सचिन पायलट की खामोशी समर्थकों पर इस तरह पड़ रही भारी
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सचिन पायलट की खामोशी समर्थकों पर इस तरह पड़ रही भारी
सचिन पायलट (न्यूज़ 18 ग्राफिक्स)

बगावती तेवरों के चलते डिप्टी सीएम और पीसीसी (PCC) चीफ पद से हटाए जाने के 24 घंटे बाद भी सचिन पायलट (Sachin Pilot) के समर्थक पशोपेश में हैं.

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अजमेर. बगावती तेवरों के चलते डिप्टी सीएम और पीसीसी (PCC) चीफ पद से हटाए जाने के 24 घंटे बाद भी सचिन पायलट (Sachin Pilot) के समर्थक पशोपेश में हैं. अजमेर (Ajmer) से सांसद रहने के कारण पायलट के अजमेर में काफी समर्थक हैं, लेकिन बदलते घटनाक्रम के बाद उनके समर्थक भी खामोश और कंफ्यूज नजर आ रहे हैं. साल 2004 में अजमेर से सांसद बनने के बाद केंद्र में मंत्री पद मिलने के बाद पायलट ने अजमेर को अपनी कर्मस्थली बनाया था और यहीं से उन्होंने प्रदेश में अपनी जाजम फैलाना शुरू किया था.

अजमेर सांसद रहने में दौरान पायलट के जिले भर में समर्थक बढ़े औऱ डीसीसी में भी उनके पसंद के ही अध्यक्ष तैनात हुए. चाहे बात देहात अध्यक्ष के रूप में भूपेंद्र सिंह राठौड़ की हो या फिर शहर अध्यक्ष विजय जैन की. इन दोनों को पायलट का घोर समर्थक माना जाता है. इसके अलावा पीसीसी सचिव रहे और अजमेर उत्तर से चुनाव लड़े महेंद्र सिंह रलावता, अजमेर दक्षिण से चुनाव लड़े हेमंत भाटी, नसीराबाद से पूर्व विधायक रामनारायन गुर्जर, सहित दर्जनों बड़े नाम जो जिले की राजनीति कर रहे हैं, पायलट समर्थक माने जाते हैं. लेकिन सियासी भूचाल में जब से पायलट को डिप्टी सीएम और पीसीसी चीफ पद से हटाया गया है, उनके समर्थकों ने भी गहरी चुप्पी साध ली है.

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नेताओं के फोन बंद
हालांकि, बीते मंगलवार को कुछ युवा कार्यकर्त्ताओ ने इस्तीफा देकर अपना समर्थन जताया था, लेकिन वरिष्ठ और जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओ ने चुप्पी साधना ही बेहतर समझा. देहात अध्यक्ष भूपेंद्र राठौड़ पिछले 4 दिन से फ़ोन बन्द करके बैठे है तो वही महेंद्र सिंह रलावता ने भी मौजूद राजनैतिक घटनाक्रम को देखते हुए चुप रहना ही बेहतर समझा हुआ है. वहीं हेमन्त भाटी सब कुछ जानने समझने के बाद भी कुछ बोलना नहीं चाहते. पायलट के कारण ही हेमंत भाटी को दो बार विधानसभा का टिकट मिला था. यह बात अलग है कि दोनों बार उन्हें  हार का सामना करना पड़ा. ठीक ऐसा ही महेंद्र सिंह रलावता के साथ भी है. पायलट भक्ति के चलते ही उन्हें डीसीसी अध्यक्ष और बाद में अजमेर उत्तर से विधानसभा टिकट मिला था, लेकिन अब बदलते दौर में यह सब नेता अपने आप को दूर रखें हुए हैं.
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