Ajmer: पिता की मौत के बाद बेटी ने ओढ़ी सभी जिम्मेदारियां, समाज के सामने बंधवाई पगड़ी

सीमा के खुद के भी कोई बेटा नहीं है. सीमा के भी 3 बेटियां हैं.
सीमा के खुद के भी कोई बेटा नहीं है. सीमा के भी 3 बेटियां हैं.

अजमेर में सामाजिक बदलाव (Social change) की बयार देखने को मिली है. यहां एक बेटी ने अपने पिता की मौत के बाद समाज के सामने अपने सिर पर पगड़ी बंधवाकर उनकी सारी जिम्मदारियां (Responsibility) ओढ़ने की बड़ी मिसाल पेश की है.

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अजमेर. रफ्तार से बदलते वक्त के साथ अब पीढ़ियों से चली आ रही पुरानी परंपराओं (Traditions) को बदलकर समाज मे नया संदेश (New message) दिया जा रहा है. ऐसा ही एक संदेश अजमेर जिले के ब्यावर से भी आया है. ब्यावर जैसे छोटे कस्बे में एक नई सामाजिक चेतना (Social consciousness) देखने को मिली है. यहां पिता की मौत के बाद उनके कोई पुत्र नहीं होने पर परिवार की सबसे बड़ी बेटी ने ही पगड़ी बंधवाकर इस बात का संदेश दिया है कि बेटा और बेटी एक समान है. बेटियां भी किसी मामले में कम नहीं है. वे भी बेटों का फर्ज निभा सकती हैं.

ब्यावर के प्रताप नगर इलाके में रहने वाले 68 वर्षीय ओमप्रकाश के कोई पुत्र नहीं है. उनके 4 बेटियां हैं. पिछले दिनों ओमप्रकाश की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार से लेकर सभी धार्मिक क्रियायें बेटियों ने ही मिलकर पूरी की. बुधवार को सबसे बड़ी बेटी सीमा ने पाग (पगड़ी) बंधवाने की रस्म अदा कर अपने पिता की जिम्मेदारियों को अपने सिर लिया. सीमा के खुद के भी कोई बेटा नहीं है. सीमा के भी 3 बेटियां हैं. सीमा ने इस नई पहल के साथ बेटियों के प्रति समाज के नजरिये में बदलाव की अभिनव पहल की है. सीमा के इस प्रयास का कस्बेवासियों ने भी स्वागत किया और एक स्वर में बोला की बेटियां बेटों से कम नहीं.

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धीरे-धीरे बदलाव की शुरुआत हो रही है


उल्लेखनीय है कि पिछले काफी समय से ऐसे उदाहरण सामने आ रहे हैं, जिसमें बेटियां माता-पिता की चिता को मुखाग्नि देने समेत अन्य फर्ज निभा रही हैं. खासकर राजस्थान जैसे पंरपंरागत राज्यों में तो इस तरह की बातों को बड़ी अलग नजर से देखा जाता है. लेकिन अब धीरे-धीरे बदलाव की शुरुआत हो रही है और लोग भी इसे सहज रूप से स्वीकार कर रहे हैं.
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