बारिश और तेज हवाओं ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ाई, 10 फीसदी फसल बर्बाद होने का अनुमान

बठिंडा जिला में किसानों की गेहूं की फसल को खासा नुकसान पहुंचा है

बठिंडा जिला में किसानों की गेहूं की फसल को खासा नुकसान पहुंचा है

बठिंडा स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में स्थापित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय कीऑबसर्वेट्री (Observatory of the Punjab Agricultural University) के अनुसार दक्षिण मालवा में मंगलवार तड़के 40-45 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ हवाएं चलीं.

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  • Last Updated: March 23, 2021, 2:22 PM IST
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चंडीगढ़. पंजाब के विभिन्न हिस्सों में मंगलवार को हुई बारिश और तेज हवाओं (Rains and Winds) से गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचने का अंदेशा है. दक्षणी पंजाब में भी किन्नू बागवानों को काफी नुक्सान पहुंचा है. किन्नू के पेड़ों पर आजकल फूल लग रहे थे जो तेज हवाओं के कारण झड़ गए हैं. वहीं गेहूं की फसल को लेकर कृषि विशेषज्ञों (Agricultural experts) का कहना है कि बारिश और हवाओं से गेहूं को हुए नुक्सान से इसके उत्पादन में 10 फीसदी गिरावट आ सकती है.

40 से 50 किमी की रफ्तार से चली हवाएं

बठिंडा स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में स्थापित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय कीऑबसर्वेट्री (Observatory of the Punjab Agricultural University) के अनुसार दक्षिण मालवा में मंगलवार तड़के 40-45 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ हवाएं चलीं. इस क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में हल्की बारिश हुई है. दक्षिण पंजाब में 20 किमी प्रति घंटा की रफ्तार के साथ हवाएं चलने की खबर है. मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार रात तक दोबारा बारिश होने की संभावनाएं जताई गई हैं. बठिंडा जिला में किसानों की गेहूं की फसल को खासा नुकसान पहुंचा है. किसानों का कहना है कि वे इस साल अच्छी फसल होने की उम्मीद जता रहे थे, लेकिन बारिश और तेज हवाओं के कारण उनकी 25 फीसदी फसल खराब हो चुकी है. उन्होंने सरकार से बर्बाद हुई फसल का जल्द आकलन करने की मांग की है और कहा है कि उन्हें इसका मुआवजा कटाई के वक्त ही मिल जाना चाहिए. किसानों की फसल ऐसे समय में बर्बाद हुई है जब उनकी फसल बिलकुल पकने के नजदीक थी.

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किन्नू उत्पादक भी परेशान

पंजाब के अबाेहर में किन्नू उत्पादक भी बारिश और हवाएं चलने के कारण परेशान हो उठे हैं. बीते सोमवार को आधी रात को आए तूफान और तेज हवाओं ने पेड़ों पर लगे फूलों को नष्ट कर दिया है. उनका कहना है कि अभी एक और चरण में पेड़ों पर फूल लग सकते हैं, लेकिन मौसम ऐसा ही रहा तो सारी फसल बर्बाद हो जाएगी. करनाल में भारतीय कृषि अनुसंधान प्रयोगशाला के निदेशक जीपी सिंह ने कहा है कि वर्तमान जलवायु स्थिति गेहूं के लिए अच्छी नहीं है.
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