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सतीश पूनिया ने फूंका उपचुनाव का बिगुल, सुजानगढ़ में कार्यकर्ताओं की टटोली नब्ज

पूनिया के असली इम्तिहान का सफर आज से जोशीले अंदाज में शुरू हुआ.
पूनिया के असली इम्तिहान का सफर आज से जोशीले अंदाज में शुरू हुआ.

sujangarh bye election: सुजानगढ़ में भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर रहती आई है. पिछले तीस साल में यहां एक बार भाजपा तो एक बार कांग्रेस जीतती आई है. मास्टर भंवरलाल के निधन के बाद यहां कांग्रेस को सहानुभूति की लहर पर भरोसा है. बीजेपी के पास मुकाबले के लिए मास्टर जैसे कद का चेहरा नहीं है.

  • Last Updated: January 19, 2021, 8:48 PM IST
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जयपुर.
प्रदेश में बीजेपी ने मंगलवार से उपचुनाव का चुनावी बिगुल फूंक दिया है. बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने पहले देव ढोके, फिर कार्यकर्ता के मन की बात सुनी और फिर जीत के मंत्र दिए.

पूनिया के असली इम्तिहान का सफर आज से जोशीले अंदाज में शुरू हुआ. जयपुर से बड़ी संख्या में गाड़ियों के काफिले के साथ रवाना हुए. मकसद कार्यकर्ताओं में जोश भरना था. पहले सालासर बालाजी के दर पर ढोक लगाई फिर उपचुनाव में जीत की प्रार्थना की. पूनिया ने दावा किया कि गहलोत सरकार के खिलाफ एंटी इंकमबेंसी है, इसलिए भाजपा ही उपचुनाव जीतेगी.

सुजानगढ़ में भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर


सुजानगढ़ में भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर रहती आई है. पिछले तीस साल में यहां एक बार भाजपा तो एक बार कांग्रेस जीतती आई है. मास्टर भंवरलाल मेघवाल ने पांच बार चुनाव जीतकर इस इलाके में अपनी मजबूत पकड़ साबित की. मास्टर भंवरलाल के निधन के बाद यहां कांग्रेस को सहानुभूति की लहर पर भरोसा है. बीजेपी के पास मुकाबले के लिए मास्टर जैसे कद का चेहरा नहीं है.



अपनों को मनाने की बड़ी चुनौती


पूर्व मंत्री और भाजपा से विधायक रह चुके खेमाराम मेघवाल के सामने फिर टिकट हासिल करना बड़ी चुनौती है. पार्टी बीदासर की प्रधान संतोष मेघवाल की दावेदारी को भी नजरंदाज करने के मूड में नहीं दिख रही है. पार्टी के पास उर्जावान कार्यकर्ताओं की समर्पित टीम है. हर बूथ पर बेहतर प्रबन्धन करने वाले रणनीतिकार हैं लेकिन पार्टी विद डिफरेंस कहे जाने वाले दल में असंतुष्टों की भरमार है. कहीं डर बगावत का है तो कहीं खिलाफत का. इसलिए पूनिया सबको साथ लेकर न केवल उपचुनाव फतह करना चाहते हैं. उनकी निगाह 2023 के विधानसभा चुनाव पर भी है.

ये उपचुनाव महज एक चुनाव भर नहीं है, भाजपा में इसके झटके दूर तक महसूस किए जायेंगे. भाजपा की जीत पार्टी कार्यकर्ताओं की जीत मानी जाएगी. साथ ही ये नतीजे कई दिग्गजों का पार्टी में भविष्य भी तय करेंगे.
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