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Rajasthan: कांग्रेस को अपनों से ही 'टेंशन', खुलकर सामने आ रहे मनमुटाव, कैसे पूरा होगा 2023 मिशन?

मंत्री अशोक चांदना मंत्री पद को ही जलालत भरा बता चुके हैं तो दिव्या मदेरणा जलदाय मंत्री को रबड़ स्टैम्प कह चुकी हैं.

मंत्री अशोक चांदना मंत्री पद को ही जलालत भरा बता चुके हैं तो दिव्या मदेरणा जलदाय मंत्री को रबड़ स्टैम्प कह चुकी हैं.

राजस्थान में अगले साल 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं. इन चुनावों में भले ही कांग्रेस दावा कर रही है कि कांग्रेस एकजुट है और मिशन 2023 हर हाल में पूरा होगा. लेकिन विधायकों के लगातार बगावती तेवर और अपने ही मंत्रियों के कार्यशैली से नाराजगी कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. ताजा मामला किशनपोल विधायक अमीन कागजी का है. जिन्होंने डॉक्टर्स के तबादलों से नाराज होकर अपनी ही सरकार के मंत्री के निवास पर धरना दे दिया. विधायक के ये आक्रामक तेवर मीडिया की सुर्खियां बने और पार्टी में एकजुटता दिखाने में जुटी कांग्रेस के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया.

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जयपुर. प्रदेश में कांग्रेस के पैबंद छिपाए नहीं छिप रहे हैं. आपसी मनमुटाव बार-बार खुलकर बाहर आ रहे हैं. इससे संगठन के सामने तो संकट खड़ा हो ही रहा है, सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है. सत्ता पक्ष के विधायक ही बार-बार सरकार के मंत्रियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं. ताजा मामला किशनपोल विधायक अमीन कागजी का है. जिन्होंने डॉक्टर्स के तबादलों से नाराज होकर अपनी ही सरकार के मंत्री के निवास पर धरना दे दिया.

विधायक के ये आक्रामक तेवर मीडिया की सुर्खियां बने और पार्टी में एकजुटता दिखाने में जुटी कांग्रेस के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया. विपक्ष ने इसे लेकर सत्ता-संगठन पर ताने कसे और कांग्रेस पर सवालों का जवाब देना भारी हो गया. इससे पहले सीएम गहलोत द्वारा गजेन्द्र सिंह शेखावत और सचिन पायलट पर दिए बयान को लेकर कांग्रेस पहले ही चुप्पी साधे हुए थी. कांग्रेस अब सवालों से बच रही है और केवल इतना कह रही है कि कांग्रेस एकजुट है और मिशन 2023 हर हाल में पूरा होगा.

ये विधायक भी खोल चुके मोर्चा
अमीन कागजी सत्ता पक्ष के अकेले ऐसे विधायक नहीं है जिन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार के मंत्री को घेरा है. पिछले दिनों में बार-बार ऐसे वाकए सामने आए हैं. मंत्री अशोक चांदना मंत्री पद को ही जलालत भरा बता चुके हैं तो दिव्या मदेरणा जलदाय मंत्री को रबड़ स्टैम्प कह चुकी हैं. डूंगरपुर विधायक गणेश घोघरा अपना इस्तीफा भेज चुके हैं तो वहीं राजेन्द्र विधूड़ी कह चुके हैं कि सीएम गहलोत रीट की सीबीआई जांच से डरते हैं.

विधायक अमीन खान विधानसभा में कह चुके हैं कि राज्य सरकार अल्पसंख्यकों को दरकिनार कर रही है तो भरत सिंह कुन्दनपुर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कई बार पत्र लिख चुके हैं. सरकार और सरकारी मशीनरी के खिलाफ आक्रोश जाहिर करने वालों में गिर्राज मलिंगा, रामलाल मीणा, हेमाराम चौधरी, राजेन्द्र गुढा, वाजिब अली और खिलाड़ीलाल बैरवा आदि के नाम शामिल हैं.

हालांकि इनमें से कई के सुर कुछ देर बाद ही बदल गए लेकिन जनता में इसका अच्छा मैसेज नहीं गया. जल्दबाजी में धैर्य खो रहे माननीयों की वजह से पार्टी और सरकार दोनों की बार-बार किरकिरी हो रही है. बार-बार हो रहे इन घटनाक्रमों से पार्टी द्वारा किए जा रहे एकजुटता के दावे फेल हो रहे हैं. और इन सबका खामियाजा सत्ता और संगठन दोनों को उठाना पड़ सकता है.

Tags: Jaipur news, Rajasthan news

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