गैर मर्द संग रिश्ता रखने के कारण कोई महिला 'कुमाता' नहीं हो सकती, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट. (पीटीआई फाइल फोटो)

Punjab News: अपने पैतृक गांव नवलखा जाने के बाद फरवरी 2020 में महिला को उसकी बेटी से जबरदस्ती अलग कर दिया गया था.

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    चंडीगढ़. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को अपने एक आदेश में कहा कि किसी महिला का विवाहेतर संबंध (Extramarital Affair) होना यह साबित नहीं करता कि वह एक बुरी मां है. इसके साथ ही अदालत ने महिला की साढ़े चार साल की बेटी को उसके हवाले कर दिया. विवाह से जुड़े झगड़े के बाद पति जबरदस्ती बेटी को अपने साथ ले गया, जिसके बाद महिला ने बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की और उसी के सिलसिले में अदालत का यह फैसला आया है.


    जस्टिस अनुपिंदर सिंह ने फैसला सुनाते हुए कहा, 'एक पितृसत्तात्मक समाज में किसी महिला के नैतिक चरित्र पर आरोप लगाना काफी सामान्य है. अक्सर ये आरोप बिना किसी वजह या आधार के लगाए जाते हैं. यहां तक ​​​​कि यह मानते हुए कि एक महिला विवाहेतर संबंध में है या रही है, अपने आप में यह निष्कर्ष नहीं निकाल सकता है कि वह अपने बच्चे की कस्टडी से इनकार करने के लिए एक अच्छी मां नहीं होगी.'


    याचिकाकर्ता महिला पंजाब के फतेहगढ़ साहिब की रहने वाली है, जबकि उनके पति लुधियाना से हैं और दोनों ही ऑस्ट्रेलिया के नागरिक हैं. नवंबर 2013 में इन दोनों की शादी हुई और जून 2017 में उनकी बेटी का जन्म हुआ. 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' में प्रकाशित खबर के मुताबिक, अपने पैतृक गांव नवलखा जाने के बाद फरवरी 2020 में महिला को उसकी बेटी से जबरदस्ती अलग कर दिया गया था.


    याचिका में महिला के वकील ने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति ठीक है और वह अपनी बेटी को पालने में पूरी तरह से सक्षम हैं. इतना ही नहीं, याचिका में इस बात को भी रेखांकित किया गया कि महिला के पास अपना घर है और वह ऑस्ट्रेलिया में खुद के लिए बेहतर काम कर रही हैं, जबकि उनके पति आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं.