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फ्लाइट में जन्मा बच्चा: 22 दिन से नहीं मिला नवजात को जन्म प्रमाण-पत्र, सुने पिता की जुबानी पूरी कहानी

भैरूं सिंह का कहना है कि वह ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है. उसने एक-दो बार एयरपोर्ट बात करने की कोशिश की, लेकिन वहां कोई फोन ही नहीं उठाता है.

भैरूं सिंह का कहना है कि वह ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है. उसने एक-दो बार एयरपोर्ट बात करने की कोशिश की, लेकिन वहां कोई फोन ही नहीं उठाता है.

Child born in flight: 22 दिन पहले फ्लाइट में जन्मे बच्चे की परिजनों को अभी तक उसका जन्म प्रमाण-पत्र नहीं मिल पाया है. नवजात के परिजन उसके जन्म प्रमाण-पत्र के लिये दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो रहे हैं.

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अजमेर. आज से 22 दिन पहले गत 17 मार्च को इंडिगो की फ्लाइट (Flight) में आसमान में जन्मे मासूम (Newborn baby) को अभी तक उसे उसका जन्म प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया है. सरकारी तंत्र (Government machinery) के मकड़जाल में फंसा मासूम का पिता ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं होने के कारण सरकारी कार्यालयों में चक्कर लगाने के लिये मजबूर हो रहा है. फ्लाइट में जन्म और बाद में जन्म प्रमाण-पत्र (Birth certificate) को लेकर मीडिया की सुर्खियों में छाये मासूम के पिता का कहना है कि वह परेशान हो चुका है.

जयपुर एयरपोर्ट वाले फोन नहीं उठाते. इंडिगो एयरलाइंस ने एक दो बार कुशलक्षेम पूछकर अपना पल्ला झाड़ लिया. जयपुर एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इस बार में कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया है. परेशान पिता का कहना है कि डिलीवरी कराने वाली डॉक्टर मैडम ने मदद करने का आश्वासन दिया है. जयपुर में वह किसी को जानता नहीं है. पूरी मशक्कत का निचोड़ यह है अभी तक जन्म प्रमाण-पत्र नहीं मिला है.

सुने मासूम के पिता भैरूं सिंह की जुबानी पूरी कहानी
भैरूं सिंह अजमेर जिले के ब्यावर उपखंड इलाके के जालिया रूपवास गांव का रहने वाला है. भैरूं सिंह बेंगलुरु में ऑटो ड्राइवर है. वह अपनी पत्नी ललिता के साथ बैंग्लूरू रहता है. बकौल भैरूं सिंह उसकी पत्नी गर्भवती थी. उसे मार्च माह में आठवां महीना लगा था. इस बीच अचानक पिताजी की तबीयत खराब हो गई तो इंडिगो एयरलाइंस से इमरजेंसी में टिकट बनवाकर गांव आये. गांव आने से पहले ललिता का चैकअप करवाया था. डॉक्टर ने कहा कि अभी सब कुछ ठीक है. आठवां महीना है तो इमरजेंसी में सफर कर सकते हैं.
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ये हुआ फ्लाइट में
बकौल भैरूं सिंह इस पर वे 17 मार्च को फ्लाइट से बेंगलुरु से जयपुर के लिये रवाना हो गये. लेकिन फ्लाइट में ही ललिता के प्रसव पीड़ा होने पर वहां मौजूद एक लेडी डॉक्टर ने क्रू मेंबर के सहयोग से उसकी सफल डिलीवरी करवा दी. उसके बाद जयपुर पहुंचने पर जच्चा बच्चा को वहां एक अस्पताल में दिखाया. वहां डॉक्टर ने जच्चा-बच्चा दोनों को स्वस्थ बताया. उसके बाद वे गांव आ गये.

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कागज दे दिये, फार्म भर दिया, लेकिन कुछ नहीं हुआ
यहां आने के बाद नवजात के जन्म प्रमाण-पत्र के लिये संपर्क किया तो सरपंच ने कहा कागज दे दो प्रमाण-पत्र बन जायेगा. उसके बाद उसने सरपंच को कागज दे दिया। फार्म भी भर दिया. बाद में उसे जवाजा पंचायत समिति भेजा गया. वहां से वापस गांव आया. आज जब सरपंच से फिर संपर्क किया तो उसने कहा कि अजमेर बात करने पर पता चला है कि बच्चे का प्रमाण-पत्र जयपुर बनेगा.

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जयपुर एयरपोर्ट प्रबंधन ने कुछ भी कहने से इनकार किया
भैरूं सिंह का कहना है कि वह ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है. उसने एक-दो बार एयरपोर्ट बात करने की कोशिश की, लेकिन वहां कोई फोन ही नहीं उठाता है. पहले शुरुआत में एक-दो बार इंडिगो एयरलाइंस से कुशलक्षेम पूछने के लिये फोन आया था. अब वहां से भी जवाब नहीं मिलता है. अब डिलीवरी करवाने वाली डॉक्टर मैडम ने मदद करने का आवश्वासन दिया है. देखो क्या होता है. वहीं जयपुर एयरपोर्ट डायरेक्टर ने इस मामले में कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया है.

(इनपुट- चन्द्रशेखर शर्मा एवं आसिफ खान)
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