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Rajasthan: वचन के पक्के लोक देवता तेजाजी के मंदिर जाएंगे राहुल गांधी, जाटों को साधने की कोशिश

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जिन लोक देवता तेजाजी के मंदिर जा रहे हैं, उन्हें भगवान शिव का ग्याहरवां अवतार माना जाता है.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जिन लोक देवता तेजाजी के मंदिर जा रहे हैं, उन्हें भगवान शिव का ग्याहरवां अवतार माना जाता है.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जिन लोक देवता तेजाजी के मंदिर जा रहे हैं, उन्हें भगवान शिव का ग्याहरवां अवतार माना जाता है. तेजाजी को राजस्थान, हरियाणा, यूपी औऱ मध्य प्रदेश में पूजा जाता है. जाट समुदाय और किसान तेजाजी को न सिर्फ अपना आराध्य, बल्कि आदर्श भी मानते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 13, 2021, 2:09 PM IST
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जयपुर. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी आज रुपनगढ़ में ट्रैक्टर मार्च औऱ किसान रैली से पहले किशनगढ़ के पास सुरसुरा गांव में लोक देवता तेजाजी के मंदिर जाएंगे. तेजाजी के आशीर्वाद के बाद वह ट्रैक्टर मार्च की अगुवाई करेंगे. आइए हम आपको बताते हैं कि राहुल गांधी जिस लोक देवता तेजाजी के मंदिर जा रहे हैं, वे हैं कौन? और सुरसुरा और किसानों से तेजाजी का क्या संबध है.

लोक देवता तेजाजी को भगवान शिव का ग्याहरवां अवतार माना जाता है. राजस्थान, हरियाणा, यूपी औऱ मध्यप्रदेश में तेजाजी को पूजा जाता है. जाट समुदाय तेजाजी को न सिर्फ अपना आराध्य, बल्कि आदर्श भी मानता है, तेजाजी वचन के पक्के थे. वचन निभाने के लिए उन्होंने अपनी जान तक दे दी थी. लोकदेवता तेजाजी का जन्म नागौर जिले के खरनाल गांव में एक किसान परिवार में 29 जनवरी 1074 को हुआ था. राहुल गांधी लोकदेवता तेजाजी के मंदिर में मत्था टेक कर राजस्थान से यूपी तक जाट समुदाय का राजनीतिक आशीर्वाद पाने भी कोशिश करेंगे. तेजाजी को वचन पालक मानने के पीछे एक लोक मान्यता है.

मान्यता के मुताबिक, तेजाजी की ससुराल सुरसुरा के के पास पनेर गांव में थी. वे अपनी पत्नी पेमल को लेने के लिए ससुराल आए थे. इसी दौरान तेजाजी की मुलाकात लांछां गुजरी नाम की महिला से होती है. लांछा पेमल की सहेली थी. लांछा की गायें लुटेरे ले गए. वह तेजाजी से मदद मांगने जाती है और तेजाजी उसे वचन देते हैं कि वह उसकी गायें लाकर देंगे. अपने वचन को पूरा करने के लिए तेजाजी लुटेरों से गायें छुड़ाने चले गए.



रास्ते में आग में जलते एक सांप को तेजाजी बचाते हैं, लेकिन जोड़े का सांप बिछुड़ने से नाग तेजाजी को गुस्से में डसना चाहता था, तेजाजी नाग को वचन देते हैं कि जैसे ही लांछा गुजरी की गायें लुटेरों से छुड़ाकर लौटंगें. तब वे खुद तुम्हें अपने प्राण देने आएंगे.
लांछा गुजरी की गायें लुटेरों से छुड़ाने के बाद उसे सौंपने के बाद लहूलुहान तेजाजी वचन के मुताबिक नाग के पास जाते हैं. और बाकी शरीर खून से लथपथ होने से अपनी जीभ नाग के आगे कर देते हैं. सर्पदंश से 28 अगस्त 1103 को सुरसुरा गांव में ही तेजाजी की मौत हो जाती है. अब हर साल उसी दिन सुरसुरा में तेजाजी के धाम पर मेला लगता है. इस मंदिर को लेकर इसी वजह से किसान समुदाय में विशेष आस्था है.
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