राजस्थान: पड़ोसी राज्यों से सबक ले गहलोत सरकार, कोरोना काल में अनाथ हुए मासूमों की पीड़ा सुनें

केंद्र ने ऐसे बच्चों के लिए सहायता निधि की घोषणा कर दी है.

केंद्र ने ऐसे बच्चों के लिए सहायता निधि की घोषणा कर दी है.

Corona crisis: कोरोना काल में अपने पैरेंट्स को खो चुके सैंकड़ों बच्चे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो रहे हैं. राजस्थान सरकार ने अभी तक ऐसे बच्चों की सुध नहीं ली है, जबकि पड़ोसी राज्यों ने ऐसे बच्चों के लिये योजनाओं की घोषणा कर दी है.

  • Share this:

जयपुर. राज्य में कोरोना से बेसहारा हुए बच्चों (Orphaned innocents) की गिनती पर ही गफलत है. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में कहा है कि राजस्थान में 157 ऐसे बच्चे हैं जिन्होंने कोरोना काल (Corona period) में अभिभावक खोए हैं.जबकि राज्य में मिले आंकड़ों के मुताबिक ऐसे बच्चों की संख्या 411 है. इसके अलावा राज्य सरकार पड़ोसी राज्यों की तरह ऐसे बच्चों की मदद के लिए अभी तक कोई आर्थिक सहायता की घोषणा नहीं कर पाई है. कछुआ चाल से चलते हुए राजस्थान सरकार अभी तक ऐसे बच्चों का सर्वे और प्रस्ताव बनाने में ही लगी हुई है. जबकि पड़ोसी राज्यों ने ढाई हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक की बाल योजनाएं शुरू कर दी हैं.

कोरोना काल में ऐसे बच्चे दारुण दुख से गुजर रहे हैं, जिन्होंने इस महामारी में अपने माता-पिता को खो दिया है. परिवार का कमाने वाले और देखभाल करने वाले के गुजर जाने के बाद अनाथ हुए बच्चे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं. सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग से पूछा था कि कोरोना काल में विभिन्न राज्यों में कितने बच्चे बेसहारा हुए हैं और सरकारें इनके लिए क्या कर रही हैं ? केंद्र ने ऐसे बच्चों के लिए सहायता निधि की घोषणा कर दी है.

पड़ोस में मदद शुरू और हम अभी योजना बना रहे हैं

राजस्थान के पड़ोसी राज्यों की बात करें तो सबसे ज्यादा बच्चे मध्यप्रदेश में अनाथ हुए हैं. इसके बाद उत्तरप्रदेश और फिर हरियाणा का नंबर है. हलफनामे के मुताबिक राजस्थान में 87 बच्चे अनाथ हुए हैं. छह को अभिभावकों ने त्याग दिया है. जबकि 64 बच्चे ऐसे हैं, जिनमें पिता या मां की मौत हो गई है और वे अब सिंगल पैरेंट के पास हैं. हालांकि वास्तविकता में इन बच्चों की संख्या चार सौ से ज्यादा है. इसके बाजवूद राजस्थान सरकार ने इन बच्चों के लिए अपनी ओर से कोई ​योजना लागू नहीं की है. पड़ोसी राज्य ऐसे बच्चों को लाभान्वित कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश में मिलेगी चार हजार रुपये की हर माह मदद

उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसे बच्चों के वयस्क होने तक उनकी देखभाल करने वाले को चार हजार रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की है. दस वर्ष से कम आयु के मासूम जिनका कोई अभिभावक अथवा परिवार नहीं बचा है, उनको प्रदेश सरकार राजकीय बाल गृह में देखभाल कराएगी. इसमें केंद्र की भी मदद ली जाएगी.

मध्यप्रदेश सरकार 5 हजार की वित्तीय सहायता देगी



मध्यप्रदेश सरकार ने ऐसे बच्चों को पांच हजार रुपये की वित्तीय सहायता मुहैया कराएगी. सरकार ने मुख्यमंत्री कोविड बाल कल्याण योजना शुरू की है. इसमें ऐसे बच्चों को हर माह निशुल्क राशन भी दिया जाएगा. पहली से 12वीं तक सरकारी स्कूलों में निशुल्क पढ़ाई और जो बच्चे निजी स्कूल में पढ़ते हैं तो दस हजार रुपये सालाना दिए जाएंगे. कॉलेज की पढ़ाई का खर्चा भी सरकार उठाएगी.

2500 रुपये प्रति माह और बच्चियों को निशुल्क शिक्षा

हरियाणा सरकार ने अनाथ हुए बच्चों के लिए बाल सेवा योजना शुरू की है. बच्चों को 18 साल की आयु तक 2500 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे. इसके अलावा राशन आदि खर्च के लिए 12 हजार प्रतिवर्ष दिए जाएंगे. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में 12वीं तक बच्चियों को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज