ के विशाल कैंपस की तरह संधू भी आज मीडिया के सवालों के घेरे में हैं.

अकालियों से लेकर कांग्रेस तक में दबदबा
लिंक्डइन पर संधू खुद को ‘एक एडुप्रेन्योर (शिक्षाविद्) कहते हैं, जिन्हें विभिन्न स्तरों पर नीति निर्माताओं द्वारा उनकी दूरदर्शी शैक्षिक नीतियों के लिए पहचाना गया है’. हालांकि एक दशक से अधिक समय में इस अकादमिक साम्राज्य को खड़ा करने के दौरान उनका नाम विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़ता रहा. अकालियों से लेकर कांग्रेस तक के सियासी गलियारों में उनका दबदबा बताया जाता है.

एसजीपीसी के तत्कालीन प्रमुख गुरचरण सिंह तोहरा के कट्टर अनुयायी संधू का अलग-अलग राजनीतिक रंग से जुड़ाव रहा है. वर्ष 2002 में वह अपने लंबे समय के सहयोगी राशपाल सिंह धालीवाल के स्वामित्व वाले चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज का हिस्सा बने. हालांकि संधू इतने पर नहीं रुके और उन्होंने 2012 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की स्थापना की.

उनके राजनीतिक जुड़ाव ने एक बड़ी प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनाने के उनके सपने को साकार करने में मदद की. संधु अकाली दल नेतृत्व के बेहद करीबी माने जाते हैं और जिन्होंने उनके उदय को देखा है, उनका दावा है कि इस करीबी ने उन्हें यूनिवर्सिटी स्थापित करने में खासी मदद की. मोहाली और चंडीगढ़ के पास जमीन के एक बड़े टुकड़े के मालिक होने से यह काम आसान हो गया.

सरकार और विपक्ष दोनों को रखा साथ
हालांकि इसे संधू की काबिलियत की मानी जाएगी कि तत्कालीन सरकार के साथ गहरी दोस्ती के दोस्ती के बावजूद विपक्षी दलों से भी उनके रिश्ते अच्छे बने रहे. संधू ने वर्षों तक पंजाब की सियासी धरातल पर सक्रीय लोगों से अच्छे संबंध बनाए रखे. यही वजह थी कि जब पंजाब के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान को चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में स्थापित पहले ड्रोन हब के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया तो किसी को हैरानी नहीं हुई.

इससे पहले विश्वविद्यालय ने पंजाब यूथ फेस्ट की मेजबानी की थी, जहां राज्य के तत्कालीन शिक्षा मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, जो आगे चलकर सीएम बने, ने परिसर का दौरा किया था.

संधू की इस यूनिवर्सिटी ने राष्ट्रीय ध्वज को दर्शाने वाली सबसे बड़ी मानव श्रृंखला बनाई थी, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री के मन की बात संबोधन में भी हुआ था.

सत्ता में बैठे लोगों के साथ संधू की निकटता तब भी दिखाई दी जब उन्होंने दिल्ली में सद्भावना कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री से मिलने के लिए प्रमुख पंजाबियों और एनआरआई सिखों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था. उनके कई केंद्रों का उद्घाटन करने के लिए कई केंद्रीय मंत्री विश्वविद्यालय का दौरा कर चुके हैं.

संधू के शैक्षणिक करियर की कई सफलताएं
संधू अपने शैक्षणिक करियर की कई उपलब्धियां गिनाते हैं, जिसमें सबसे कम समय में विश्वविद्यालय को NAAC-A से मान्यता मिलने से लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) में अच्छा प्रदर्शन तक शामिल है.

हालांकि पंजाब के सियासी उतार-चढ़ाव को सफलतापूर्वक बेधने के बावजूद संधू अब खुद को अपने ही छात्र बिरादरी के गुस्से से जूझता हुआ पा रहे है.

Tags: Chandigarh news, Mohali, Punjab news

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