दिल्ली हिंसा पर बोले अजमेर दरगाह के दीवान- शांति को कमजोर करने वाली चीज का इस्लाम में कोई स्थान नहीं
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दिल्ली हिंसा पर बोले अजमेर दरगाह के दीवान- शांति को कमजोर करने वाली चीज का इस्लाम में कोई स्थान नहीं
अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के दीवान जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा कि, हिंसा से किसी समस्या का समाधान होना संभव नहीं है.

अजमेर (Ajmer) के ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती (Khwaja Moinuddin Hasan Chishti) की दरगाह के दीवान जैनुल आबेदीन अली खान (Zainul Abedin Ali Khan) ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के चलते समाज को भय दिखाकर उसे सड़क पर उतारने का काम एक लंबे अरसे से किया जा रहा है. यह अभी भी हो रहा है. जब इस आशंका को दूर करने का काम होना चाहिए था, तब उसे गहराने का काम किया जा रहा है.

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अजमेर. अजमेर (Ajmer) के ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती (Khwaja Moinuddin Hasan Chishti) की दरगाह के दीवान जैनुल आबेदीन अली खान (Zainul Abedin Ali Khan) ने दिल्ली हिंसा (Delhi Violence) पर खास संदेश दिया है. उन्होंने कहा है कि शांति के माहौल को कमजोर करने वाली किसी भी चीज का इस्लाम में कोई स्थान नहीं है. हिंसा से किसी समस्या का समाधान होना नामुमकिन है. राजनीतिक स्वार्थ के चलते समाज को खतरों का भय दिखाकर देश की मुख्यधारा से भटकाने की साजिश को पहचानें. उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के चलते समाज को अलग-अलग  खतरों का डर दिखाकर उसे सड़क पर उतारने का काम एक लंबे अरसे से होता चला आ रहा है. यह अभी भी हो रहा है. जब इस आशंका को दूर करने का काम होना चाहिए, तब उसे गहराने का काम किया जा रहा है. यह नकारात्मक राजनीति तो बर्बादी का रास्ता है.

हिंसा किसी भी तरह की हो, अच्छी नहीं होती
दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख सैयद जैनुल आबेदीन अली खान सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 808 वें उर्स की पूर्व संध्या पर रविवार को दरगाह परिसर स्थित खानकाह शरीफ में देश भर की प्रमुख दरगाहों के सज्जादानशींनों, सूफियों और धर्म प्रमुखों की वार्षिक सभा को संबोधित कर रहे थे. देश के मौजूदा हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए दरगाह दीवान ने कहा कि, आज देश में हिंसा, युद्ध और आक्रामकता का बोल-बाला है. जब इस तरह की अमानवीय और क्रूर स्थितियां समग्रता से होती हैं तो उसका समाधान भी समग्रता से ही खोजना पड़ता है. हिंसक हालातों की मानसिकताएं जब प्रबल होती हैं तो अहिंसा का मूल्य अपने आप बढ़ जाता है. हिंसा किसी भी तरह की हो, अच्छी नहीं होती. मगर हैरानी की बात यह है कि आज हिंसा के कारण लोग सामाजिक अलगाव एवं अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं.

नकारात्मक राजनीति वाला समाज तरक्की नहीं कर सकता
अली खान ने कहा कि, दुर्भाग्य से यह नकारात्मक राजनीति शिक्षा संस्थानों में भी देखने को मिल रही है. नकारात्मक राजनीति में फंसा कोई समाज ढंग से तरक्की नहीं कर सकता. समाज को समृद्ध करने वाले शिक्षा संस्थान आज राजनीतिक टकराव और अशांति का केंद्र बन रहे हैं, जबकि इस्लाम में शांति को सबसे बड़ी अच्छाई कहा गया है.



धर्म के ठकेदारों से खुद को बचाने की है जरूरत
हर भारतीय को ख़ास तौर से देश के मुसलमानों को सकारात्मकता की डोर थामने की जरूरत है और साथ ही ऐसे खुदगर्ज नेताओं और स्वार्थी तथाकथित धर्म के ठकेदारों से खुद को बचाने की भी जरूरत है, जिन्हें समाज की कम और अपने स्वार्थ की चिंता ज्यादा है. शांति के माहौल को कमजोर करने वाली किसी भी चीज का इस्लाम में कोई स्थान नहीं है. इस्लाम की शिक्षाओं का सार यही है कि जिस समाज में अशांति होगी, वहां लोग सामान्य गतिविधियों से दूर होकर राष्ट्र की मुख्यधारा से पिछड़ जाएंगे. उन्होंने कहा कि सूफियों के प्यार भरे इस्लामी सन्देश की ही ऐसी कशिश है कि आज भी देश में ऐसी सैंकड़ों दरगाहें हैं, जिनकी देख-रेख गैर मुस्लिम कर रहे हैं.

सूफी परंपरा का सम्प्रदायीकरण करना गलत
सूफियों की प्रेम करूणा की वजह ही है कि भारत से पूरी दुनिया में इस्लाम के शांति और भाईचारे के पैगाम का प्रसार हुआ है. इसलिए सूफी परंपरा का सम्प्रदायीकरण करना गलत है. उन्होंने कहा कि सूफीवाद ने बड़ी ही कोमलता और प्रेम से स्वयं को पूरे विश्व में स्थापित कर लिया है. भारत में इसे लाने का श्रेय महान सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को जाता है, जिन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी अजमेर में बितायी और आज भी अजमेर शरीफ को धर्म-सम्प्रदाय के भेद-भाव से परे उनके पवित्र दरगाह के शहर के रूप में ही जाना जाता है.

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