सरकारी स्कूलों में एडमिशन के लिए पेरेंट्स के पास पहुंचे टीचर, सोशल मीडिया पर भी जारी है प्रचार

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा के द्वारा लगातार कोर्स के साथ जोड़े रखा गया.

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा के द्वारा लगातार कोर्स के साथ जोड़े रखा गया.

Punjab latest news in Hindi: पिछले साल सरकारी स्कूलों में एडमिशन के सम्बन्ध में शिक्षा विभाग ने नंबर वन रहकर बड़ी उपलब्धि हासिल की थी. पिछले साल राज्य भर के सरकारी स्कूलों में प्री -प्राईमरी क्लासों में तकरीबन 3.30 लाख बच्चों ने एडमिशन लिया था.

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  • Last Updated: March 10, 2021, 8:12 PM IST
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चंडीगढ़. पंजाब शिक्षा विभाग (Punjab Education deptt.) के निर्देशों के बाद अध्यापकों ने सरकारी स्कूलों (Government Schools) में बच्चों को पढ़ाने के लिए घर-घर जाकर उनके अभिवावकों को प्रेरित करना शुरू कर दिया है. इस मुहिम के तहत अध्यापक बच्चों के घर-घर जाकर उन्हें सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का आग्रह कर रहे हैं. इसके अलावा सरकार स्कूलों का सोशल मीडिया (Social Media) पर भी प्रचार कर रही है.

पिछले साल सरकारी स्कूलों में एडमिशन के सम्बन्ध में शिक्षा विभाग ने नंबर वन रहकर बड़ी उपलब्धि हासिल की थी. पिछले साल राज्य भर के सरकारी स्कूलों में प्री -प्राईमरी क्लासों में तकरीबन 3.30 लाख बच्चों ने एडमिशन लिया था और सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के एडमिशन में 15 प्रतिशत के करीब रिकार्ड बढ़ोतरी दर्ज की थी.

पिछले साल ऑनलाइन चली थी क्लास
पिछले साल कोविड-19 के कारण हुए लाकडाउन के दौरान सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा के द्वारा लगातार कोर्स के साथ जोड़े रखा गया. कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार (Captain Amrinder Singh government) के इस कार्यकाल के दौरान शिक्षा के मानक में हुए वृद्धि के कारण लोगों का सरकारी स्कूलों में विश्वास बढ़ा है. इस कारण स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के एडमिशन में बढ़ोतरी करने के लिए व्यापक रूप-रेखा बना कर मुहिम शुरू की है. इस मुहिम को सफलतापूर्ण चलाने के लिए ‘इन्नरोलमैंट बूस्टर टीमों’ का गठन पहले ही कर दिया गया है.
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शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला (Punjab Education Minister Mr. Vijay Inder Singla) के अनुसार सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए अध्यापकों द्वारा घर-घर जाने के अलावा गांवों और शहरों के साझे स्थानों, बाजारों और सड़कों पर फ्लैक्स लगाने और पंचों-सरपंचों, काउंसलरों और अन्य गण्मान्य लोगों के साथ मीटिंगें की जा रही हैं. सरकारी स्कूलों की विशेषताओं को दर्शाते हुए पोस्टर, वीडीयो, शार्ट फिल्में तैयार करवा के सोशल मीडिया पर अपलोड की जा रही हैं.
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