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Ajmer News: फ्लाइट में जन्मे मासूम को नहीं मिल पा रहा है जन्म प्रमाण-पत्र, जानिये क्यों ?

नवजात के पिता भैंरू सिंह ने बतया कि फ्लाइट में डिलीवरी के बाद जब वे जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के लिये जवाजा पंचायत समिति के दफ्तर पहुंचे तो उसे नियमों को हवाला देकर वहां से टरका दिया गया.

नवजात के पिता भैंरू सिंह ने बतया कि फ्लाइट में डिलीवरी के बाद जब वे जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के लिये जवाजा पंचायत समिति के दफ्तर पहुंचे तो उसे नियमों को हवाला देकर वहां से टरका दिया गया.

Birth certificate case: करीब 21 दिन पहले उड़ती फ्लाइट में जन्म लेने वाले मासूम को अभी तक जन्म प्रमाण-पत्र नहीं मिल पाया है. मासूम के परिजन जन्म प्रमाण-पत्र के सरकारी कार्यालयों के लिये चक्कर लगा रहे हैं. लेकिन सरकारी कर्मचारी उन्हें सही जानकारी भी उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं.

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अजमेर. भले ही जन्म और मरण की तिथि नहीं टलती हो लेकिन सरकारी तंत्र (Government machinery) इनके बाद वाली प्रक्रियाओं को जब तक चाहे तब तक टाल सकता है. कुछ ऐसा ही हो रहा है एक नवजात (Newborn) के साथ. इस नवजात  ने 21 दिन पहले 17 मार्च को आसमान में 33 हजार फीट की ऊंचाई पर इंडिगो एयरलाइन्स की फ्लाइट में जन्म (Born in flight) लिया था, लेकिन इतने दिनों के बाद भी उसे जन्म प्रमाण-पत्र (Birth certificate) नहीं मिल पाया है.

जानकारी के अनुसार मामला अजमेर जिले के ब्यावर इलाके से जुड़ा है. अजमेर के ब्यावर इलाके के जालिया रूपावास निवासी गर्भवती ललिता गत 22 मार्च को इंडिगो एयरलाइन्स कि फ्लाइट से हैदराबाद से जयपुर आ रही थी. इसी दौरान उसे प्रसव पीड़ा होने लगी. गनीमत रही कि फ्लाइट में डॉक्टर मौजूद थी. उसने क्रू मेम्बर कि मदद से ललिता कि सफल डिलीवरी करवाई.

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एयरलाइंस ने नवजात को आजीवन फ्लाइट में मुफ्त यात्रा का तोहफा भी दिया
फ्लाइट के जयपुर एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद ललिता को अस्पताल में वहां भर्ती करवाया गया. वहां चिकित्सकों ने परिक्षण के बाद मां और नवजात को स्वस्थ पाया. जानकारी के अनुसार इंडिगो एयर लाइंस ने नवजात को आजीवन फ्लाइट में मुफ्त यात्रा का तोहफा भी दिया है. यहां तक तो सब ठीक था. लेकिन असली कहानी शुरू हुई सरकारी विभाग से जन्म प्रमाण पत्र लेने की कवायद से.

नियमों को हवाला देकर वहां से टरका दिया
नवजात के पिता भैंरू सिंह ने बतया कि फ्लाइट में डिलीवरी के बाद जब वे जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के लिये जवाजा पंचायत समिति के दफ्तर पहुंचे तो उसे नियमों को हवाला देकर वहां से टरका दिया गया. बाद में उसे ब्यावर जाकर सरकारी कार्यालय के चक्कर लगवाये गये, लेकिन फिर भी बात नहीं बनी. अभी भी वह नियमों के फेर में जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के लिये भटक रहा है.

जानकारी के अभाव में होती है परेशानी
जानकारी के अनुसार यदि किसी का जन्म या मृत्यु फ्लाइट में होती है तो एयरपोर्ट ऑथिरिटी के मार्फत उसकी सूचना संबंधित विभाग को दी जाती है. उसके आधार पर ही संबंधित का जन्म या मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाया जा सकता है. लेकिन नियमों के जटिलता और जानकारी के अभाव में आमजन सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर होते रहते हैं. यहां तक कि कई बार स्थानीय कर्मचारी भी उन्हें सही जानकारी नहीं दे पाते हैं. कुछ ऐसा ही हो रहा है भैंरू सिंह के साथ.

(रिपोर्ट- चन्द्रशेखर)
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