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OMG! चावल के दाने पर 20 मिनट में लिखा 'एक ओंकार', अजमेर की आलिशा के नाम Unique Record

OMG! चावल के दाने पर 20 मिनट में लिखा 'एक ओंकार', अजमेर की आलिशा के नाम Unique Record

अजमेर की आलिशा ने चावल के दाने पर 'एक ओंकार' लिखा है

अजमेर की आलिशा ने चावल के दाने पर 'एक ओंकार' लिखा है

Rajasthan News: अजमेर (Ajmer) की आलिशा ने चावल के दाने पर सिख धर्म के मूल मंत्र 'एक ओंकार' को  हिंदी और पंजाबी भाषा में महज 20 मिनट में लिखकर यूनिक वर्ल्ड रिकॉर्डस (Unique World Records) में अपना नाम दर्ज करा लिया है.

अजमेर. कहते हैं प्रतिभा को समय पर मंच मिले तो वह अपने मुकाम तक पहुंच ही जाती है. अपनी प्रतिभा के दम पर यूनिक वर्ल्ड रिकॉर्डस (Unique World Records) में अपना नाम दर्ज करवा चुकी अजमेर (Ajmer) शहर के पिपलिया बाजार निवासी महावीर प्रसाद बाफणा की 24 साल की बेटी आलिशा बाफना उर्फ गुडिया ने अब चावल के एक दाने पर हिंदी और पंजाबी में सिख धर्म का मूल मंत्र “एक ओंकार” लिख कर अब अपने हुनर का प्रदर्शन किया है. आलिशा ने पहले 10 मिनट 20 सेंकड के रिकाॅर्ड समय में चावल के एक दाने पर हिंदी में एक ओंकार लिखा. इस दौरान उनके मन में एक बात आई कि मूल मंत्र पंजाबी में है. इस कारण उन्होंने अपने गुरू के प्रति श्रद्धा जताने के मकसद से मूल मंत्र को उसकी मूल भाषा में लिखने का फैसला किया. 20 मिनट के समय में पंजाबी भाषा में मूल मंत्र के 61 शब्द उन्होंने लिखा.

गौरतलब है कि महज 25 साल की उम्र में आलिशा ने एक दो नहीं बल्कि कई कीर्तिमान अपने नाम कर लिए हैं. इससे पहले आलिशा ने चावल के दाने पर महामृत्युंजय मंत्र, नवकार महामंत्र समेत अन्य कई मंत्र और नाम लिख चुकी है. आलिशा ने बताया कि जयगच्छाधिपति जैन संत आचार्य पार्श्वचंद्र महाराज, डॉ. पदमचंद्र महाराज के प्रवचन लिखने के दौरान उनके द्वारा कॉपी में कम जगह पर ज्यादा अक्षर लिखने की प्रतिभा को देखकर गुरूदेव ने उनसे कहा कि चावल के दाने पर लिखने का प्रयास करें. जिस पर परिवार के सदस्यों ने भी प्रेरित किया और उन्होंने चावल के दाने पर अपनी प्रतिभा को निखारने का प्रयास शुरू कर दिया.

कड़ी मेहनत से बनाया रिकॉर्ड

आलिशा धीरे-धीरे इतनी पारंगत हो गई कि अब चाने के एक दाने पर उन्होंने रिकॉर्ड 68 अक्षर तक लिख रखे हैं. उन्होंने बताया कि चावल के दाने पर कुछ भी उकेरना इतना आसान नहीं. उन्होंने बताया कि चावल के दाने पर कुछ भी उकेरने के लिए सबसे पहले तो सांस रोकने की क्षमता बढ़ानी होती है. कम से कम 45 सेंकड से डेढ़ मिनट तक सांस रोकने की क्षमता विकसित करनी होती है. वह भी पूरी एकाग्रता के साथ. मामूली सी एक चूक पूरी मेहनत पर पानी फिर देती है.

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आलिशा की यह उपलब्धि और भी अधिक महत्वपूर्ण इस कारण हो जाती है क्योंकि आलिशा ने इससे पहले पंजाबी भाषा में कुछ भी नहीं लिखा है. ऐसे में पहली बार पंजाबी भाषा में सिख समाज के मूल मंत्र को लिखने में उन्हें 20 मिनट का समय लगा. इससे पूर्व आलिशा चावल के दाने पर नवकार महामंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र, गणेश मंत्र, गुरू स्तुति मंत्र लिख चुकी है.

Tags: Ajmer news, Viral news, अजमेर

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