नगर निगम चुनाव: महिला प्रत्याशी ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर दाखिल किया नामांकन, FIR दर्ज

राजस्थान में नगर निगमों के चुनाव में अब राजनीति गरम होने लगी है.
राजस्थान में नगर निगमों के चुनाव में अब राजनीति गरम होने लगी है.

नगर निगम चुनाव (Municipal Corporation Election) में एक महिला उम्मीदवार ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र (Fake caste certificate) बनवाकर नामांकिन दाखिल कर दिया. अब विपक्षी उम्मीदवार की शिकायत पर महिला के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 25, 2020, 12:09 PM IST
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कोटा. राजस्थान (Rajasthan) में ग्राम पंचायत चुनाव के बाद अब कोटा में नगर निगम चुनाव (Municipal Election) की सर्गर्मियां तेज हो गई हैं. कोटा में होने वाले नगर निगम चुनाव के महासमर में हर योग्य और अयोग्य उम्मीदवार कूदना चाहता है. इसके लिए लोग तरह-तरह के गणित बैठा रहे हैं.  वहीं एक महिला प्रत्याशी के सिर पर नगर निगम चुनाव का नशा इस तरह छाया कि महिला ने फर्जी ओबीसी का प्रमाण पत्र तैयार कर लिया और इसी के आधार पर नामांकन भी दाखिल कर दिया.

जब मामला बढ़ा तो अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए महिला प्रत्याशी के खिलाफ धारा 420 के मामले  FIR दर्ज कराई है. मामला कोटा दक्षिण के वार्ड 25 की भाजपा प्रत्याशी अपर्णा सैनी का है, जिसने झूठे शपथ पत्र पेश कर ओबीसी का जाति प्रमाण पत्र बनवा लिया और रिजर्व वार्ड 25 से नामांकन भर दिया.

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जैसे ही मामले की जानकारी विपक्षी प्रत्याशी को मिली तो उसने प्रशासन से शिकायत की और आनन-फानन में एसडीएम से तहसीलदार से इसकी जांच करवाई. तहसीलदार की जांच में प्रमाण पत्र त्रुटिवश जारी होना पाया गया, जिसका नोटिस प्रत्याशी के घर पर 19 तारीख को ही चस्पा कर दिया गया था साथ ही इसकी सूचना रिटर्निंग ऑफिसर को भी दी गयी थी.
जब मामला राज्य निर्वाचन आयोग तक पहुंचा तो जिला कलेक्टर ने तहसीलदार को निर्देश देकर नयापुरा थाने में प्रत्याशी अपर्णा सैनी के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है. प्रकरण पर नयापुरा डीएसपी भगवत सिंह हिंगड़ ने बताया कि अब पूरे मामले की तहकीकात की जा रही है. प्रत्याशी के दस्तावेजों की जांच की जा रही है यदि प्रत्याशी की गलती निकलती है या दस्तावेजों में खामियां निकलती हैं तो उसे गिरफ्तार भी किया जा सकता है. फिलहाल प्रत्याशी के चुनाव लड़ने को लेकर किसी के पास कोई जवाब नही है.

महिला उम्मीदवार ने चाहे जानबूझकर फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया हो या फिर अधिकारियों से त्रुटिवश यह प्रमाण पत्र जारी किया हो दोनों ही स्तर पर गलती सरकारी अधिकारियों की है. क्योंकि अधिकारी या तो लापरवाह हैं जो अपना काम सही तरीके से नहीं करते हैं या फिर दस्तावेजों का अनदेखी करके कोई भी प्रणाण पत्र जारी कर देते हैं. ऐसे में अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई बनती है.
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