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अजमेर: बैंक लोन में गारंटर बनना पड़ सकता है भारी, सोच समझकर लें गारंटी, पढ़ें ये हकीकत

Abhijeet Dave | News18 Rajasthan
Updated: November 30, 2019, 3:42 PM IST
अजमेर: बैंक लोन में गारंटर बनना पड़ सकता है भारी, सोच समझकर लें गारंटी, पढ़ें ये हकीकत
बैंक अधिकारियों ने पुलिस की मदद से किराएदार को संपत्ति से बेदखल करते हुए उसका कब्जा ले लिया.

अगर आप बैंक (Bank) से लोन वाले किसी साथी या रिश्तेदार के गारंटर (Guarantor) बनने जा रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी (Most importent) है. क्योंकि गारंटर बनने में आपका बड़ा नुकसान (Big loss) भी हो सकता है. लिहाजा किसी का गारंटर बनने से पहले पूरी तरह से सोच-समझकर फैसला (Decision) लें.

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अजमेर. अगर आप बैंक (Bank) से लोन वाले किसी साथी या रिश्तेदार के गारंटर (Guarantor) बनने जा रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी (Most importent) है. क्योंकि गारंटर बनने में आपका बड़ा नुकसान (Big loss) भी हो सकता है. लिहाजा किसी का गारंटर बनने से पहले पूरी तरह से सोच-समझकर फैसला (Decision) लें. ऐसा ही एक वाकया अजमेर (Ajmer) में हुआ है. अजमेर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने एक गांरटर का मकान सीज (Seized) कर अपने कब्जे में ले लिया है.

एसबीआई से 67 लाख 50 हजार रुपए का लोन लिया था
अजमेर की फर्म मैसर्स वीनस एन्टरप्राइजेज के जरिए प्रोपराइटर ज्योति भोजवानी ने वर्ष 2016 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 67 लाख 50 हजार रुपए का लोन लिया था. बैंक ने तमाम शर्तों के मुताबिक लोन दिया था. लोन की प्रक्रिया के दौरान गांरटर की भूमिका में आए थे एडवोकेट दीपक चैनानी. कुछ समय बाद लोन लेने वाले ने किश्तें चुकाना बंद कर दिया. इस पर बैंक की ओर से कई बार उन्हें सूचना भेजी गई. विधिक कार्रवाई के बाद भी लोन लेने वाले ने किश्त चुकाने की जहमत नहीं उठाई.

बैंक अधिकारी पहुंचे गारंटर की मकान पर

इस पर बैंक ने अंतिम हथियार अपनाया और गांरटर बने एडवोकेट दीपक चैनानी की बंधक रखी संपत्ति के खिलाफ अदालत में वाद दायर कर दिया. कानूनी लड़ाई लड़ने एडवोकेट दीपक चैनानी यहां अपनी लड़ाई हार गए. शुक्रवार को जयपुर से एसबीआई की रिकवरी शाखा के अधिकारी अजमेर कलक्टर से पुलिस सहयोग का आदेश लेकर धौला भाटा स्थित गांरटर की संपत्ति (मकान) पर पहुंच गए.

संपत्ति को नीलाम कर वसूली जाएगी लोन की रकम
यहां एडवोकेट दीपक चैनानी ने नया पैंतरा खेला. उन्होंने अपनी संपत्ति में किराएदार होने का हवाला देते हुए संपत्ति का कब्जा बैंक को सौंपने से इंकार कर दिया. लेकिन बैंक ने सरफेजी अधिनियम का हवाला देते हुए बताया कि बिना बैंक की अनुमति के बंधक रखी संपत्ति पर किराएदार रखने का अधिकार संपत्ति मालिक को नहीं है. ऐसे में बैंक अधिकारियों ने पुलिस की मदद से किराएदार को संपत्ति से बेदखल करते हुए उसका कब्जा ले लिया. अब इस संपत्ति को नीलाम कर लोन की रकम वसूल की जाएगी.
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पैनल्टी और ब्याज समेत राशि हुई 90 लाख रुपए
मसला यहीं खत्म नहीं हुआ. गारंटर को और भी क्या-क्या भुगतना पड़ सकता है यह भी इस केस में सामने आया. वर्ष 2016 में 67 लाख 50 हजार रुपए का लोन लिया गया. लेकिन 3 साल के अंदर ही लोन की किश्तें ना चुका पाने के चलते पैनल्टी और ब्याज लगाकर अब बैंक 90 लाख रुपए की वसूली के हिसाब से कार्रवाई कर रहा है.

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First published: November 30, 2019, 3:39 PM IST
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