SAD आगामी विस चुनाव में BSP के साथ कर सकता है गठबंधन, सीटों के बंटवारे पर अटका है पेच

पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और बीएसपी का गठबंधन साथ मिलकर लड़ सकता है विधानसभा चुनाव.

पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और बीएसपी का गठबंधन साथ मिलकर लड़ सकता है विधानसभा चुनाव.

सूत्रों के मुताबिक आगामी विधानसभा चुनाव (Assembly elections) में शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal SAD) बसपा को 117 में से 18 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कर रहा है जबकि बसपा (Bahujan Samaj Party) 37 से 40 सीओं पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है.

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चंडीगढ़. शिरोमणि अकाली दल (शिअद) (Shiromani Akali Dal SAD) अब बहुजन समाज पार्टी बसपा (Bahujan Samaj Party) के साथ मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव (Assembly elections) लड़ सकता है. दोनों ही राजनीतिक दल पिछले कई दिनों से गठबंधन (Alliance) पर विचार विमर्श कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर पेच फंसा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक शिरोमणि अकाली दल बसपा को 117 में से 18 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कर रहा है जबकि बसपा 37 से 40 सीओं पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है.

मीडिया में दिए गए एक बयान में बसपा के पंजाब प्रभारी रणधीर सिंह बैनीपाल ने कहा कि यदि बसपा की ओर से मांगी गई पर शिरोमणि अकाली दल गौर करती है तो हम दो चार छोड़नी भी पड़ी तो छोड़ देंगे. हालांकि शिअद के वरिष्ठ नेता दलजीत चीमा ने कहा है कि शिअद इस पर अभी अपनी रणनीति तैयार कर रहा है.


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गौरतलब है कि किसान आंदोलन के चलते शिअद ने भाजपा से किनारा कर लिया है, जिसके बाद उसे दूसरे दल से राजनीतिक गठबंधन पर विचार करना पड़ रहा है. पंजाब में दलितों का करीब 33 फीसदी वोट बैंक है और शिअद के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने चुनाव जीतने के बाद दलित समुदाय से डिप्टी सीएम बनाने का ऐलान कर रखा है.

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पंजाब की राजनीति दलितों के वोट बैंक के आसपास ही घूमती है जिसके चलते भाजपा ने भी पंजाब से दलित सीएम बनाने का ऐलान कर रखा है, यही नहीं हाल ही में कांग्रेस के बीच की कलह में भी कांग्रेस हाईकमान को शिकायत की गई है कि सूबे में कांग्रेस सरकार दलितों की अनदेखी कर रही है. उधर बताया जा रहा है कि दलित वोट बैंक को लेकर अकाली दल 117 विधानसभा क्षेत्रों का एक सर्वे करवा रहा है. इसे सर्वे में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि किस दलित नेता के साथ कितने समर्थक हैं. आम आदमी पार्टी भी जमीनी स्तर पर दलितों को अपने साथ जोड़ने में जुटी हुई है. कुल मिलाकर सभी राजनीतिक दलों की दलित वोट बैंक पर नजर है.

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