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पंजाबः 40 साल से झंडा फहराने का करते थे प्रबंध, इस बार तिरंगा के सामने ही हो गई मौत, जानें मामला

पंजाबः 40 साल से झंडा फहराने का करते थे प्रबंध, इस बार तिरंगा के सामने ही हो गई मौत, जानें मामला

झंडोत्सव के दौरान ही स्कॉउट कमिश्नर हरजीत सिंह अचिंत हार्ट अटैक से बेहोश हो गए.

झंडोत्सव के दौरान ही स्कॉउट कमिश्नर हरजीत सिंह अचिंत हार्ट अटैक से बेहोश हो गए.

Scout commissioner died: पंजाब के आनंदपुर साहिब में स्वतंत्रता दिवस के दिन झंडा फहराने के दौरान एक 74 वर्षीय स्काउट कमिश्नर का दिल का दौड़ा पड़ने से निधन हो गया. स्काउट कमिश्नर हरजीत सिंह अचिंत पिछले 40 सालों से राष्ट्रीय महत्व के दिनों पर तिरंगा फहराने की तैयारी किया करते थे.

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हाइलाइट्स

40 साल से लगातार झंडोत्सव का प्रबंध करते थे स्काउट कमिश्नर हरजीत सिंह अचिंत
इस बार भी वे सारे प्रबंध कर चुके थे लेकिन तिरंगा फहराने के दौरान ही दिल का दौड़ा पड़ गया
उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन तब तक उनका निधन हो चुका था

एस. सिंह

चंडीगढ़. जब पूरा पंजाब स्वतंत्रता दिवस के जश्न में डूबा हुआ था, तभी आनंदपुर साहिब एक दुखद घटना सामने आई. तिरंगा फहराने के दौरान एक स्काउट कमिश्नर हरजीत सिंह अचिंत (74) को दिल का दौरा पड़ा. उन्हें स्थानीय अस्पताल तो पहुंचाया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इस अवसर पर स्थानीय एसडीएम मनीषा राणा मुख्य अतिथि थीं. हरजीत सिंह अचिंत शिरोमणि अकाली दल के पूर्व सर्किल अध्यक्ष भी थे. मास्टर अचिंत पिछले 40 सालों से स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराने की तैयारी करते थे.

एसजीएस खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि द्वारा तिरंगा फहराने के तुरंत बाद ध्वज के पास खड़े अचिंत अचानक चक्कर खाने से नीचे गिर गए. इस दौरान स्वतंत्रता दिवस समारोह में कुछ देर के सन्नाटा सा छा गया. इस घटना के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया. लेकिन उनकी जान बचाई नहीं जा सकी.

शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने पहुंचे आनंदपुर साहिब के पूर्व सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से असंवेदनशीलता का आरोप लगाया है. चंदूमाजरा ने कहा कि हालांकि मास्टर अचिंत ने पिछले 40 वर्षों से राष्ट्रीय महत्व के दिनों में तिरंगा फहराने की तैयारी के लिए स्वेच्छा से काम किया था, आनंदपुर साहिब एसडीएम ने इस संबंध में शोक व्यक्त करने के लिए कुछ मिनट भी नहीं दिए, जबकि समारोह के दौरान उनकी आंखों के सामने उनकी मृत्यु हो गई थी. उन्होंने कहा कि मैंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर घटना की जानकारी उनके संज्ञान में लाई है.

हालांकि दि ट्रिब्यून को दिए बयान में एसडीएम मनीषा राणा ने आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि वह शोक संतप्त परिवार से मिलने नहीं जा सकती थीं, क्योंकि वह स्वतंत्रता दिवस समारोह और मोहल्ला क्लिनिक खोलने के समारोह में व्यस्त थी. उन्होंने कहा कि जिला जनसंपर्क अधिकारी ने तहसीलदार और यहां तक कि स्थानीय विधायक और कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस के साथ उनके घर पर शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात की थी.

Tags: Punjab, Punjab news

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