पंजाब के पेश की मिसाल! 7 गुरुद्वारों और 2 मंदिर वाले गांव में 4 मुस्लिम परिवारों के लिए बनेगा मस्जिद

पंजाब स्थित मोगा के भुलर गांव के सरपंच ने कहा कि पिछले 70 वर्षों में ग्रामीणों ने कभी भी किसी को अपने आप को अकेला महसूस नहीं होने दिया.

पंजाब स्थित मोगा के भुलर गांव के सरपंच ने कहा कि पिछले 70 वर्षों में ग्रामीणों ने कभी भी किसी को अपने आप को अकेला महसूस नहीं होने दिया.

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    चंडीगढ़. पंजाब के मोगा (Moga in Punjab) के भुलर गांव में चार मुस्लिम परिवार (Muslim families) ऐसे भी है जो 1947 में भारत बंटवारे (Partition of India) के बाद पाकिस्तान ही नहीं गए. गांव में इन परिवारों के लिए नमाज अदा करने के लिए सिख और हिंदू परिवारों ने मस्जिद बनाने का बीड़ा उठाया है. गांव में सिखों और हिंदुओं के लिए अरदास और पूजा करने के लिए 7 गुरुद्वारे और 2 मंदिर (7 Gurdwaras and 2 temples) मौजूद हैं. जबकि चार मुस्लिम परिवारों के लिए गांव में बनी मस्जिद (Mosque) कई दशक पहले खंडहर में बदल चुकी है.

    अब सभी गांव वालों ने एकजुट होकर चंदा जुटाकर मस्जिद निर्माण की आधारशिला (Foundation stone) रख दी है. बीते रविवार को जब मस्जिद की आधारशिला रखी गई तो भारी बारिश के बीच धार्मिक समारोह (Religious ceremonies) और लंगर में खलल न पड़े इसके लिए सिख परिवारों ने सारा आयोजन गुरु घर में करवाकर भाईचारे की अनूठी मिसाल कायम की.

    बंटवारे से पहले खंडहर हो गई थी मस्जिद
    द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक गांव में सात गुरुद्वारे और दो मंदिर हैं, लेकिन कोई मस्जिद नहीं है. 1947 में विभाजन से पहले एक मस्जिद थी, लेकिन इसकी यह समय के साथ खंडहर में बदल गई. गांव के 45 वर्षीय सरपंच पाला सिंह कहते हैं कि गांव में हमारे चार मुस्लिम परिवार हैं जिन्होंने यहीं रहना पसंद किया और तब से हमारे गांव में हिंदू, मुस्लिम और सिख परिवार सद्भाव से रहते हैं. वह कहते हैं कि हम सभी चाहते थे कि मुस्लिम परिवारों के लिए भी पूजा करने की जगह हो. इसलिए यह तय किया गया कि मस्जिद उस जमीन पर फिर से बनाई जाएगी जहां यह पहले मौजूद थी. पाला सिंह ने बताया कि बीते रविवार को जब मस्जिद का शिलान्यास करने की पूरी तैयारी की गई तो तेज बारिश शुरू हो गई और जमीन दलदली हो चुकी थी.

    हर समुदाय के लोगों ने दिया चंदा
    लोग दुखी और निराश थे जब बताया गया कि भारी बारिश के कारण कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ सकता है, तो सभी ग्रामीणों ने फैसला किया कि कार्यक्रम स्थल को पास के श्री सत्संग साहिब गुरुद्वारे में स्थानांतरित कर दिया जाए. गुरु का घर हमेशा सभी समुदायों के लिए खुला रहता है. फिर सबने इकट्ठे होकर घंटों के भीतर सब कुछ व्यवस्थित कर दिया. कार्यक्रम आयोजित किया गया और इसमें सभी ग्रामीणों ने भाग लिया.

    सरपंच ने कहा कि पिछले 70 वर्षों में ग्रामीणों ने कभी भी किसी को अपने आप को अकेला महसूस नहीं होने दिया. उन्होंने कहा कि वे बहुत खुश हैं कि एक मस्जिद हमारा दसवां पूजा स्थल होगा. उन्होंने कहा 100 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक चंदा हर समुदाय के लोगों ने दिया, उतना दिया. वक्फ बोर्ड के सदस्य भी योगदान दे रहे हैं. गांव के पूर्व सरपंच बोहर सिंह ने गुरुद्वारे में अपने भाषण के दौरान कहा कि उनका पूरा गांव मस्जिद के निर्माण में पूरा सहयोग करेगा. समारोह में शामिल नायब शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने आयोजन स्थल के लिए ग्रामीणों का धन्यवाद किया.

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