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राजस्थान: उपचुनाव से पहले किसान कर्जमाफी पर सियासत गर्म, जेपी नड्डा के दौरे ने दी और हवा

उपचुनाव से पहले किसान कर्जमाफी पर राजस्थान की सियासत गर्म, जेपी नड्डा के दौरे ने दी और हवा

उपचुनाव से पहले किसान कर्जमाफी पर राजस्थान की सियासत गर्म, जेपी नड्डा के दौरे ने दी और हवा

उपचुनाव की आहट के बीच भाजपा ने किसान कर्जमाफी के मुद्दे को हवा देनी शुरू कर दी है. जिन किसानों ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से कर्ज लिया था उनका ऋ ण माफ नहीं किया गया. इसी को लेकर विपक्ष सत्ता पक्ष पर हमलावर है. जेपी नड्डा के दौरे ने इस किसानों के मुद्दे पर गहलोत सरकार पर धार को और तेज कर दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 2, 2021, 10:24 PM IST
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जयपुर.  राजस्थान में चार सीटों पर होने वाले उपचुनाव का असर दिखने लगा है. इसको लेकर विपक्ष ने गहलोत सरकार पर निशासन साधना शुरू कर दिया है. उपचुनाव की आहट के बीच भाजपा ने किसान कर्जमाफी के मुद्दे को हवा देनी शुरू कर दी है. जिन किसानों ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से कर्ज लिया था उनका ऋ ण माफ नहीं किया गया. इसी को लेकर विपक्ष सत्ता पक्ष पर हमलावर है. जेपी नड्डा के दौरे ने इस किसानों के मुद्दे पर गहलोत सरकार पर धार को और तेज कर दिया. जबकि सरकार इस मामले में गेंद केन्द्र सरकार के पाले में डालने का प्रयास कर रही है.

देश में किसानों को लेकर सियासत गर्माई हुई है. किसान आन्दोलन को लेकर पक्ष-विपक्ष एक-दूसरे पर हमलावर हैं. वहीं प्रदेश में भी चार सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले किसान कर्जमाफी के मुद्दे पर भाजपा राज्य सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है. विधानसभा में भी बार-बार प्रश्नों के जरिए यह मामला उठाया जा रहा है. राज्य सरकार सहकारी बैंकों के कर्ज तो माफ कर चुकी है , लेकिन बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों की कर्जमाफी अभी भी बाकी है. किसान आन्दोलन का समर्थन कर रही कांग्रेस को इस मुद्दे पर लगातार घेरा जा रहा है. मंगलवार को जयपुर दौरे पर आए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा. वहीं, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उद्योगपतियों के कर्ज माफ करने वाली भाजपा सरकार को इस मुद्दे पर बोलने का हक ही नहीं है.

किसान कर्जमाफी ऐसा मुद्दा है जो उपचुनाव में बाजी पलटने की ताकत रखता है. यही वजह है कि भाजपा इसे लेकर राज्य सरकार पर हमलावर है. राज्य सरकार मामले को केन्द्र सरकार के पाले में डालने का प्रयास कर रही है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बार-बार कह चुके हैं कि करीब 15 हजार करोड़ के सहकारी बैंकों के कर्ज राज्य सरकार ने माफ किए हैं और अब राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्ज माफ करने के लिए केन्द्र सरकार को पहल करनी चाहिए.  उधर बजट में भी सीएम ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों के कर्ज वन टाइम सेटलमेंट के आधार पर माफ करने की घोषणा की है.



वन टाइम सेटलमेंट के आधार पर किसानों के कर्ज माफ करने की कवायद लम्बे समय से चल रही है, लेकिन अभी तक इसका रास्ता नहीं निकल पाया है. राष्ट्रीयकृत बैंक चूंकि राज्य सरकार के अधीन नहीं हैं, लिहाजा राज्य सरकार इसमें केन्द्र से सहयोग की अपील कर रही है. उधर उपचुनाव से पहले इस मुद्दे को हवा देकर भाजपा इसका राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश करती दिख रही है.
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