पंजाब कांग्रेस में आखिर कैसे शुरू हुई कलह, कैप्टन से क्यों खफा हैं कई विधायक?

पंजाब में कांग्रेस इकाई में चल रही है अंतर्कलह. (File pic)

Punjab Congress: कुछ विधायकों और मंत्रियों ने भी विद्रोही खेमे का पक्ष लिया है. इस कारण कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में एक जांच समिति गठित की.

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    चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा (Punjab Assembly) में कांग्रेस (Congress) अधिक बहुमत में मौजूद है. विधानसभा में 117 सीटों में से कांग्रेस के पास 80 सीटें हैं. लेकिन अब कांग्रेस की पंजाब इकाई में अंतर्कलह अब सबके सामने आ चुकी है. पार्टी के कुछ सदस्यों ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के खिलाफ बगावत कर दी है, खासकर जब सरकार हाईकोर्ट (High Court) में संवेदनशील बहबल कलां और कोटकपूरा फायरिंग के मामलों में हार गई, विशेष जांच दल की रिपोर्ट को खारिज कर दिया और सरकार से एक और एसआईटी गठित करने के लिए कहा है.

    इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद कई कांग्रेस नेताओं ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना की. यहां तक कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) के अध्यक्ष सुनील जाखड़ और कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर रंधावा ने इस मुद्दे पर कैबिनेट की बैठक में इस्तीफा देने की पेशकश भी कर दी.

    ऐसे संकेत मिलते हैं कि रंधावा नवजोत सिंह सिद्धू के साथ सीएम अमरिंदर सिंह के खिलाफ एकजुट हो सकते हैं. सिद्धू पहले ही सीएम अमरिंदर के खिलाफ बोल चुके हैं और उन पर अकालियों के साथ मिलकर छलावा करने का आरोप लगाया गया है. कुछ विधायकों और मंत्रियों ने भी विद्रोही खेमे का पक्ष लिया है. इस कारण कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में एक जांच समिति गठित की.

    कमेटी ने क्‍या किया?
    कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी की ओर से गठित की गई कमेटी ने करीब 150 नेताओं, जिनमें राज्‍य के मं‍त्री, विधायक, सांसद और अन्‍य संगठनों के नेता भी शामिल थे, उनकी बातें और समस्‍याएं सुनीं. इसके बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सोनिया गांधी को सौंपा. इस कमेटी ने मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह से भी मुलाकात की और उनकी भी बातें सुनीं. कमेटी के सदस्‍य जेपी अग्रवाल के अनुसार सीएम अमरिंदर सिंह ने सभी मुद्दों पर गहराई से बात की.

    कमेटी ने सुझाव दिया कि नवजोत सिंह सिद्धू को कोई पद दिया जाए और पार्टी पुनर्गठित किया जाए. कांग्रेस आलाकमान को अभी इस रिपोर्ट पर एक्‍शन लेना है.

    क्‍या हाईकोर्ट की ओर से एसआईटी को खारिज कर देना ही एकमात्र मुद्दा है?
    नहीं, राज्य में पार्टी के सत्ता में वापस आने के तुरंत बाद कांग्रेस में आक्रोश पनप रहा था. यह समस्‍या तब शुरू हुई थी जब सरकार ने किसानों को कृषि ऋण माफी का अपना पहला वादा पूरा किया था. सरकार ने इसके तहत 5,000 करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन राजनीतिक नेताओं ने आरोप लगाया कि राजनीतिक वर्ग को श्रेय दिए बिना लाभ दिया गया. पैसा सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर किया गया था. सरकार के पहले साल के कार्यकाल से ही पार्टी के कार्यकर्ता इस बात पर अफसोस जता रहे हैं कि नौकरशाह सरकार चला रहे हैं और नेताओं की अनदेखी की जा रही है.

    अन्‍य मुद्दे क्‍या हैं?
    बरगाड़ी बेअदबी घटना के बाद हुई पुलिस फायरिंग के मामले में बादल परिवार के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर मुख्यमंत्री अमरिंदर के खिलाफ नाराजगी है. पार्टी नेतृत्व इस बात पर अफसोस जताता रहा है कि यह धारणा जोर पकड़ रही है कि सीएम का पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार के साथ लेनदेन हुआ था. एक और बड़ा मुद्दा ड्रग्स तस्करी पर एसटीएफ की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किए जाने का है.

    इस रिपोर्ट को तीन साल पहले एसटीएफ प्रमुख ने एक लिफाफे में हाईकोर्ट में पेश किया था. लिफाफा अभी खुला नहीं है. नेता मामले को ठीक से नहीं चलाने के लिए कानूनी विभाग को जिम्मेदार मानते हैं क्योंकि सरकार ड्रग रैकेट में नामित शिरोमणि अकाली दल के किसी नेता को बचाना चाहती थी. विवादास्पद बिजली खरीद समझौते (पीपीए) को रद्द नहीं करने को लेकर भी अन्य मुद्दे हैं.

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