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तजाकिस्तान में फंसे राजस्थान के 800 छात्र, सरकार से लगाई मदद की गुहार

तजाकिस्तान में फंसे राजस्थान के 800 छात्र, सरकार से लगाई मदद की गुहार

तज़ाकिस्तान के शहर दुशांबे में इस वक्त भारत के 1200 छात्र मेडिकल की पढ़ाई पढ़ रहे है. इन 1200 छात्रों में से अकेले राजस्थान के 800 छात्र है.

तज़ाकिस्तान के शहर दुशांबे में इस वक्त भारत के 1200 छात्र मेडिकल की पढ़ाई पढ़ रहे है. इन 1200 छात्रों में से अकेले राजस्थान के 800 छात्र है.

तजाकिस्‍तान (Tajikistan) में फंसे भारतीयों ने दूतावास (Indian Embassy) से लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) तक से गुहार लगाई है.

जयपुर. देश में लॉकडाउन (Lockdown) का तीसरा चरण चल रहा है. सरकार ने तीसरे चरण के तहत, जरूरतमंदो के लिए लॉकडाउन में कुछ रियायतें दी है. मजदूरों को उनके घर पहुंचाया जा रहा है और मेडिकल इमरजेंसी में निकलने की छूट है. इतना ही नहीं, छात्रों को भी उनके घर पहुंचाने का इंतज़ाम किया जा रहा है. अब केंद्र सरकार ने अब विदेश में फंसे भारतीयों को भी लाने का काम शुरू कर दिया है. ऐसे में कजाकिस्‍तान में फंसे राजस्‍थान (Rajasthan) मूल के करीब 800 छात्रों से सरकार से मदद की गुहार लगाई है. भारतीय छात्रों को इंतजार है कि सरकार उनकी फरियाद कब सुनेगी और वो कब घर लौटेंगे.

तज़ाकिस्तान के शहर दुशांबे में इस वक्त भारत के 1200 छात्र मेडिकल की पढ़ाई पढ़ रहे है. इन 1200 छात्रों में से अकेले राजस्थान के 800 छात्र है. राजस्‍थान के लगभग सभी जिलों के छात्र दुशांबे में लॉकडाउन के कारण फंसे हुए है. उन्हे उम्मीद थी कि जब सरकार विदेश में फंसे सभी भारतीयों को निकालने में लगी है तो इनका नंबर भी आएगा. लेकिन, 7 मई से शुरू हुए इस ऑपरेशन में तजाकिस्तान के छात्रों का नाम नहीं है. ये अब मायूस है और इन्होंने न्यूज18 से गुहार लगाई है कि सरकार किसी भी तरह से इन्हे तजाकिस्तान से निकाले. मेडिकल की पढ़ाई कर रहे इन छात्रों ने अपने स्तर वो सभी जरूरी कोशिशें की हैं, जो एक इंसान इस वक्त कर सकता है.

नहीं मिला कोई जवाब
कजाकिस्‍तान में फंसे भारतीय एंबेसी से लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय तक को ट्विट किए, लेकिन अब तक इन्हें कोई जवाब नहीं मिला है. इसके साथ ही, इन छात्रों ने उस एंजेसी के साथ भी बात की, जो इन्हें पढ़ाई करवाने के लिए तजाकिस्तान लेकर आई है. लेकिन, इस एंजेसी ने भी हाथ खड़े कर दिए. इन छात्रों को कहना है कि जब पूरी दुनिया से चुन-चुन कर विदेश में फंसे भारतीयों को भारत वापस लाया जा रहा है तो इनके साथ सौतेला व्यवहार क्यूं किया जा रहा है. उनका कहना है कि तजाकी सरकार तबतक उन्‍हें वापस नहीं भेज सकती है, जब तक भारत सरकार की तरफ से हरी झंडी ना मिल जाए. इसीलिए इन्होंने एक बार फिर से गुहार लगाई है.

सूची में नहीं तजाकिस्‍तान का नाम
लॉकडाउन में फंसे छात्रों का कहना है कि लॉकडाउन के वक्त हर कोई अपनों के साथ रहना चाहता है तो इन्हें भी इनके घर पहुंचाया जाए. ये छात्र रोज़ भारत से जुडी खबरें इंटरनेट पर पढ़ रहे है और इन्हें जानकारी है कि इस वक्त किस-किस देश से भारतीयों को भारत वापस लाया जा रहा है, बस उस सूची में तजाकिस्तान का नाम नहीं है. अब इन्हे इंतजार है कि जल्द ही इनके लिए भी फ्लाइट का इंतज़ाम किया जाएगा और ये भी अपनी धरती पर वापस लौट सकें.


Tags: Airlift, Coronavirus, COVID 19, Dushanbe, Lockdown, Rajasthan government, Rajasthan news, Rescue operation, Students, Tajikistan, राजस्थान

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