Jaipur: टिड्डियों से पशु आहार तैयार किया जाये या वैक्यूम प्रेशर से इकट्ठा कर मार दिया जाए ? वैज्ञानिक तलाशेंगे संभावनाएं
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Jaipur: टिड्डियों से पशु आहार तैयार किया जाये या वैक्यूम प्रेशर से इकट्ठा कर मार दिया जाए ? वैज्ञानिक तलाशेंगे संभावनाएं
हाल ही में हुई राष्ट्रीय स्तर की एक वेबीनार में इस रिसर्च की रुपरेखा तैयार हुई है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौती बन चुके टिड्डी दल (Locust Terror) लगातार चारों ओर कोहराम मचा रहे हैं. लेकिन क्या हो कि अगर टिड्डियों को वैक्यूम प्रेशर से एक साथ इकट्ठा कर मार दिया जाए या फिर उनसे पशु आहार (Cattle Feed) तैयार कर दिया जाए ?

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जयपुर. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौती बन चुके टिड्डी दल (Locust Terror) लगातार चारों ओर कोहराम मचा रहे हैं. लेकिन क्या हो कि अगर टिड्डियों को वैक्यूम प्रेशर से एक साथ इकट्ठा कर मार दिया जाए या फिर उनसे पशु आहार (Cattle Feed) तैयार कर दिया जाए ? अगर टिड्डियों को झुण्ड में तब्दील ही ना होने दिया जाए और उन्हें उड़ने के काबिल ही ना छोड़ा जाए ? ये सवाल भले ही आपको अटपटे लग रहे हों लेकिन अब वैज्ञानिक इन सब सवालों का जवाब खोजने की तैयारी में हैं.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष बड़ी चुनौती बन चुकी टिड्डियों पर भारत में अब बड़े रिसर्च की तैयारी की जा रही है. इस रिसर्च में टिड्डियों से जुड़े हर पहलू पर स्टडी होगी. ये सभी सुझाव अभी विचार के स्तर पर ही हैं लेकिन, इन सबमें हकीकत बनने की संभावनाएं नजर आती हैं. लिहाजा इन सब बिन्दुओं पर रिसर्च की तैयारी है

कई एजेंसियां मिलकर करेंगी रिसर्च
हाल ही में हुई राष्ट्रीय स्तर की एक वेबीनार में इस रिसर्च की रुपरेखा तैयार हुई है. प्रदेश के कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया ने इसमें दिलचस्पी दिखाते हुए जल्द प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है. कृषि मंत्री चाहते हैं कि टिड्डियों पर व्यापक रिसर्च हो. इसके लिए फंड राज्य सरकार उपलब्ध करवाएगी. कीट विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अर्जुन सिंह बालोदा के मुताबिक भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालयों और ख्यातनाम कृषि वैज्ञानिकों के साथ ही टिड्डियों पर काम कर रही विभिन्न एजेंसियां एक साथ मिलकर बड़े पैमाने पर यह रिसर्च करेंगी ताकि आने वाले बरसों में टिड्डी नियंत्रण में इसका लाभ मिल पाए.
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भारत में 26 साल बाद टिड्डियों का प्रकोप हुआ है
भारत में 26 साल बाद टिड्डियों का प्रकोप हुआ है. इन्हें नियंत्रित करने के लिए अभी कीटनाशक छिड़काव ही एकमात्र कारगर तरीका मौजूद है जो कई मायनों में घातक भी है. इस दौरान जहां टिड्डियों के व्यवहार में परिवर्तन आ रहा है वहीं चुनौती भी कई गुना बड़ी होती जा रही है. लिहाजा इस पर व्यापक रिसर्च की जरुरत है.

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ऐसे किया जा सकता है टिड्डी नियंत्रण
डॉ. अर्जुन सिंह बालोदा के मुताबिक वेबीनार में देश के कई ख्यानताम वैज्ञानिक जुड़े थे जिन्होंने टिड्डियों को नियंत्रित करने के नए-नए उपाय सुझाए. वैज्ञानिकों के अनुसार प्रोटीन समेत अन्य पोषक तत्व होने से टिड्डियों से पशु आहार तैयार किया जा सकता है. कीटनाशक के घातक प्रभाव से बचने के लिए नीम आधारित कीटनाशक उपयोग लिए जा सकते हैं. इसके साथ ही कम कीटनाशक छिड़काव से ज्यादा टिड्डियां मारने की तकनीक पर काम हो सकता है.

टिड्डियां समूह में तब्दील होने पर ज्यादा घातक होती है
वैज्ञानिकों के मुताबिक टिड्डियां समूह में तब्दील होने पर ज्यादा घातक होती है लिहाजा फेरोमॉन तकनीक के जरिए इन्हें समूह में तब्दील होने से रोका जा सकता है. टिड्डियों को वैक्यूम प्रेशर से एकत्रित कर कीटनाशक से मारा जा सकता है ताकि कीटनाशक से जमीन दूषित ना हो. ऐसी तकनीक पर भी काम किया जा सकता है कि इनके हॉपर्स बड़े ही ना हों या फिर ये उड़ने का काबिल ही ना रह पाएं. रिसर्च में इन सब संभावनाओं को तलाशा जाएगा.
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