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COVID-19: स्कूल सिलेबस तय करने में देरी, BJP नेता ने शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा को लिखा खत

COVID-19: स्कूल सिलेबस तय करने में देरी, BJP नेता ने शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा को लिखा खत

वासुदेव देवनानी ने एक खत लिखा है.

वासुदेव देवनानी ने एक खत लिखा है.

बीजेपी नेता वासुदेव देवनानी (Vasudev Devnani) ने शिक्षा मंत्री को लिखे अपने खत में कहा कि आधा शिक्षा सत्र खत्म होने को है, लेकिन सिलेबस को लेकर सरकार की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है.

अजमेर. राजस्थान में कोरोना संक्रमण (COVID-19) के बीच स्कूलों के पाठ्यक्रम तय करने में ढिलाई बरतने पर पूर्व शिक्षा मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता वासुदेव देवनानी (Vasudev Devnani) ने शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) को पत्र लिखा है. देवनानी ने कहा कि शिक्षा सत्र (Education Session) आधा खत्म होने को है, लेकिन सरकार की कुंभकरण नींद अभी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. पाठ्यक्रम को लेकर प्रदेश के लाखों छात्र और उनके अभिभावक खासा परेशान हैं, जबकि सरकार के उदासीन रवैये के चलते बोर्ड सहित सभी कक्षाओं का पाठ्यक्रम तय करने का अभी फिलहाल काम ठंडे बस्ते में है. देवनानी ने कहा कि कोरोना महामारी से उपजे संकट के बीच प्रदेश में सभी स्कूल बंद है. छात्रों की पढ़ाई नहीं चल रही है.

वासुदेव देवनानी का कहना है कि जुलाई महीने में केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 9वीं से 12वीं कक्षा तक के सलेबस में 30 प्रतिशत की कटौती कर सभी राज्य सरकारों के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया था. सीबीएसई का निर्णय छात्रों और अभिभावकों को राहत देने भरा है, लेकिन यह प्रदेश के छात्रों एवं अभिभावकों का दुर्भाग्य ही है कि आधा सत्र बीत जाने के बाद भी सरकार हाथ पर हाथ धरकर बैठी है. सरकार अब तक छात्रों के लिए पाठ्यक्रम तय नहीं कर पाई है, जबकि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा के तो महज 5 माह शेष है.

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बीजेपी का सरकार पर निशाना

देवनानी ने कहा कि सरकार द्वारा पाठ्यक्रम कटौती करने की चर्चा तो बहुत की गई लेकिन किस यूनिट में कौन-कौन से अध्याय पढ़ाए जाएंगे और कौन-कौन से अध्याय हटाए जाएंगे, अब तक इस विषय पर निर्णय नहीं हो सका है. सरकार की लापरवाही के चलते विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि आधा सत्र खत्म होने को है. ऐसे में सभी कक्षाओं के पाठयक्रम में 50 प्रतिशत की कटौती करना अवश्यक है. सरकार द्वारा  जल्दी ही पाठ्यक्रम तय करने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए ताकि छात्र उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से ध्यान एकाग्र कर अपना अध्यापन कार्य कर सके, लेकिन सरकार ने अब तक इस दिशा में केवल कागजी घोड़े दौड़ाने के अलावा और कुछ भी नहीं किया है, जो कि लाखों छात्रों के भविष्य के साथ सीधे खिलवाड़ है.

Tags: Chief Minister Ashok Gehlot, COVID 19 cases in Rajasthan, Rajasthan Education Department, Rajasthan government

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