Home /News /rajasthan /

लोकसभा चुनाव-2019: अजमेर में बाहरी की आहट से स्थानीय दावेदारों में 'बैचेनी'

लोकसभा चुनाव-2019: अजमेर में बाहरी की आहट से स्थानीय दावेदारों में 'बैचेनी'

फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

प्रदेश की चर्चित अजमेर संसदीय सीट पर एक बार फिर से बाहरी प्रत्याशी के चुनाव मैदान में आने की सुगबुगाहट से स्थानीय दावेदार बैचेन हो गए हैं.

प्रदेश की चर्चित अजमेर संसदीय सीट पर एक बार फिर से बाहरी प्रत्याशी के चुनाव मैदान में आने की सुगबुगाहट से स्थानीय दावेदार बैचेन हो गए हैं. अजमेर संसदीय सीट के इतिहास पर नजर डाले तो यहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में स्थानीय दावेदारों को दरकिनार कर बाहरी प्रत्याशी मैदान में उतारने से परहेज नहीं किया है.

लोकसभा चुनाव-2019: BJP के लिए सिरदर्द बनी चूरू सीट, पार्टी नहीं ढूंढ पाई कोई तोड़

अजमेर संसदीय सीट हमेशा से ही सुर्खियों में रही है. वह चाहे पीसीसी चीफ सचिन पायलट के निर्वाचन क्षेत्र के रूप में रही हो या फिर बीजेपी के कद्दावर नेता रहे स्व. सांवरलाल जाट के क्षेत्र के रूप में. वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां किरण माहेश्वरी को तो कांग्रेस ने सचिन पायलट के रूप में बाहरी उम्मीदवार उतारे थे. इससे पहले 1985 में भी ऐसा ही हुआ था जब बीजेपी ने कैलाश मेघवाल और कांग्रेस ने विष्णु मोदी को उतारा था.

Loksabha Elections 2019: राजस्थान BJP कोर कमेटी की अमित शाह के साथ बैठक, सभी 25 सीटों पर मंथन

कांग्रेस को छह बार में से तीन बार सफलता मिली
अजमेर में बाहरी प्रत्याशी उतारे जाने का सिलसिला वर्ष 1980 से शुरू हुआ था. उसके बाद 2014 तक हुए कुल 11 चुनावों में से कांग्रेस ने 6 दफा बाहरी प्रत्याशी को मैदान में उतारे. इनमें से तीन सांसद भी बने. 1980 के चुनाव में आचार्य भगवानदेव और 1985 में विष्णु मोदी यहां से चुनाव लड़े और जीते. लेकिन 1991 में जगदीप धनखड़ और 2004 में हबीबुर्रहमान हार गए. पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने 2009 और 2014 में यहां से चुनाव लड़ा. वे 2009 में जीते और 2014 में हारे.

लोकसभा चुनाव-2019: वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी ने दिया बीजेपी से इस्तीफा 

'सबसे बड़े सट्टा बाजार' में मोदी को 260 से ज्यादा सीटें, राजस्थान में 80% सीटों पर BJP का कब्जा!

बीजेपी ने दो बाहरी उतारे और दोनों हार गए
इस अवधि में बीजेपी ने भी दो बार बाहरी प्रत्याशी को मैदान में उतारा, लेकिन वो दोनों ही हार गए. वर्ष 1985 में कैलाश मेघवाल हारे और 2009 में किरण माहे‌श्वरी. लिहाजा इस बार कांग्रेस के स्थानीय दावेदार बाहरी की आहट मात्र से सावधान हो गए हैं और सीधे शब्दों में इसकी खिलाफत भी कर रहे हैं.

लोकसभा चुनाव-2019: कांग्रेस और बीजेपी के लिए ये सीटें बनी हुई हैं जी का 'जंजाल'

लोकसभा चुनाव-2019: जयपुर जिले के मतदाता चुनते हैं पांच सांसद, जानिए कैसे ?

यह है बाहरी प्रत्याशी उतारे जाने का कारण
अजमेर से बाहरी प्रत्याशी को उतारने के पीछे एक बड़ा कारण स्थानीय संगठनों में गुटबाजी रहा है. यही कारण है कि एक बार फिर से दोनों ही दल विकल्प के रूप में बाहरी प्रत्याशी पर भी नजर बनाए हुए है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में अजमेर संसदीय क्षेत्र की आठ में से चार सीटें बीजेपी ने जीती है तो 2 सीटें कांग्रेस के खाते में आई हैं. वहीं एक-एक सीट दोनों ही दलों के बागियों ने जीती है.

लोकसभा चुनाव 2019: प्रदेश में बीजेपी-कांग्रेस के इन दिग्गजों पर रहेगी सभी की नजरें

लोकसभा चुनाव-2019: पाली में केन्द्रीय मंत्री चौधरी के खिलाफ पदाधिकारियों ने खोला मोर्चा

लोकसभा चुनाव 2019: अब BJP बदलेगी चुनावी रणनीति, 10 वोटर पर RSS का एक वर्कर

लोकसभा चुनाव-2019: MP सोनाराम ने जताई दावेदारी, संगठन महामंत्री से की मुलाकात

प्रत्याशी चयन में बदलाव की आहट, कांग्रेस नए जातीय समीकरण और बीजेपी देख रही फीडबैक

लोकसभा चुनाव-2019: पूर्व मंत्री निहालचंद ने कहा, किसी भी कीमत पर नहीं छोडूंगा घर

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट

Tags: Amit shah, Ashok gehlot, BJP, Congress, Jaipur news, Lok Sabha Election 2019, Lok sabha elections 2019, Pm narendra modi, Priyanka gandhi, Rahul gandhi, Rajasthan Lok Sabha Elections 2019, Rajasthan news, Sachin pilot, Vasundhara raje

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर